UP Anganwadi Honorarium Hike 2026: कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹12,000, सहायिकाओं को ₹6,000 — पूरी जानकारी

गाँव की गली में सुबह-सुबह जब आंगनवाड़ी केंद्र का दरवाजा खुलता है, तो वहाँ सिर्फ एक कमरा नहीं खुलता, बल्कि पूरे गाँव के छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और नई माताओं के लिए दिन की शुरुआत होती है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका वहाँ बच्चों को पोषण आहार देती हैं, उनका वजन और लंबाई नापती हैं, टीकाकरण में मदद करती हैं, गर्भवती महिलाओं को सही खानपान की जानकारी देती हैं और हर घर तक सरकारी योजनाओं की खबर पहुँचाती हैं। यह काम जितना बड़ा है, उतना ही धैर्य और मेहनत भी माँगता है। इसलिए जब UP Anganwadi Honorarium Hike 2026 की खबर सामने आई, तो उत्तर प्रदेश की लाखों आंगनवाड़ी बहनों के बीच उम्मीद और खुशी की लहर दौड़ गई।

इस लेख में हम आपको इस बढ़ोतरी से जुड़ी हर जरूरी बात आसान भाषा में बताएँगे। पहले हम जानेंगे कि यह घोषणा कब और कहाँ हुई, फिर एक नजर में पूरी जानकारी देने वाली तालिका देखेंगे। उसके बाद हम समझेंगे कि इस बढ़ोतरी का लाभ किन्हें मिलेगा, मानदेय में कितना बदलाव हुआ है, और मानदेय के अलावा कौन-कौन से नए लाभ दिए जा रहे हैं। अंत में हम 2017 से 2026 तक के सफर पर नजर डालेंगे, यह भी जानेंगे कि अगर बढ़ा हुआ भुगतान अभी तक नहीं मिला है तो क्या करना चाहिए, और आपके मन के आम सवालों के जवाब देंगे। लेख को अंत तक पढ़ें, क्योंकि हर हिस्से में आपके काम की जानकारी छिपी है।

UP Anganwadi Honorarium Hike 2026: एक नजर में पूरी जानकारी

किसी भी बड़ी घोषणा को समझने का सबसे आसान तरीका है कि पहले उसकी मुख्य बातें एक जगह देख ली जाएँ। नीचे दी गई तालिका में इस बढ़ोतरी से जुड़े सभी अहम तथ्य दिए गए हैं, ताकि आपको अलग-अलग जगह भटकना न पड़े।

विषय जानकारी
घोषणा की तारीख 10 सितंबर 2026
घोषणा का स्थान और अवसर अयोध्या धाम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए आयोजित आईसीडीएस सम्मान समारोह, पोषण माह से पहले
घोषणा करने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
कार्यकर्ता का मानदेय पहले ₹8,000 प्रति माह
कार्यकर्ता का मानदेय अब ₹12,000 प्रति माह
सहायिका का मानदेय पहले ₹4,000 प्रति माह
सहायिका का मानदेय अब ₹6,000 प्रति माह
बढ़ोतरी कब से प्रभावी सितंबर 2026 से
बढ़ा हुआ भुगतान कब से अक्टूबर 2026 से; दिवाली से पहले बढ़ा भुगतान कई कार्यकर्ताओं तक पहुँचने लगा
लाभार्थियों की संख्या लगभग 2.91 लाख कार्यकर्ता और सहायिकाएँ — 1,75,982 कार्यकर्ता और 1,70,656 सहायिकाएँ
अन्य बड़े लाभ ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज, तीसरी साड़ी के लिए ₹500 डीबीटी से, पहले चरण में लगभग 1.28 लाख स्मार्टफोन

यह तालिका बताती है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ एक छोटा बदलाव नहीं है, बल्कि लाखों महिलाओं के जीवन से जुड़ा एक बड़ा फैसला है। अब हम इसके हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।

किन्हें मिलेगा इस बढ़ोतरी का लाभ?

इस बढ़ोतरी का लाभ उत्तर प्रदेश में काम करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मिलेगा। महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी के अनुसार, प्रदेश में लगभग 2.91 लाख कार्यकर्ता और सहायिकाएँ इस दायरे में आती हैं। इनमें 1,75,982 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 1,70,656 सहायिकाएँ शामिल हैं। यह संख्या अपने आप में बताती है कि यह फैसला कितने बड़े वर्ग को छूता है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केंद्र की मुख्य जिम्मेदारी संभालती हैं। वे बच्चों का पंजीकरण करती हैं, पोषण आहार का वितरण देखती हैं, स्वास्थ्य जाँच में सहयोग करती हैं, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मार्गदर्शन देती हैं और गाँव में स्वास्थ्य व पोषण से जुड़ी जानकारी पहुँचाती हैं। सहायिका उनके साथ मिलकर केंद्र की रोजमर्रा की व्यवस्था संभालती हैं — बच्चों की देखभाल में मदद, भोजन तैयार करने में सहयोग, केंद्र की सफाई और व्यवस्था, और कार्यकर्ता के काम में हाथ बँटाना। दोनों की भूमिका एक-दूसरे से जुड़ी हुई है, इसलिए बढ़ोतरी दोनों के लिए की गई है।

यह भी समझना जरूरी है कि आंगनवाड़ी का काम सिर्फ एक नौकरी नहीं है, यह समाज सेवा से जुड़ा काम है। कई कार्यकर्ता और सहायिकाएँ वर्षों से अपने गाँव के बच्चों और महिलाओं के साथ जुड़ी हुई हैं। वे हर घर को जानती हैं, हर बच्चे का नाम जानती हैं और हर माँ की परेशानी समझती हैं। ऐसे में मानदेय में बढ़ोतरी उनके काम के सम्मान का भी प्रतीक है। सरकार ने इस फैसले के साथ यह संदेश दिया है कि जमीनी स्तर पर पोषण और बाल विकास का काम करने वाली महिलाओं का योगदान अनदेखा नहीं किया जा सकता।

मानदेय में कितनी बढ़ोतरी हुई है?

मानदेय की नई दरों को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें। इसमें पहले का मानदेय, अब का मानदेय और कुल बढ़ोतरी साफ-साफ दिखाई गई है।

पद पहले मानदेय (प्रति माह) अब मानदेय (प्रति माह) कुल बढ़ोतरी
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ₹8,000 ₹12,000 ₹4,000
आंगनवाड़ी सहायिका ₹4,000 ₹6,000 ₹2,000

कार्यकर्ता का मानदेय ₹8,000 से बढ़कर ₹12,000 प्रति माह हो गया है, यानी ₹4,000 की बढ़ोतरी हुई है। सहायिका का मानदेय ₹4,000 से बढ़कर ₹6,000 प्रति माह हो गया है, यानी ₹2,000 की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी सितंबर 2026 से प्रभावी मानी गई है और बढ़ा हुआ भुगतान अक्टूबर 2026 से मिलना शुरू हुआ है। खबरों के अनुसार, दिवाली से पहले ही बढ़ा हुआ भुगतान कई कार्यकर्ताओं तक पहुँचने लगा था, जिससे त्योहार के समय उनके घरों में राहत मिली।

एक बात यहाँ साफ तौर पर समझ लेनी चाहिए। यह मानदेय केंद्र और राज्य दोनों के योगदान और प्रोत्साहन राशि को मिलाकर बनता है। सितंबर 2026 में जारी सरकारी आदेश में राज्य के हिस्से की बढ़ोतरी कार्यकर्ताओं के लिए ₹4,000 और सहायिकाओं के लिए ₹2,000 तय की गई है। आदेश में नियत और प्रदर्शन से जुड़े हिस्से भी हैं, इसलिए वास्तविक भुगतान लागू नियमों के अनुसार कुछ अलग हो सकता है। इसका मतलब यह है कि हर कार्यकर्ता को मिलने वाली कुल राशि में नियमों के अनुसार थोड़ा अंतर संभव है। इसलिए अपनी सही राशि के लिए अपने क्षेत्र की पर्यवेक्षिका या संबंधित अधिकारी से जानकारी लेना सबसे सही तरीका है।

कई कार्यकर्ताओं के मन में यह सवाल भी होगा कि पैसा कब और कैसे मिलेगा। भुगतान पहले की तरह ही बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से पहुँचता है। अगर आपका बैंक खाता, आधार और अन्य जानकारी सही है, तो भुगतान में रुकावट की संभावना कम रहती है। अगर किसी महीने भुगतान रुका है या कम आया है, तो घबराने की बजाय पहले अपने बैंक खाते की जानकारी जाँचें और फिर अपने पर्यवेक्षिका से संपर्क करें। इस बारे में विस्तार से जानकारी लेख के आगे वाले हिस्से में दी गई है।

मानदेय के अलावा मिलने वाले 4 बड़े लाभ

इस बार की घोषणा सिर्फ मानदेय तक सीमित नहीं है। सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए चार बड़े लाभों की बात कही है। इनमें से हर लाभ उनके जीवन के अलग-अलग पहलू से जुड़ा है — आमदनी, स्वास्थ्य, सम्मान और काम करने का तरीका। आइए एक-एक करके समझते हैं।

1. मानदेय में बढ़ोतरी — हर महीने ज्यादा सहारा

पहला और सबसे सीधा लाभ मानदेय में बढ़ोतरी है। कार्यकर्ताओं को अब ₹12,000 और सहायिकाओं को ₹6,000 प्रति माह मिलेंगे। यह रकम पहले की तुलना में काफी ज्यादा है और इससे घर के रोजमर्रा के खर्च में मदद मिलेगी। कई कार्यकर्ता अपने परिवार की जरूरतों के लिए इसी मानदेय पर निर्भर रहती हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन, दवाइयाँ और त्योहारों के खर्च — इन सब में बढ़ा हुआ मानदेय राहत देगा। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह बढ़ोतरी सितंबर 2026 से प्रभावी है और बढ़ा हुआ भुगतान अक्टूबर 2026 से मिलना शुरू हुआ है। दिवाली से पहले भुगतान पहुँचने की खबर ने इस राहत को और भी खास बना दिया था।

मानदेय की यह बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। इसके पीछे वर्षों की मेहनत और लगातार उठती माँग है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लंबे समय से अपने मानदेय में बढ़ोतरी की माँग कर रही थीं, क्योंकि महँगाई बढ़ रही थी और काम का दायरा भी बढ़ रहा था। सरकार ने इस माँग को समझा और इस बार एक बड़ा फैसला लिया। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और वे और भी लगन से अपने काम को करेंगी।

2. ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज — स्वास्थ्य की बड़ी सुरक्षा

दूसरा लाभ स्वास्थ्य से जुड़ा है और यह शायद सबसे बड़ा सहारा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और उनके परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुविधा पात्र सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपलब्ध होगी। कैशलेस का मतलब है कि इलाज के समय पहले पैसे जमा करने की चिंता कम होगी और इलाज पर ध्यान देना आसान होगा। यह लाभ अंतिम दिशा-निर्देशों के अधीन है, इसलिए इसकी पूरी प्रक्रिया और पात्रता के बारे में आधिकारिक जानकारी आने पर ही अंतिम विवरण स्पष्ट होगा।

यह लाभ क्यों खास है, यह समझना आसान है। किसी भी परिवार में अचानक बीमारी आ जाए तो इलाज का खर्च बड़ा बोझ बन जाता है। कई बार लोग पैसे की कमी के कारण सही समय पर इलाज नहीं करा पाते। ₹5 लाख तक की कैशलेस सुविधा इस बोझ को कम करती है और परिवार को यह भरोसा देती है कि जरूरत पड़ने पर इलाज मिलेगा। कार्यकर्ता और सहायिकाएँ दिन भर दूसरों के स्वास्थ्य की चिंता करती हैं, अब उनके अपने स्वास्थ्य और उनके परिवार के स्वास्थ्य की भी चिंता की जा रही है। यह उनके काम के सम्मान का एक और रूप है।

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्र की पर्यवेक्षिका, बाल विकास परियोजना अधिकारी या जिला कार्यक्रम अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। वे पंजीकरण और अन्य प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी दे सकेंगे। कोई भी जानकारी अधूरी सुनकर आगे न बढ़ें, बल्कि आधिकारिक सूचना आने पर ही प्रक्रिया पूरी करें।

3. तीसरी साड़ी के लिए ₹500 डीबीटी से

तीसरा लाभ कार्यकर्ताओं की पहचान और सम्मान से जुड़ा है। पहले आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दो साड़ियों का प्रावधान था, अब यह बढ़ाकर तीन साड़ियाँ कर दिया गया है। तीसरी साड़ी के लिए ₹500 की राशि डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी। साड़ी सिर्फ एक कपड़ा नहीं है, यह आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की पहचान है। गाँव में जब कार्यकर्ता साड़ी पहनकर केंद्र जाती हैं, तो लोग उन्हें पहचानते हैं और सम्मान देते हैं। तीसरी साड़ी मिलने से उनकी यह पहचान और भी मजबूत होगी।

डीबीटी का मतलब है कि यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे बीच में कोई रुकावट नहीं होगी और पैसा सीधे लाभार्थी तक पहुँचेगा। यह छोटा लगने वाला लाभ भी रोजमर्रा के जीवन में मायने रखता है, क्योंकि कार्यकर्ताओं को अपने काम के लिए साफ-सुथरी और सही पहचान वाली पोशाक चाहिए होती है। सरकार ने इस जरूरत को समझा और साड़ियों की संख्या बढ़ा दी।

4. स्मार्टफोन और स्मार्ट आंगनवाड़ी केंद्र — काम का नया तरीका

चौथा लाभ काम करने के तरीके को आधुनिक बनाने से जुड़ा है। पहले चरण में लगभग 1.28 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को स्मार्टफोन दिए गए हैं। योजना यह है कि आंगनवाड़ी केंद्र स्मार्ट केंद्र बनें, जहाँ जानकारी वास्तविक समय में दर्ज की जा सके। इसका मतलब है कि बच्चों का वजन, पोषण आहार का वितरण, टीकाकरण और अन्य जानकारी अब कागज के बजाय फोन के माध्यम से दर्ज की जा सकेगी और सही समय पर सही जानकारी ऊपर तक पहुँचेगी।

स्मार्टफोन मिलने से कार्यकर्ताओं का काम आसान भी होगा और तेज भी। पहले कई जानकारियाँ कागज पर लिखकर जमा करनी पड़ती थीं, जिसमें समय लगता था और कभी-कभी गलती भी हो जाती थी। अब जानकारी सीधे डिजिटल तरीके से दर्ज होगी, जिससे रिकॉर्ड सही रहेगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत देखा जा सकेगा। इससे पोषण और बाल विकास से जुड़े फैसले भी बेहतर तरीके से लिए जा सकेंगे। यह कदम आंगनवाड़ी व्यवस्था को आने वाले समय के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

कुछ कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन चलाने में शुरुआत में दिक्कत आ सकती है, लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास से यह आसान हो जाएगा। अगर फोन के उपयोग, ऐप या जानकारी दर्ज करने में कोई परेशानी आती है, तो अपनी पर्यवेक्षिका से मदद लें। नई तकनीक सीखना शुरू में कठिन लगता है, लेकिन एक बार आदत पड़ जाए तो काम बहुत आसान हो जाता है।

2017 से 2026 तक का सफर: मानदेय कैसे बढ़ा?

आज का ₹12,000 का मानदेय एक दिन में नहीं आया है। इसके पीछे नौ साल का लंबा सफर है। 2017 में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ₹3,000 प्रति माह मानदेय मिलता था। उसके बाद मानदेय बढ़ाकर ₹8,000 किया गया, जो प्रदर्शन से जुड़ा हुआ था। अब 2026 में यह बढ़कर ₹12,000 हो गया है। सहायिकाओं का मानदेय भी इसी दौरान ₹2,000 से बढ़कर ₹6,000 हुआ है। यह सफर बताता है कि धीरे-धीरे ही सही, लेकिन मानदेय में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

2017 से 2026 के बीच काम का दायरा भी बढ़ा है। पहले आंगनवाड़ी केंद्र मुख्य रूप से बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े थे, लेकिन अब उनका काम टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, पोषण माह जैसे अभियानों और डिजिटल रिकॉर्ड तक फैल गया है। काम बढ़ने के साथ-साथ मानदेय बढ़ना भी जरूरी था। इस बार की बढ़ोतरी उसी जरूरत को पूरा करती है।

यह इतिहास इसलिए भी जानना जरूरी है, ताकि कार्यकर्ता यह समझ सकें कि उनकी मेहनत को धीरे-धीरे पहचान मिल रही है। ₹3,000 से ₹12,000 तक का सफर आसान नहीं था। इसमें कई बार माँगें उठीं, कई बार चर्चाएँ हुईं और अंत में फैसला आया। अब जब मानदेय ₹12,000 हुआ है, तो यह एक नई शुरुआत है। आगे भी काम और मानदेय दोनों में सुधार की उम्मीद बनी रहनी चाहिए।

अगर बढ़ा हुआ भुगतान अभी तक नहीं मिला है तो क्या करें?

कई कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मन में यह सवाल होगा कि अगर बढ़ा हुआ भुगतान अभी तक उनके खाते में नहीं आया है, तो क्या करना चाहिए। सबसे पहले घबराएँ नहीं। भुगतान कई चरणों में पहुँचता है और कभी-कभी किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से देरी हो सकती है। नीचे दिए गए कदमों को एक-एक करके अपनाएँ।

सबसे पहले अपने बैंक खाते की जानकारी जाँचें। देखें कि आपका बैंक खाता चालू है या नहीं, आधार से जुड़ा है या नहीं, और डीबीटी के लिए सही जानकारी दर्ज है या नहीं। कई बार बैंक खाते की छोटी सी गलती से भी भुगतान रुक जाता है। अपने बैंक की पासबुक या मोबाइल बैंकिंग से हाल के लेनदेन देखें और यह पता करें कि पिछला भुगतान कब और कितना आया था।

दूसरा कदम है अपने क्षेत्र की पर्यवेक्षिका से संपर्क करना। पर्यवेक्षिका आपके केंद्र और आपके भुगतान की स्थिति के बारे में सबसे सही जानकारी दे सकती हैं। उनसे पूछें कि आपका नाम भुगतान सूची में है या नहीं, और अगर कोई दस्तावेज अधूरा है तो उसे कैसे पूरा करना है। तीसरा कदम है बाल विकास परियोजना अधिकारी यानी सीडीपीओ से संपर्क करना। अगर पर्यवेक्षिका से बात करने के बाद भी समस्या सुलझ नहीं रही है, तो सीडीपीओ से मिलें। चौथा कदम है जिला कार्यक्रम अधिकारी यानी डीपीओ से संपर्क करना। जिला स्तर पर भुगतान और अन्य मामलों की जानकारी उनके पास होती है।

इन अधिकारियों से संपर्क करते समय अपनी जानकारी साथ रखें — अपना नाम, केंद्र का नाम, पंजीकरण संख्या यदि हो, और बैंक खाते का विवरण। इससे आपकी समस्या जल्दी समझी जाएगी और समाधान भी जल्दी मिलेगा। किसी भी बिचौलिए को पैसे देकर भुगतान जल्दी कराने की कोशिश न करें। भुगतान की प्रक्रिया आधिकारिक माध्यम से ही होती है और इसके लिए किसी को पैसे देने की जरूरत नहीं है।

स्वास्थ्य सुविधा के पंजीकरण, पैकेज की जानकारी या अन्य लाभों के लिए भी यही अधिकारी सही मार्गदर्शन देंगे। इसलिए किसी भी लाभ से जुड़ी जानकारी के लिए सबसे पहले अपने क्षेत्र की पर्यवेक्षिका, सीडीपीओ या डीपीओ से संपर्क करें। अफवाहों पर भरोसा न करें और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अधूरी जानकारी को सच न मानें। सही जानकारी हमेशा आधिकारिक स्रोत से ही लें।

राज्यवार तुलना: यूपी और केंद्रीय हिस्सेदारी को कैसे समझें?

आंगनवाड़ी मानदेय को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इसमें केंद्र और राज्य दोनों का योगदान होता है। दिसंबर 2024 में लोकसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार, एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए केंद्रीय हिस्सा ₹4,500 प्रति माह है। राज्य सरकारें इसके ऊपर अपनी ओर से अतिरिक्त राशि जोड़ती हैं, इसलिए अलग-अलग राज्यों में कुल मानदेय अलग-अलग होता है। उत्तर प्रदेश में अब कुल मानदेय ₹12,000 हुआ है, जिसमें केंद्रीय हिस्सा, राज्य का हिस्सा और प्रोत्साहन राशि शामिल हैं।

इस तुलना से यह साफ होता है कि किसी भी राज्य का मानदेय सिर्फ केंद्रीय हिस्से से तय नहीं होता, बल्कि राज्य सरकार कितना जोड़ती है, इस पर भी निर्भर करता है। उत्तर प्रदेश ने इस बार राज्य के हिस्से में बड़ी बढ़ोतरी की है, इसलिए कुल मानदेय ₹12,000 तक पहुँचा है। दूसरे राज्यों में यह राशि कम या ज्यादा हो सकती है, क्योंकि हर राज्य की अपनी नीति और बजट होता है। इसलिए यूपी के मानदेय की तुलना किसी दूसरे राज्य से करते समय यह ध्यान रखें कि दोनों राज्यों की राज्य-स्तरीय top-up राशि अलग-अलग होती है।

यह जानकारी इसलिए भी जरूरी है, ताकि कार्यकर्ता यह समझ सकें कि उनका मानदेय कैसे बनता है। अगर भविष्य में केंद्रीय हिस्से या राज्य के हिस्से में कोई बदलाव होता है, तो कुल मानदेय पर भी असर पड़ेगा। इसलिए मानदेय से जुड़ी हर नई घोषणा को इसी नजरिए से देखना चाहिए — केंद्रीय हिस्सा कितना है, राज्य ने कितना जोड़ा है और कुल राशि कितनी बनती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल — FAQ

1. UP Anganwadi Honorarium Hike 2026 की घोषणा कब हुई?

UP Anganwadi Honorarium Hike 2026 की घोषणा 10 सितंबर 2026 को हुई थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या धाम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए आयोजित आईसीडीएस सम्मान समारोह में यह घोषणा की थी। यह समारोह पोषण माह से पहले आयोजित किया गया था।

2. अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को कितना मानदेय मिलेगा?

अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को ₹12,000 प्रति माह और सहायिका को ₹6,000 प्रति माह मानदेय मिलेगा। पहले कार्यकर्ता को ₹8,000 और सहायिका को ₹4,000 प्रति माह मिलता था। यानी कार्यकर्ता के मानदेय में ₹4,000 और सहायिका के मानदेय में ₹2,000 की बढ़ोतरी हुई है।

3. बढ़ा हुआ मानदेय कब से मिलेगा?

यह बढ़ोतरी सितंबर 2026 से प्रभावी मानी गई है और बढ़ा हुआ भुगतान अक्टूबर 2026 से मिलना शुरू हुआ है। खबरों के अनुसार, दिवाली से पहले ही बढ़ा हुआ भुगतान कई कार्यकर्ताओं तक पहुँचने लगा था। अगर आपका भुगतान अभी तक नहीं आया है, तो अपने क्षेत्र की पर्यवेक्षिका, सीडीपीओ या डीपीओ से संपर्क करें।

4. इस बढ़ोतरी का लाभ कितने लोगों को मिलेगा?

इस बढ़ोतरी का लाभ उत्तर प्रदेश की लगभग 2.91 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मिलेगा। इनमें 1,75,982 कार्यकर्ता और 1,70,656 सहायिकाएँ शामिल हैं। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी के अनुसार दी गई है।

5. ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज का लाभ कैसे मिलेगा?

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और उनके परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज पात्र सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सूचीबद्ध अस्पतालों में मिलेगा। यह सुविधा अंतिम दिशा-निर्देशों के अधीन है। पंजीकरण और प्रक्रिया की सही जानकारी के लिए अपने क्षेत्र की पर्यवेक्षिका, सीडीपीओ या डीपीओ से संपर्क करें।

6. तीसरी साड़ी और स्मार्टफोन के बारे में क्या जानकारी है?

तीसरी साड़ी के लिए ₹500 की राशि डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी। पहले दो साड़ियों का प्रावधान था, अब यह बढ़ाकर तीन कर दिया गया है। स्मार्टफोन के मामले में पहले चरण में लगभग 1.28 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को स्मार्टफोन दिए गए हैं, ताकि केंद्र स्मार्ट केंद्र बन सकें और जानकारी वास्तविक समय में दर्ज की जा सके।

7. अगर बढ़ा हुआ भुगतान नहीं मिला है तो किससे संपर्क करें?

अगर बढ़ा हुआ भुगतान अभी तक नहीं मिला है, तो सबसे पहले अपने बैंक खाते और डीबीटी से जुड़ी जानकारी जाँचें। फिर अपने क्षेत्र की पर्यवेक्षिका से संपर्क करें। अगर जरूरत पड़े तो बाल विकास परियोजना अधिकारी यानी सीडीपीओ या जिला कार्यक्रम अधिकारी यानी डीपीओ से मिलें। भुगतान के लिए किसी बिचौलिए को पैसे न दें।

आधिकारिक जानकारी कहाँ से लें?

मानदेय, स्वास्थ्य सुविधा, साड़ी और स्मार्टफोन से जुड़ी सही और ताजा जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें। उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट up.gov.in पर जाकर आप राज्य सरकार की घोषणाओं और विभागों की जानकारी देख सकते हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग, उत्तर प्रदेश और आईसीडीएस उत्तर प्रदेश से जुड़ी जानकारी भी आधिकारिक माध्यमों से ही लें। इस लेख में दी गई जानकारी एनडीटीवी इंडिया, न्यूज18 हिंदी, टाइम्स ऑफ इंडिया और लाइवमिंट की खबरों पर आधारित है, लेकिन किसी भी लाभ की अंतिम प्रक्रिया और पात्रता के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचना ही मान्य होगी।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का काम गाँव के हर बच्चे और हर माँ के जीवन से जुड़ा है। मानदेय में बढ़ोतरी, स्वास्थ्य सुरक्षा, तीसरी साड़ी और स्मार्टफोन जैसे लाभ उनके काम को सम्मान देने की दिशा में बड़े कदम हैं। अगर आप आंगनवाड़ी कार्यकर्ता या सहायिका हैं, तो इस जानकारी को अपने साथी कार्यकर्ताओं के साथ जरूर साझा करें, ताकि हर बहन तक सही जानकारी पहुँच सके। और अगर आपका बढ़ा हुआ भुगतान अभी तक नहीं आया है, तो आज ही अपनी पर्यवेक्षिका से संपर्क करें।

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