PMEGP Loan 2026: ₹50 लाख तक के बिज़नेस पर 35% तक सब्सिडी — पूरी जानकारी

अगर आप अपना खुद का बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं — छोटी फैक्ट्री, सर्विस सेंटर, दुकान से बड़ा कुछ — लेकिन पैसे की कमी बीच में आ रही है, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। भारत सरकार की एक योजना ऐसी है जो बिज़नेस लोन पर सीधे सब्सिडी देती है, और कई लोग इसके बारे में या तो जानते नहीं, या अधूरी जानकारी रखते हैं।

इस PMEGP Loan 2026 गाइड में हम समझेंगे कि यह योजना असल में है क्या, कौन इसका फायदा ले सकता है, आवेदन कैसे करना है, बैंक से लोन कैसे मिलता है, और सबसे ज़रूरी — असली रुपयों में पूरा हिसाब। आखिर में उन गलतियों के बारे में भी बात करेंगे जिनकी वजह से लोगों के आवेदन रिजेक्ट हो जाते हैं।

चलिए शुरू करते हैं — स्टेप बाय स्टेप, आसान भाषा में।

योजना एक नज़र में (Quick Facts)

बिंदु जानकारी
योजना का नाम PMEGP — प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (Prime Minister’s Employment Generation Programme)
लाभ बिज़नेस लोन पर सरकार से सब्सिडी (मार्जिन मनी)
सब्सिडी 15% से 35% तक (श्रेणी और क्षेत्र के अनुसार)
अधिकतम प्रोजेक्ट लागत मैन्युफैक्चरिंग — ₹50 लाख; बिज़नेस/सर्विस — ₹20 लाख
आवेदन सिर्फ ऑनलाइन — kviconline.gov.in / pmegp.msme.gov.in
आयु 18 वर्ष या अधिक
आय सीमा कोई आय सीमा नहीं
संपत्ति गिरवी (collateral) ₹10 लाख तक के लोन पर नहीं

PMEGP Loan 2026: यह योजना किसके लिए है?

PMEGP केंद्र सरकार की एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है। आसान शब्दों में — आप बैंक से बिज़नेस लोन लेते हैं, और सरकार उस लोन के एक हिस्से को सब्सिडी के रूप में चुका देती है। यानी आपको पूरा लोन वापस नहीं करना पड़ता; सब्सिडी वाला हिस्सा सरकार की तरफ से आ जाता है।

इस योजना को तीन एजेंसियां मिलकर चलाती हैं — KVIC (खादी और ग्रामोद्योग आयोग), KVIB (खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड), और DIC (जिला उद्योग केंद्र)। आवेदन करते समय आप इन तीनों में से अपने नज़दीकी एजेंसी चुन सकते हैं।

ध्यान देने वाली बात: PMEGP सिर्फ नए यूनिट (new units) के लिए है। अगर आपकी यूनिट पहले से चल रही है, या आपने उसी प्रोजेक्ट के लिए पहले किसी सरकारी योजना (PMRY, REGP, PMEGP) से सब्सिडी ली है, तो आप दोबारा आवेदन नहीं कर सकते।

और हां — यह 2026 की संपूर्ण गाइड आधिकारिक नियमों (official guidelines) पर आधारित है। यहां कोई मनगढ़ंत दावा नहीं मिलेगा, सिर्फ वही जानकारी जो सरकारी स्रोतों से सत्यापित है।

सब्सिडी कितनी मिलेगी? (पूरी टेबल)

सब्सिडी दो चीज़ों पर निर्भर करती है — आप किस श्रेणी में आते हैं और आपका प्रोजेक्ट शहरी (urban) है या ग्रामीण (rural) क्षेत्र में है।

श्रेणी शहरी क्षेत्र (Urban) ग्रामीण क्षेत्र (Rural)
सामान्य श्रेणी (General) 15% 25%
विशेष श्रेणी (Special)* 25% 35%

*विशेष श्रेणी में आते हैं: SC/ST, OBC, अल्पसंख्यक, महिलाएं, पूर्व सैनिक (ex-servicemen), शारीरिक रूप से दिव्यांग, उत्तर-पूर्वी राज्य (NER) के निवासी, और पहाड़ी व सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग।

एक उदाहरण से समझिए: अगर कोई महिला ग्रामीण क्षेत्र में ₹10 लाख का प्रोजेक्ट लगाती है, तो उसे 35% यानी ₹3,50,000 की सब्सिडी मिलेगी। नीचे हमने दो पूरे उदाहरण रुपयों के हिसाब के साथ दिए हैं।

मार्जिन मनी कैसे काम करती है — अपना पैसा, बैंक का लोन

यहां सबसे ज़रूरी बात समझ लीजिए, क्योंकि इसी में सबसे ज़्यादा गलतफहमी होती है। सब्सिडी नकद (cash) में आपके हाथ में नहीं आती। इसे “मार्जिन मनी” कहा जाता है।

पूरा सिस्टम ऐसे काम करता है:

  • आपका योगदान (Own Contribution): सामान्य श्रेणी के लिए प्रोजेक्ट लागत का 10%, विशेष श्रेणी के लिए सिर्फ 5%। यह पैसा आपको खुद लगाना होता है।
  • सरकार की सब्सिडी (Margin Money): ऊपर दी गई टेबल के अनुसार 15% से 35% तक। यह रकम आपके नाम पर बैंक में 3 साल के लिए लॉक्ड TDR (टर्म डिपॉज़िट) के रूप में रखी जाती है। इस पर आपको कोई ब्याज नहीं मिलता, और 3 साल से पहले इसे निकाला नहीं जा सकता।
  • बैंक का लोन: बाकी बची रकम बैंक टर्म लोन के रूप में देता है।

मतलब साफ है — सब्सिडी सीधे आपके लोन को कम कर देती है, लेकिन वह पैसा आप खर्च नहीं कर सकते। 3 साल तक आपकी यूनिट ठीक से चली और लोन की किस्तें समय पर भरी गईं, तो सब्सिडी आपके लोन खाते में समायोजित हो जाती है। अगर 3 साल के लॉक-इन के अंदर यूनिट बंद हो गई या पैसे का दुरुपयोग हुआ, तो सरकार सब्सिडी वापस वसूल कर लेती है।

अधिकतम प्रोजेक्ट लागत — कितना बड़ा बिज़नेस?

  • मैन्युफैक्चरिंग (उत्पादन) यूनिट: अधिकतम ₹50 लाख तक की प्रोजेक्ट लागत पर सब्सिडी मिलती है।
  • बिज़नेस / सर्विस यूनिट: अधिकतम ₹20 लाख तक की प्रोजेक्ट लागत पर सब्सिडी मिलती है।

अगर आपका प्रोजेक्ट इससे बड़ा है, तो भी बैंक बाकी रकम का लोन दे सकता है — लेकिन उस अतिरिक्त रकम पर कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। सब्सिडी सिर्फ तय सीमा तक ही लागू होती है।

2nd Loan — पुरानी यूनिट के अपग्रेडेशन के लिए

बहुत कम लोग जानते हैं कि PMEGP में दूसरा लोन (2nd loan) भी मिलता है। अगर आपकी यूनिट पहले से PMEGP, REGP या MUDRA के तहत चल रही है और आप उसे बड़ा करना (upgradation) चाहते हैं, तो:

  • मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹1 करोड़ तक, सर्विस के लिए ₹25 लाख तक का लोन।
  • सब्सिडी फ्लैट 15% (NER और पहाड़ी राज्यों के लिए 20%)।
  • आपका खुद का योगदान 10%।
  • अधिकतम सब्सिडी ₹15 लाख (NER/पहाड़ी राज्यों में ₹20 लाख)।

पात्रता — कौन आवेदन कर सकता है? (चेकलिस्ट)

  • ✅ आयु 18 वर्ष या अधिक, भारतीय नागरिक।
  • ✅ कोई आय सीमा (income ceiling) नहीं — गरीब हो या मिडिल क्लास, सब आवेदन कर सकते हैं।
  • ✅ पढ़ाई: सिर्फ तभी न्यूनतम 8वीं पास ज़रूरी है जब प्रोजेक्ट ₹10 लाख से ऊपर (मैन्युफैक्चरिंग) या ₹5 लाख से ऊपर (सर्विस) हो। छोटे प्रोजेक्ट के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं।
  • ✅ सिर्फ नई यूनिट — पहले से चल रही यूनिट “नई” बताकर आवेदन नहीं कर सकती।
  • ✅ एक परिवार से सिर्फ एक सदस्य।
  • ✅ प्रति व्यक्ति निवेश सीमा: मैदानी इलाकों में ₹1 लाख, पहाड़ी इलाकों में ₹1.5 लाख।
  • ✅ उसी प्रोजेक्ट के लिए पहले PMRY/REGP/PMEGP की सब्सिडी न ली हो।

किन्हें नहीं मिलेगा — रिजेक्शन वाली सूची

यह सेक्शन ध्यान से पढ़िए, क्योंकि यहीं सबसे ज़्यादा आवेदन फंसते हैं:

  • ❌ सिर्फ खरीद-बिक्री (trading) वाले बिज़नेस — जिसमें कोई value addition न हो, जैसे सामान खरीदकर वैसे ही बेचना — पात्र नहीं हैं।
  • ❌ एक परिवार के एक से ज़्यादा सदस्य आवेदन नहीं कर सकते।
  • ❌ पहले से चल रही यूनिट को “नई यूनिट” बताकर आवेदन करना — पकड़े जाने पर सब्सिडी वापस होगी।
  • ❌ 3 साल के लॉक-इन पीरियड में यूनिट बंद करना या मार्जिन मनी का गलत इस्तेमाल — सब्सिडी वसूल ली जाएगी।
  • ❌ वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) का सही इस्तेमाल न करना भी नियमों के खिलाफ है।

ज़रूरी दस्तावेज़ (आमतौर पर मांगे जाने वाले)

बैंक और एजेंसी के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन आमतौर पर ये दस्तावेज़ चाहिए होते हैं:

  • आधार कार्ड और पैन कार्ड
  • पते का प्रमाण (बिजली बिल / राशन कार्ड / किराया एग्रीमेंट)
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो
  • प्रोजेक्ट रिपोर्ट (कौन सा बिज़नेस, कितनी लागत, कैसे चलेगा)
  • विशेष श्रेणी का प्रमाणपत्र (जाति प्रमाणपत्र / दिव्यांग प्रमाणपत्र आदि — अगर लागू हो)
  • शैक्षणिक प्रमाणपत्र (बड़े प्रोजेक्ट के लिए 8वीं पास का प्रमाण)
  • EDP ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (लोन स्वीकृति के चरण में मांगा जाता है)

ऑनलाइन आवेदन — स्टेप बाय स्टेप

PMEGP में आवेदन सिर्फ ऑनलाइन होता है। कोई ऑफलाइन फॉर्म नहीं है, और किसी एजेंट या बिचौलिए को पैसे देने की ज़रूरत नहीं है।

  1. पोर्टल खोलें: kviconline.gov.in या pmegp.msme.gov.in पर जाएं और “Application for New Unit” चुनें।
  2. एजेंसी चुनें: KVIC, KVIB या DIC में से अपने नज़दीकी एजेंसी चुनें।
  3. फॉर्म भरें: अपनी जानकारी, प्रोजेक्ट की डिटेल और लागत भरकर फॉर्म सबमिट करें।
  4. DLTFC स्क्रीनिंग: जिला स्तरीय टास्क फोर्स कमेटी (DLTFC) आपके आवेदन की जांच करती है और इंटरव्यू लेती है।
  5. EDP ट्रेनिंग (अनिवार्य): ₹5 लाख तक के प्रोजेक्ट के लिए 5 कार्यदिवस, ₹5 लाख से ऊपर के प्रोजेक्ट के लिए 10 कार्यदिवस की उद्यमिता विकास प्रशिक्षण लेनी होती है।
  6. बैंक स्वीकृति: ट्रेनिंग के बाद बैंक आपका लोन स्वीकृत करता है।
  7. मार्जिन मनी क्लेम: लोन जारी होने के बाद सब्सिडी (मार्जिन मनी) का क्लेम किया जाता है और रकम 3 साल के लिए आपके नाम पर लॉक्ड TDR में रखी जाती है।

लोन की शर्तें: ₹10 लाख तक के लोन पर कोई गिरवी/संपत्ति (collateral) नहीं मांगी जाती — यह RBI/CGTMSE के नियमों के तहत है। लोन चुकाने की अवधि 3 से 7 साल तक होती है, जिसमें शुरुआत में लगभग 6 महीने की मोहलत (moratorium) मिलती है। ब्याज बैंक के MSME दरों के अनुसार लगता है, जो आमतौर पर 9.5% से 12% के बीच रहता है।

दो असली उदाहरण — रुपये का पूरा हिसाब

अब सबसे मज़ेदार हिस्सा — असली रुपयों में गणना। ध्यान रहे, नीचे दी गई EMI सांकेतिक अनुमान है; असली ब्याज दर बैंक के अनुसार अलग हो सकती है।

उदाहरण 1: ₹10 लाख का ग्रामीण प्रोजेक्ट, विशेष श्रेणी (महिला/SC आवेदक)

मद प्रतिशत रकम
कुल प्रोजेक्ट लागत 100% ₹10,00,000
आपका योगदान (Own Contribution) 5% ₹50,000
सरकारी सब्सिडी (Margin Money) 35% ₹3,50,000
बैंक लोन (Term Loan) — ₹6,00,000

यानी सिर्फ ₹50,000 अपनी जेब से लगाकर आपको ₹10 लाख का प्रोजेक्ट मिल जाता है। बैंक के ₹6,00,000 लोन पर अगर ब्याज दर लगभग 11% और अवधि 5 साल हो, तो मासिक EMI लगभग ₹13,000 बनेगी (सांकेतिक अनुमान — असली दर बैंक तय करेगा)।

उदाहरण 2: ₹25 लाख का शहरी मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट, सामान्य श्रेणी

मद प्रतिशत रकम
कुल प्रोजेक्ट लागत 100% ₹25,00,000
आपका योगदान (Own Contribution) 10% ₹2,50,000
सरकारी सब्सिडी (Margin Money) 15% ₹3,75,000
बैंक लोन (Term Loan) — ₹18,75,000

यहां ₹2,50,000 खुद लगाकर ₹25 लाख की फैक्ट्री लग सकती है, जिसमें ₹3,75,000 की सब्सिडी सरकार की तरफ से आती है।

PMEGP vs Mudra — क्या फर्क है?

कई लोग PMEGP और मुद्रा लोन को एक समझ लेते हैं, लेकिन फर्क बड़ा है: मुद्रा लोन में आपको पूरा लोन ब्याज सहित चुकाना होता है — उसमें कोई सब्सिडी नहीं मिलती, बस लोन मिलना आसान होता है। PMEGP में सरकार लोन का 15% से 35% तक हिस्सा सब्सिडी के रूप में दे देती है, यानी आपकी जेब से कम पैसा वापस जाता है। हां, PMEGP की प्रक्रिया (DLTFC इंटरव्यू, EDP ट्रेनिंग) मुद्रा से थोड़ी लंबी ज़रूर है। अगर आप नया बिज़नेस शुरू कर रहे हैं और सब्सिडी चाहते हैं, तो PMEGP बेहतर विकल्प है।

आम गलतियां — जिनसे आवेदन रिजेक्ट होता है

  • सब्सिडी को कैश समझना: कई लोग सोचते हैं कि सब्सिडी का पैसा हाथ में मिलेगा। नहीं — वह 3 साल के लिए लॉक्ड रहता है।
  • ट्रेडिंग बिज़नेस का प्रस्ताव: सिर्फ खरीद-बिक्री वाले प्रोजेक्ट पर आवेदन करना सबसे आम रिजेक्शन कारण है। कुछ न कुछ उत्पादन या सेवा (value addition) ज़रूर होनी चाहिए।
  • EDP ट्रेनिंग को हल्के में लेना: यह अनिवार्य है — बिना इसके बैंक लोन स्वीकृत नहीं करता।
  • एजेंटों को पैसे देना: आवेदन पूरी तरह मुफ्त और ऑनलाइन है। कोई भी “गारंटीड अप्रूवल” का दावा करने वाला ठग है।
  • अधूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट: बिना ठोस प्रोजेक्ट रिपोर्ट के DLTFC इंटरव्यू में आवेदन कमज़ोर पड़ जाता है।
  • एक परिवार से दो आवेदन: नियम साफ है — एक परिवार, एक सदस्य।

आधिकारिक लिंक

अगर आप सरकारी योजनाओं की तुलना करना चाहते हैं, तो हमारी PM Vishwakarma Yojana 2026 गाइड भी देख सकते हैं — वह कारीगरों और शिल्पकारों के लिए है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) — PMEGP Loan 2026

1. PMEGP में सब्सिडी कब मिलती है?
बैंक से लोन जारी होने के बाद मार्जिन मनी का क्लेम किया जाता है। सब्सिडी की रकम आपके नाम पर बैंक में 3 साल के लॉक्ड TDR में रखी जाती है — नकद नहीं मिलती। 3 साल पूरे होने और शर्तें पूरी रहने पर यह लोन खाते में समायोजित हो जाती है।

2. क्या ट्रेडिंग (खरीद-बिक्री) बिज़नेस PMEGP के लिए पात्र है?
नहीं। सिर्फ खरीद-बिक्री (बिना value addition के) वाले बिज़नेस पात्र नहीं हैं। प्रोजेक्ट में उत्पादन या सेवा का तत्व होना चाहिए।

3. क्या EDP ट्रेनिंग अनिवार्य है?
हां, बिल्कुल अनिवार्य है। ₹5 लाख तक के प्रोजेक्ट के लिए 5 कार्यदिवस और ₹5 लाख से ऊपर के प्रोजेक्ट के लिए 10 कार्यदिवस की ट्रेनिंग लेनी होती है।

4. कितने लोन तक गिरवी (collateral) नहीं देनी पड़ती?
₹10 लाख तक के लोन पर कोई collateral नहीं मांगा जाता — यह RBI/CGTMSE के नियमों के तहत है।

5. 2nd Loan कौन ले सकता है?
जिनकी यूनिट पहले से PMEGP, REGP या MUDRA के तहत चल रही है और वे उसे अपग्रेड करना चाहते हैं। मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹1 करोड़ तक और सर्विस के लिए ₹25 लाख तक का लोन, 15% फ्लैट सब्सिडी (NER/पहाड़ी राज्यों में 20%) के साथ।

6. आवेदन रिजेक्ट होने के मुख्य कारण क्या हैं?
ट्रेडिंग-ओनली प्रोजेक्ट, पहले से चल रही यूनिट को “नई” बताना, एक परिवार से एक से ज़्यादा आवेदन, अधूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट, और EDP ट्रेनिंग न करना।

7. क्या Udyam रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है?
आधिकारिक PMEGP दिशा-निर्देशों के अनुसार Udyam रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है।

8. लोन चुकाने के लिए कितना समय मिलता है?
3 से 7 साल तक, जिसमें शुरुआत में लगभग 6 महीने की मोहलत (moratorium) मिलती है। ब्याज बैंक की MSME दरों पर (आमतौर पर 9.5%–12%) लगता है।

*नोट: GramSuvidha एक निजी सूचना पोर्टल है, सरकारी वेबसाइट नहीं। लोन या सब्सिडी से जुड़ा कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले आधिकारिक पोर्टल kviconline.gov.in / pmegp.msme.gov.in पर जानकारी की पुष्टि ज़रूर करें।*