PM Vishwakarma Yojana 2026: कारीगरों के लिए केंद्र सरकार की बड़ी योजना
देश के करोड़ों पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक योजना शुरू की है — प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana)। यह योजना उन 18 पारंपरिक कारीगरी कामों से जुड़े लोगों के लिए है, जो पीढ़ियों से अपने हाथ के हुनर से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, दर्जी, नाई, धोबी, मोची और राजमिस्त्री जैसे कारीगर अब इस योजना के तहत सरकारी सम्मान, मुफ्त कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक औजारों के लिए ₹15,000 की टूलकिट सहायता, प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन भत्ता और अपना काम बढ़ाने के लिए मात्र 5% ब्याज पर ₹3 लाख तक का लोन पा सकते हैं।
यह योजना 17 सितंबर 2023 को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर लॉन्च की गई थी। इसके लिए केंद्र सरकार ने ₹13,000 करोड़ का बजट निर्धारित किया है और यह योजना वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक चलाई जाएगी। योजना का संचालन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा किया जा रहा है। योजना के तीन मुख्य स्तंभ हैं — सम्मान (कारीगरों को पहचान और प्रतिष्ठा), सामर्थ्य (कौशल विकास और आधुनिक औजार), और समृद्धि (आर्थिक मजबूती और बाजार तक पहुंच)।
इस लेख में हम PM Vishwakarma Yojana की पूरी जानकारी विस्तार से दे रहे हैं — 18 कारीगरी कामों की सूची, सभी फायदे, पात्रता शर्तें, आवेदन की प्रक्रिया, लोन लेने का तरीका, ट्रेनिंग की व्यवस्था और 20 से अधिक सवाल-जवाब। अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इन 18 कामों में से किसी एक से जुड़ा है, तो यह लेख अंत तक जरूर पढ़ें।
PM Vishwakarma Yojana: एक नजर में जरूरी जानकारी
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) |
| शुरुआत की तारीख | 17 सितंबर 2023 (विश्वकर्मा जयंती) |
| कुल बजट | ₹13,000 करोड़ (वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक) |
| संचालन मंत्रालय | सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), भारत सरकार |
| लाभार्थी | 18 पारंपरिक कारीगरी कामों से जुड़े असंगठित क्षेत्र के कारीगर और शिल्पकार |
| पंजीकरण लक्ष्य | 30 लाख कारीगर (लक्ष्य लगभग पूरा) |
| पहचान | PM Vishwakarma सर्टिफिकेट और फोटोयुक्त ID कार्ड |
| कौशल प्रशिक्षण | बेसिक 5-7 दिन, एडवांस 15 दिन या अधिक; ₹500 प्रतिदिन भत्ता |
| टूलकिट सहायता | ₹15,000 का e-वाउचर |
| लोन सुविधा | ₹3 लाख तक (पहली किस्त ₹1 लाख + दूसरी किस्त ₹2 लाख), मात्र 5% ब्याज दर पर |
| डिजिटल प्रोत्साहन | UPI/डिजिटल लेनदेन पर ₹1 प्रति लेनदेन (अधिकतम 100 लेनदेन प्रति माह) |
| मार्केटिंग सहायता | GeM पोर्टल, PM Vishwakarma Haat, ब्रांडिंग और प्रचार सहायता |
| आवेदन माध्यम | नजदीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) — आवेदन पूरी तरह निःशुल्क |
| आधिकारिक वेबसाइट | pmvishwakarma.gov.in |
| टोल-फ्री हेल्पलाइन | 1800 267 7777 |

PM Vishwakarma Yojana क्या है? विस्तार से समझें
PM Vishwakarma Yojana केंद्र सरकार की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों — जिन्हें विश्वकर्मा कहा जाता है — को हर स्तर पर सहायता देना है। ये वे लोग हैं जो अपने हाथों और पारंपरिक औजारों से काम करते हैं, जैसे लकड़ी का काम, लोहे का काम, मिट्टी के बर्तन बनाना, सिलाई करना, बाल काटना, कपड़े धोना और जूते बनाना। लंबे समय से ये कारीगर असंगठित क्षेत्र में काम करते आ रहे हैं और इन्हें न तो औपचारिक पहचान मिलती है, न ही सस्ता कर्ज या आधुनिक प्रशिक्षण।
इस योजना के तहत सरकार कारीगरों को सम्मान के रूप में PM Vishwakarma सर्टिफिकेट और फोटोयुक्त ID कार्ड देती है, जिससे उनकी पहचान एक कुशल कारीगर के रूप में होती है। सामर्थ्य के तहत उन्हें बेसिक और एडवांस कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है और आधुनिक औजार खरीदने के लिए ₹15,000 की सहायता मिलती है। समृद्धि के तहत मात्र 5% ब्याज पर ₹3 लाख तक का लोन, डिजिटल लेनदेन पर प्रोत्साहन और उत्पादों की बिक्री के लिए GeM जैसे सरकारी मंचों तक पहुंच दी जाती है।
योजना की उपलब्धियां: अब तक क्या हासिल हुआ?
योजना शुरू होने के बाद से इसे कारीगरों का जबरदस्त समर्थन मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 30 लाख से अधिक कारीगरों ने इस योजना में पंजीकरण कराया है, जिससे निर्धारित लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। इनमें से 24.5 लाख से अधिक कारीगरों ने कौशल प्रशिक्षण पूरा किया है या प्रशिक्षण ले रहे हैं। यह संख्या बताती है कि देश के कोने-कोने से कारीगर इस योजना से जुड़ रहे हैं।
टूलकिट सहायता के तहत 18.15 लाख से अधिक लाभार्थियों को ₹15,000 के e-वाउचर जारी किए जा चुके हैं, जिनसे वे अपने काम के आधुनिक औजार खरीद रहे हैं। लोन सुविधा का लाभ उठाते हुए 6.18 लाख से अधिक कारीगरों को अब तक ₹5,297 करोड़ से अधिक का ऋण वितरित किया जा चुका है। ये आंकड़े बताते हैं कि योजना जमीनी स्तर पर काम कर रही है और लाखों कारीगर परिवारों की जिंदगी बदल रही है।
18 कारीगरी काम: क्या आपका काम इसमें शामिल है?
इस योजना का लाभ केवल उन्हीं कारीगरों को मिलता है जो नीचे दिए गए 18 पारंपरिक कारीगरी कामों में से किसी एक से जुड़े हैं। ध्यान से देखें कि आपका काम इस सूची में है या नहीं:
- बढ़ई (सुथार) — लकड़ी का काम करने वाले कारीगर
- नाव बनाने वाले — नाव और जलयानों का निर्माण करने वाले
- शस्त्र/कवच बनाने वाले — पारंपरिक हथियार और कवच बनाने वाले कारीगर
- लोहार — लोहे के औजार और सामान बनाने वाले
- हथौड़ा और औजार बनाने वाले — हथौड़े व अन्य औजारों के निर्माता
- ताला बनाने वाले — ताले और चाबियों का काम करने वाले
- सुनार — सोने-चांदी के आभूषण बनाने वाले
- कुम्हार — मिट्टी के बर्तन और कलाकृतियां बनाने वाले
- मूर्तिकार — पत्थर तराशकर मूर्तियां बनाने वाले (पत्थर तोड़ने वाले सहित)
- मोची/चर्मकार — जूते-चप्पल और चमड़े का सामान बनाने वाले
- राजमिस्त्री — भवन निर्माण का काम करने वाले मिस्त्री
- टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले — बांस, घास और नारियल रेशे से सामान बनाने वाले
- गुड़िया और खिलौने बनाने वाले — पारंपरिक गुड़िया व खिलौनों के निर्माता
- नाई — बाल काटने और सैलून का काम करने वाले
- मालाकार — फूलों की माला और सजावटी सामान बनाने वाले
- धोबी — कपड़े धोने और प्रेस करने का काम करने वाले
- दर्जी — कपड़े सिलने का काम करने वाले
- मछली का जाल बनाने वाले — मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले कारीगर
ध्यान दें: अगर आपका काम इन 18 में से नहीं है, तो आप इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। आवेदन से पहले अपनी श्रेणी जरूर सुनिश्चित कर लें, क्योंकि गलत श्रेणी में आवेदन करने पर वेरिफिकेशन में आवेदन रद्द हो सकता है।
PM Vishwakarma Yojana के फायदे — विस्तार से जानें
1. PM Vishwakarma सर्टिफिकेट और ID कार्ड
पंजीकरण और वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद हर लाभार्थी को PM Vishwakarma सर्टिफिकेट और फोटोयुक्त ID कार्ड दिया जाता है। यह कार्ड कारीगर की आधिकारिक पहचान है — इससे वह सरकारी योजनाओं, बैंकों और बाजार में एक मान्यता प्राप्त कुशल कारीगर के रूप में पहचाना जाता है। यह सम्मान उन कारीगरों के लिए बहुत मायने रखता है जो वर्षों से बिना किसी औपचारिक पहचान के काम कर रहे थे।
2. कौशल प्रशिक्षण और ₹500 प्रतिदिन भत्ता
योजना के तहत लाभार्थियों को बेसिक ट्रेनिंग (5 से 7 दिन) दी जाती है, जिसमें उनके काम से जुड़े आधुनिक तरीके, नए डिजाइन और औजारों का उपयोग सिखाया जाता है। जो कारीगर आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए एडवांस ट्रेनिंग (15 दिन या अधिक) की सुविधा भी है। खास बात यह है कि ट्रेनिंग के दौरान हर लाभार्थी को ₹500 प्रतिदिन का भत्ता सीधे बैंक खाते (DBT) में दिया जाता है, ताकि ट्रेनिंग के दिनों में उनकी रोजी-रोटी प्रभावित न हो। ट्रेनिंग सरकारी ITI और कौशल विकास केंद्रों पर अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा दी जाती है।
3. ₹15,000 की टूलकिट सहायता
बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद लाभार्थी को ₹15,000 का e-वाउचर दिया जाता है, जिससे वह अपने काम से जुड़े आधुनिक औजार और उपकरण खरीद सकता है। उदाहरण के लिए, दर्जी सिलाई मशीन का आधुनिक मॉडल, बढ़ई पावर टूल्स, लोहार बेहतर भट्ठी उपकरण या नाई आधुनिक सैलून उपकरण खरीद सकता है। यह सहायता अनुदान के रूप में है — इसे लौटाना नहीं होता।

4. मात्र 5% ब्याज पर ₹3 लाख तक का लोन
यह योजना का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ है। लाभार्थी को दो चरणों में कुल ₹3 लाख तक का लोन मिलता है — पहली किस्त में ₹1 लाख (अधिकतम 18 महीने की अवधि) और पहली किस्त समय पर चुकाने के बाद दूसरी किस्त में ₹2 लाख (अधिकतम 30 महीने की अवधि)। ब्याज दर मात्र 5% सालाना है, जबकि बाजार में इस तरह के लोन पर 12-14% ब्याज लगता है। ब्याज का बाकी हिस्सा सरकार सब्सिडी के रूप में बैंकों को देती है। इस लोन से कारीगर अपनी दुकान बढ़ा सकता है, कच्चा माल खरीद सकता है या नया काम शुरू कर सकता है।
5. डिजिटल लेनदेन पर प्रोत्साहन राशि
डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए योजना में UPI और डिजिटल लेनदेन पर ₹1 प्रति लेनदेन का कैशबैक दिया जाता है — अधिकतम 100 लेनदेन प्रति माह तक। यानी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाला कारीगर हर महीने ₹100 तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन पा सकता है। इससे कारीगरों में डिजिटल भुगतान की आदत बढ़ रही है और उनका लेनदेन रिकॉर्ड भी बनता है, जो भविष्य में बड़े लोन के लिए काम आता है।
6. मार्केटिंग और बाजार सहायता
अच्छा सामान बनाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उसे बेचने की होती है। इसके लिए योजना में मार्केटिंग सहायता दी जाती है — लाभार्थियों के उत्पादों को GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल पर बेचने की सुविधा, PM Vishwakarma Haat जैसे मेलों और प्रदर्शनियों में भागीदारी, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और प्रचार में मदद। GeM पर पंजीकरण के बाद सरकारी विभाग सीधे कारीगरों से सामान खरीद सकते हैं, जिससे उन्हें बड़ा और भरोसेमंद बाजार मिलता है।
EMI कितनी बनेगी? आसान गणना
| लोन की किस्त | राशि | अवधि | ब्याज दर | अनुमानित EMI |
|---|---|---|---|---|
| पहली किस्त | ₹1 लाख | 18 महीने | 5% सालाना | लगभग ₹5,780 प्रति माह |
| दूसरी किस्त | ₹2 लाख | 30 महीने | 5% सालाना | लगभग ₹7,100 प्रति माह |
5% की कम ब्याज दर के कारण EMI का बोझ काफी कम रहता है। पहली किस्त समय पर चुकाने के बाद ही दूसरी किस्त के लिए पात्रता बनती है, इसलिए समय पर किश्तें चुकाना बहुत जरूरी है।
पात्रता शर्तें: कौन आवेदन कर सकता है?
- आवेदक की उम्र 18 वर्ष या अधिक होनी चाहिए।
- आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए।
- आवेदक ऊपर बताए गए 18 पारंपरिक कारीगरी कामों में से किसी एक से जुड़ा हो और असंगठित क्षेत्र में काम करता हो।
- आवेदक ने पिछले 5 वर्षों में PMEGP, PM Mudra Yojana या PM SVANidhi जैसी योजनाओं के तहत लोन न लिया हो।
- एक परिवार से केवल एक सदस्य ही योजना का लाभ ले सकता है।
- केंद्र या राज्य सरकार के सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
- आवेदक के पास आधार कार्ड और आधार से लिंक्ड मोबाइल नंबर होना चाहिए, क्योंकि पंजीकरण बायोमेट्रिक e-KYC से होता है।
- आवेदक के पास बैंक खाता होना चाहिए, जिसमें DBT के माध्यम से भत्ता और सहायता राशि आएगी।
आवेदन कैसे करें? रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया
PM Vishwakarma Yojana में आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है और यह केवल CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) के माध्यम से होती है। घर बैठे ऑनलाइन आवेदन की सुविधा नहीं है — आपको नजदीकी CSC केंद्र पर स्वयं जाना होगा। प्रक्रिया इस प्रकार है:
- अपने नजदीकी CSC केंद्र पर जाएं और PM Vishwakarma Yojana में पंजीकरण की इच्छा बताएं।
- आधार कार्ड के माध्यम से बायोमेट्रिक e-KYC (फिंगरप्रिंट सत्यापन) कराएं।
- 18 कारीगरी कामों की सूची में से अपना काम चुनें और संबंधित जानकारी दर्ज कराएं।
- मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण और अन्य जरूरी जानकारी दें।
- CSC ऑपरेटर आपका आवेदन पोर्टल पर दर्ज करेगा और आपको पंजीकरण संख्या मिलेगी।
- आवेदन के बाद 3-स्तरीय वेरिफिकेशन होगा — ग्राम पंचायत/नगर निकाय स्तर, जिला स्तर और राज्य स्तर पर। इसमें 2 से 4 हफ्ते लग सकते हैं।
- वेरिफिकेशन सफल होने पर आपको PM Vishwakarma सर्टिफिकेट और ID कार्ड मिलेगा।
- इसके बाद ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाएगा, फिर ₹15,000 टूलकिट e-वाउचर और बाद में लोन की सुविधा मिलेगी।
महत्वपूर्ण नोट: योजना का 30 लाख पंजीकरण का लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। अगर आप पात्र हैं तो जल्द से जल्द नजदीकी CSC केंद्र पर जाकर आवेदन करें, क्योंकि लक्ष्य पूरा होने के बाद नए पंजीकरण बंद हो सकते हैं।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
- आधार कार्ड (बायोमेट्रिक e-KYC के लिए अनिवार्य)
- मोबाइल नंबर (आधार से लिंक्ड होना चाहिए — OTP और सूचना के लिए)
- बैंक खाता विवरण (पासबुक/कैंसिल चेक — DBT भुगतान के लिए)
- राशन कार्ड (परिवार के विवरण के सत्यापन हेतु)
- जाति/समुदाय प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
- काम/व्यवसाय का प्रमाण (यदि उपलब्ध हो — जैसे ग्राम पंचायत का प्रमाणपत्र)
- पासपोर्ट साइज फोटो
लोन कैसे मिलेगा? पूरी प्रक्रिया समझें
ट्रेनिंग और टूलकिट के बाद लोन की प्रक्रिया शुरू होती है। सबसे पहले लाभार्थी ₹1 लाख के पहले चरण के लोन के लिए आवेदन करता है। बैंक आवेदन की जांच करता है और स्वीकृति के बाद राशि सीधे बैंक खाते में आती है। इस लोन की अधिकतम अवधि 18 महीने है और ब्याज दर केवल 5% है।
पहली किस्त का लोन समय पर चुकाने के बाद लाभार्थी दूसरे चरण के ₹2 लाख के लोन के लिए पात्र होता है, जिसकी अधिकतम अवधि 30 महीने है। इस तरह कुल ₹3 लाख तक का सस्ता लोन मिलता है। ध्यान रहे कि लोन की स्वीकृति बैंक के नियमों और आपके क्रेडिट इतिहास पर भी निर्भर करती है, लेकिन 5% ब्याज दर पर सरकारी गारंटी के कारण बैंकों को लोन देने में आसानी होती है।
ट्रेनिंग में क्या-क्या सिखाया जाता है?
ट्रेनिंग सरकारी ITI और कौशल विकास केंद्रों पर अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा दी जाती है। बेसिक ट्रेनिंग (5-7 दिन) में कारीगर को उसके काम के आधुनिक तरीके, नए औजारों का सुरक्षित उपयोग, बेहतर डिजाइन और गुणवत्ता सुधार सिखाया जाता है। एडवांस ट्रेनिंग (15 दिन या अधिक) में उद्यमिता विकास — यानी अपना व्यवसाय कैसे चलाएं, हिसाब-किताब कैसे रखें, ग्राहकों से कैसे जुड़ें — और डिजिटल साक्षरता — UPI, ऑनलाइन बिक्री और सरकारी पोर्टलों का उपयोग भी सिखाया जाता है। ट्रेनिंग पूरी होने पर प्रमाणपत्र भी दिया जाता है।
डिजिटल बिक्री: GeM और PM Vishwakarma Haat से बड़ा बाजार
योजना की मार्केटिंग सहायता के तहत लाभार्थी अपने उत्पाद GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल पर बेच सकते हैं। GeM पर विक्रेता के रूप में पंजीकरण के बाद सरकारी विभाग और संस्थाएं सीधे कारीगरों से सामान खरीद सकती हैं — इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और कारीगर को सही दाम मिलता है। इसके अलावा PM Vishwakarma Haat जैसे मेलों, प्रदर्शनियों और हाट-बाजारों में भाग लेकर कारीगर अपने उत्पादों का प्रचार कर सकते हैं। ब्रांडिंग, पैकेजिंग और उत्पाद फोटोग्राफी में भी सहायता दी जाती है, ताकि सामान बाजार में आकर्षक लगे।
5 बड़ी गलतियां — आवेदन में बिल्कुल न करें
- गलत काम की श्रेणी चुनना — 18 की सूची में न होने वाले काम का चयन करने पर वेरिफिकेशन में आवेदन रद्द हो जाएगा।
- पुराना लोन छिपाना — पिछले 5 साल में PMEGP, Mudra या SVANidhi लोन लिया हो तो आवेदन न करें; जानकारी छिपाने पर बाद में लाभ रद्द हो सकता है।
- आधार-मोबाइल लिंक न होना — बायोमेट्रिक e-KYC और OTP के लिए आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर अनिवार्य है।
- किसी एजेंट को पैसे देना — आवेदन पूरी तरह निःशुल्क है; CSC पर कोई शुल्क नहीं लगता। पैसे मांगने वाला ठग है।
- EMI में देरी — पहले लोन की किश्तें समय पर न चुकाने पर दूसरे चरण का ₹2 लाख लोन नहीं मिलेगा।
ठगी से बचें: जरूरी चेतावनी
योजना की लोकप्रियता का फायदा उठाकर कुछ ठग कारीगरों से पैसे, OTP या निजी जानकारी मांगते हैं। याद रखें — PM Vishwakarma Yojana में आवेदन पूरी तरह निःशुल्क है और कोई भी सरकारी अधिकारी फोन या WhatsApp पर आपसे पैसे या OTP नहीं मांगेगा। आवेदन केवल CSC केंद्र या आधिकारिक वेबसाइट pmvishwakarma.gov.in के माध्यम से करें। किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की सूचना टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800 267 7777 पर दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल 1: PM Vishwakarma Yojana कब शुरू हुई?
जवाब: यह योजना 17 सितंबर 2023 को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर लॉन्च की गई थी।
सवाल 2: इस योजना का कुल बजट कितना है?
जवाब: केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए ₹13,000 करोड़ का बजट निर्धारित किया है, जो वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक खर्च किया जाएगा।
सवाल 3: कितना लोन मिलता है और ब्याज दर क्या है?
जवाब: कुल ₹3 लाख तक का लोन दो किस्तों में मिलता है — पहली किस्त ₹1 लाख (18 महीने) और दूसरी किस्त ₹2 लाख (30 महीने)। ब्याज दर मात्र 5% सालाना है।
सवाल 4: टूलकिट में क्या मिलता है?
जवाब: ₹15,000 का e-वाउचर मिलता है, जिससे लाभार्थी अपने काम से जुड़े आधुनिक औजार और उपकरण खरीद सकता है। यह अनुदान है, इसे लौटाना नहीं होता।
सवाल 5: ट्रेनिंग कितने दिन की होती है?
जवाब: बेसिक ट्रेनिंग 5 से 7 दिन की और एडवांस ट्रेनिंग 15 दिन या अधिक की होती है। ट्रेनिंग के दौरान ₹500 प्रतिदिन भत्ता DBT से मिलता है।
सवाल 6: आवेदन कहां और कैसे करें?
जवाब: नजदीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) पर जाकर आधार बायोमेट्रिक e-KYC के माध्यम से आवेदन करें। आवेदन पूरी तरह निःशुल्क है।
सवाल 7: आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
जवाब: आधार कार्ड, आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर, बैंक खाता विवरण, राशन कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो मुख्य दस्तावेज हैं।
सवाल 8: क्या Mudra लोन लेने वाले पात्र हैं?
जवाब: नहीं। पिछले 5 वर्षों में PMEGP, PM Mudra Yojana या PM SVANidhi के तहत लोन लेने वाले इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
सवाल 9: PM Vishwakarma ID कार्ड से क्या फायदा है?
जवाब: यह कार्ड कारीगर की आधिकारिक पहचान है, जिससे वह सरकारी योजनाओं, बैंकों और बाजार में मान्यता प्राप्त कुशल कारीगर के रूप में पहचाना जाता है।
सवाल 10: क्या एक परिवार से दो सदस्य आवेदन कर सकते हैं?
जवाब: नहीं। एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस योजना का लाभ ले सकता है।
सवाल 11: क्या सरकारी कर्मचारी आवेदन कर सकते हैं?
जवाब: नहीं। केंद्र या राज्य सरकार के सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
सवाल 12: ट्रेनिंग कहां होती है?
जवाब: ट्रेनिंग नजदीकी सरकारी ITI या कौशल विकास केंद्रों पर होती है। CSC केंद्र आपको जगह और तारीख की जानकारी देगा।
सवाल 13: EMI कितनी बनेगी?
जवाब: ₹1 लाख के लोन पर लगभग ₹5,780 प्रति माह (18 महीने) और ₹2 लाख के लोन पर लगभग ₹7,100 प्रति माह (30 महीने) EMI बनेगी।
सवाल 14: क्या टूलकिट की राशि नकद मिलती है?
जवाब: नहीं। ₹15,000 e-वाउचर के रूप में मिलता है, जिससे केवल अधिकृत विक्रेताओं से औजार खरीदे जा सकते हैं।
सवाल 15: वेरिफिकेशन में कितना समय लगता है?
जवाब: 3 स्तरों (ग्राम पंचायत/नगर निकाय, जिला, राज्य) पर वेरिफिकेशन में आमतौर पर 2 से 4 हफ्ते लगते हैं।
सवाल 16: क्या दूसरा लोन (₹2 लाख) पक्का मिलता है?
जवाब: दूसरा लोन तभी मिलता है जब पहले ₹1 लाख के लोन की सभी किश्तें समय पर चुकाई गई हों। समय पर भुगतान करने वालों को ही दूसरी किस्त मिलती है।
सवाल 17: UPI कैशबैक कैसे मिलता है?
जवाब: डिजिटल लेनदेन (UPI) स्वीकार करने पर ₹1 प्रति लेनदेन का कैशबैक मिलता है — अधिकतम 100 लेनदेन प्रति माह, यानी ₹100 तक प्रति माह।
सवाल 18: GeM पर बेचने के लिए क्या करना होगा?
जवाब: Vishwakarma ID मिलने के बाद GeM पोर्टल पर विक्रेता के रूप में पंजीकरण करें। इसके बाद सरकारी विभाग आपके उत्पाद सीधे खरीद सकते हैं।
सवाल 19: ट्रेनिंग का भत्ता कब मिलता है?
जवाब: ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ₹500 प्रतिदिन की दर से भत्ता DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है।
सवाल 20: क्या दूसरे राज्य में काम करने वाला कारीगर आवेदन कर सकता है?
जवाब: हां, बशर्ते वह भारत का नागरिक हो, 18 वर्ष से अधिक उम्र का हो और 18 कारीगरी कामों में से किसी एक से जुड़ा हो। आवेदन अपने गृह क्षेत्र के CSC से करना बेहतर रहता है।
सवाल 21: क्या आवेदन की कोई अंतिम तिथि है?
जवाब: योजना 2027-28 तक चलने वाली है और फिलहाल कोई अंतिम तिथि घोषित नहीं है, लेकिन 30 लाख पंजीकरण का लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है — इसलिए जल्द आवेदन करना बेहतर है।
सवाल 22: क्या महिलाएं भी आवेदन कर सकती हैं?
जवाब: हां। योजना में महिला कारीगरों की भागीदारी को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाता है। पात्रता शर्तें सभी के लिए समान हैं।
सवाल 23: क्या यह साइट (GramSuvidha) सरकारी है?
जवाब: नहीं। GramSuvidha एक निजी सूचना पोर्टल है। सभी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट pmvishwakarma.gov.in से सत्यापित करें।
जरूरी लिंक
- आधिकारिक वेबसाइट: pmvishwakarma.gov.in
- टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800 267 7777
- आवेदन केंद्र: नजदीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) — csc.gov.in पर केंद्र खोजें
- GeM पोर्टल: gem.gov.in
डिस्क्लेमर
GramSuvidha एक निजी सूचना पोर्टल है और इसका केंद्र सरकार, राज्य सरकार या PM Vishwakarma Yojana के संचालन से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है। इस लेख में दी गई सभी जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है, लेकिन नियमों और आंकड़ों में समय-समय पर बदलाव हो सकता है। आवेदन करने से पहले कृपया आधिकारिक वेबसाइट pmvishwakarma.gov.in या टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800 267 7777 से जानकारी सत्यापित जरूर करें।





