गाँव में खेती करने वाले हर किसान की सबसे बड़ी परेशानी एक ही है — सिंचाई के लिए बिजली और डीज़ल का खर्च। डीज़ल पंप चलाओ तो हर महीने हज़ारों रुपये डीज़ल में चले जाते हैं, और बिजली वाला पंप हो तो बिजली कब आएगी, कब जाएगी, इसका कोई भरोसा नहीं। इसी परेशानी का हल निकालने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐसी योजना शुरू की है, जिसमें सूरज की रोशनी से ही आपका पंप चलेगा।
इस आर्टिकल में हम आपको PM Kusum Yojana की पूरी जानकारी देंगे — यह योजना क्या है, इसके तीनों हिस्से (Component A, B, C) किसके लिए हैं, सब्सिडी का ढाँचा कैसे काम करता है, कौन आवेदन कर सकता है, कौन से कागज़ चाहिए, अपने राज्य में आवेदन कैसे करें, आवेदन का स्टेटस कैसे देखें, और सबसे ज़रूरी — इस योजना के नाम पर चल रही फर्जी वेबसाइटों से कैसे बचें। आखिर में FAQ सेक्शन में आपके आम सवालों के जवाब भी मिलेंगे। तो चलिए, एक-एक करके सब समझते हैं।
योजना एक नज़र में (Quick Facts)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) |
| मंत्रालय | नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार |
| शुरू | मार्च 2019 |
| मकसद | किसानों को सोलर सिंचाई, डीज़ल पर निर्भरता कम करना, किसान की आमदनी बढ़ाना |
| मुख्य लाभ | सोलर पंप पर सब्सिडी, सोलर प्लांट से बिजली बेचकर कमाई |
| सब्सिडी ढाँचा (सामान्य राज्य) | 30% केंद्र + 30% राज्य + 30% बैंक लोन + किसान का 10% शुरुआती हिस्सा |
| आधिकारिक पोर्टल | pmkusum.mnre.gov.in (आवेदन राज्य विभागों के ज़रिए) |
| टोल-फ्री हेल्पलाइन | 1800-180-3333 |
PM Kusum Yojana क्या है?
PM Kusum Yojana का पूरा नाम है — प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान। यह नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की योजना है, जो मार्च 2019 में शुरू हुई थी। इसका सीधा-सा मकसद है: खेतों की सिंचाई सोलर ऊर्जा से हो, किसान का डीज़ल और बिजली का खर्च घटे, और जहाँ मुमकिन हो, किसान खुद बिजली बनाकर बेच भी सके।
योजना के तहत सरकार का लक्ष्य करीब 34,800 मेगावाट सौर क्षमता जोड़ना है, जिसके लिए करीब ₹34,422 करोड़ की केंद्रीय मदद का प्रावधान है। सरकार के अनुसार अब तक करीब 2.46 लाख किसान इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। यह योजना तीन हिस्सों में बँटी है — Component A, Component B और Component C। हर हिस्से का काम अलग है, इसलिए आवेदन से पहले यह समझना ज़रूरी है कि आपकी ज़रूरत किस हिस्से से पूरी होगी।
तीनों Components — कौन सा किसके लिए है?
Component A — खाली ज़मीन पर सोलर प्लांट, बिजली बेचकर कमाई
इस हिस्से में किसान अपनी बंजर या खाली ज़मीन पर छोटा सोलर पावर प्लांट लगा सकते हैं — 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता तक। प्लांट से बनने वाली बिजली स्थानीय बिजली कंपनी (DISCOM) खरीदती है। यानी ज़मीन से खेती के साथ-साथ बिजली बेचने की आमदनी भी शुरू हो जाती है।
ध्यान रहे, Component A में पंप पर मिलने वाली तरह की पूँजी सब्सिडी नहीं मिलती — यहाँ फायदा बिजली बिक्री के समझौते (PPA) से होता है, और DISCOM को प्रति यूनिट प्रोत्साहन (PBI) मिलता है। यह हिस्सा उन किसानों और ज़मीन मालिकों के लिए है, जिनके पास बंजर या कम उपजाऊ ज़मीन पड़ी है।
Component B — बिना बिजली वाले खेत के लिए स्टैंडअलोन सोलर पंप
यह योजना का सबसे तेज़ी से आगे बढ़ने वाला हिस्सा है। इसमें उन किसानों को अकेला (स्टैंडअलोन) सोलर पंप मिलता है, जिनके खेत तक बिजली का कनेक्शन नहीं है या बिजली बहुत कम आती है। डीज़ल पंप की जगह सोलर पंप लग जाता है — दिन में धूप से पंप चलता है, डीज़ल का खर्च खत्म।
Component B में 2 HP से 10 HP तक के पंप कवर होते हैं (कई राज्यों में 7.5 HP तक की सीमा है — अपने राज्य के नियम देखें)। अगर आपके खेत पर बिजली का कनेक्शन नहीं है और आप डीज़ल पंप से परेशान हैं, तो यही हिस्सा आपके लिए है।
Component C — मौजूदा बिजली पंप का सोलरीकरण
जिन किसानों के पास पहले से बिजली से चलने वाला पंप है, उनके लिए Component C है। इसमें मौजूदा पंप को सोलर से जोड़ा जाता है। फायदा दोहरा है — बिजली का बिल घटता है, और ज़रूरत से ज़्यादा बिजली ग्रिड को बेचकर कमाई भी हो सकती है।
Component C में दो तरीके हैं — Individual Pump Solarisation (अपने पंप का सोलरीकरण) और Feeder Level Solarisation (पूरे कृषि फीडर को सोलर प्लांट से बिजली देना)। दूसरा तरीका महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में तेज़ी से अपनाया जा रहा है।
सब्सिडी कितनी मिलती है? (Subsidy Structure)
योजना का सबसे पूछा जाने वाला सवाल यही है — किसान को अपनी जेब से कितना देना होगा? जवाब राज्य और हिस्से पर निर्भर करता है, लेकिन सामान्य ढाँचा यह है:
| हिस्सा | केंद्र सरकार (CFA) | राज्य सरकार | बैंक लोन | किसान का शुरुआती हिस्सा |
|---|---|---|---|---|
| सामान्य राज्य (Component B/C) | 30% | कम से कम 30% | 30% तक | लगभग 10% |
| विशेष राज्य (पूर्वोत्तर, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, लद्दाख, अंडमान-निकोबार) | 50% | कम से कम 30% | 30% तक | लगभग 10% |
महत्वपूर्ण बातें:
- CFA की गणना बेंचमार्क लागत या टेंडर लागत में से जो कम हो, उस पर होती है।
- लोन लेने पर किसान को शुरुआत में सिर्फ लगभग 10% राशि देनी होती है; बाकी 30% बैंक लोन से कवर होता है।
- कुछ राज्यों में किसान का हिस्सा और भी कम है — जैसे महाराष्ट्र में SC/ST किसानों के लिए किसान का हिस्सा करीब 5% बताया जाता है, और मध्य प्रदेश के अधिसूचित आदिवासी ब्लॉकों में कुल सब्सिडी 90% तक पहुँच सकती है। इसलिए अपने राज्य के ताज़ा नियम ज़रूर देखें।
- Component A में यह सब्सिडी ढाँचा लागू नहीं होता — वहाँ बिजली बिक्री का समझौता ही मुख्य लाभ है।
उदाहरण से समझें (उदाहरण मात्र): मान लीजिए किसी सोलर पंप सिस्टम की स्वीकृत लागत ₹1,00,000 है। सामान्य राज्य में 30% केंद्र (₹30,000) + 30% राज्य (₹30,000) सब्सिडी के बाद ₹40,000 बचते हैं। इसमें से 30% (₹30,000) बैंक लोन से और लगभग 10% (₹10,000) किसान के शुरुआती हिस्से से आता है। असली लागत पंप की HP, राज्य के टेंडर और बेंचमार्क कीमत पर निर्भर करेगी — यह सिर्फ ढाँचा समझाने का उदाहरण है।
कौन आवेदन कर सकता है? (Eligibility)
- व्यक्तिगत किसान जिनके पास खेती योग्य ज़मीन और पानी का स्रोत (बोरवेल/कुआँ) हो।
- किसानों के समूह, सहकारी समितियाँ, FPO (किसान उत्पादक संगठन) और पंचायतें — खासकर Component A के लिए।
- Component C के लिए मौजूदा बिजली कनेक्शन वाला कृषि पंप होना चाहिए।
- आवेदक किसी बैंक का डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए।
कौन पात्र नहीं हो सकता: जिन्होंने पहले ही किसी अन्य योजना या राज्य विभाग से सोलर पंप सब्सिडी ले ली है, वे उसी पंप के लिए दोबारा पात्र नहीं हो सकते। हर राज्य के अपने विस्तृत नियम हैं — आवेदन से पहले अपने राज्य के दिशा-निर्देश देख लें।
ज़रूरी दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- ज़मीन के कागज़ (खसरा-खतौनी / RTC / पहानी)
- पानी के स्रोत का प्रमाण (बोरवेल का प्रमाण)
- बैंक खाता पासबुक / बैंक डिटेल
- Component C के लिए मौजूदा बिजली कनेक्शन का बिल
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
आवेदन कैसे करें? (How to Apply — Online + Offline)
ध्यान दें: PM Kusum Yojana को राज्य सरकार के विभागों के ज़रिए लागू किया जाता है। इसलिए ज़्यादातर राज्यों में आवेदन राष्ट्रीय पोर्टल से नहीं, बल्कि अपने राज्य के नोडल विभाग/पोर्टल से होता है। राष्ट्रीय पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in पर योजना की जानकारी, राज्य-वार विवरण और किसान रजिस्ट्रेशन का विकल्प मिलता है, लेकिन अंतिम प्रक्रिया राज्य की होती है।
ऑनलाइन आवेदन के सामान्य चरण:
- अपने राज्य के नोडल विभाग के पोर्टल (नीचे टेबल देखें) या pmkusum.mnre.gov.in पर जाएँ।
- Farmer Registration / Apply विकल्प चुनें और अपना Component (A, B या C) चुनें।
- किसान का नाम, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, पता, ज़मीन और पंप का विवरण भरें।
- ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड करें।
- फॉर्म जमा करें और आवेदन/रजिस्ट्रेशन ID नोट कर लें।
- राज्य नोडल एजेंसी ज़मीन के कागज़ और पंप की क्षमता की जाँच करेगी।
- स्वीकृति के बाद किसान का हिस्सा (लगभग 10%) जमा करना होगा — बैंक लोन का विकल्प भी है।
- सूचीबद्ध (empanelled) वेंडर सोलर पंप की स्थापना करेगा, फिर जाँच और कमीशनिंग होगी। सब्सिडी सीधे वेंडर/सिस्टम लागत में समायोजित होती है।
ऑफ़लाइन तरीका: अपने ज़िले के कृषि विभाग, नोडल एजेंसी कार्यालय या DISCOM उप-विभाग में जाकर फॉर्म भरकर दस्तावेज़ जमा किए जा सकते हैं।
राज्य-वार नोडल एजेंसी (उदाहरण)
| राज्य | नोडल एजेंसी | खास बात |
|---|---|---|
| महाराष्ट्र | MEDA (महाऊर्जा) | SC/ST किसानों के लिए किसान का हिस्सा करीब 5% |
| राजस्थान | RRECL | Component A पर ज़ोर, बंजर ज़मीन का उपयोग |
| मध्य प्रदेश | MPUVNL | अधिसूचित आदिवासी ब्लॉकों में कुल सब्सिडी 90% तक |
| उत्तर प्रदेश | UPNEDA | ST, वनटांगिया और मुसहर किसानों के लिए बढ़ी हुई राज्य सब्सिडी |
| गुजरात | GEDA | पूरी तरह ऑनलाइन आवेदन |
यह टेबल सिर्फ दिशा देने के लिए है — बेंचमार्क लागत, कोटा और आवेदन की खिड़की हर राज्य में अलग-अलग समय पर खुलती-बंद होती है। आवेदन से पहले अपने राज्य के पोर्टल पर ताज़ा स्थिति ज़रूर देखें।
आवेदन का स्टेटस कैसे देखें?
- अपने राज्य के पोर्टल या pmkusum.mnre.gov.in पर जाएँ।
- Login / Application Status विकल्प पर क्लिक करें।
- Application ID या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालें।
- आपका आवेदन — स्वीकृति, वेंडर आवंटन, स्थापना और सब्सिडी — किस चरण में है, यह दिख जाएगा। स्वीकृति और स्थापना की सूचना SMS/ईमेल से भी मिलती है।
2026 में योजना की ताज़ा स्थिति — ईमानदार अपडेट
यह सेक्शन इसलिए ज़रूरी है क्योंकि कई वेबसाइटें पुरानी जानकारी दिखा रही हैं। ताज़ा स्थिति यह है:
- योजना की समय-सीमा बढ़ाई गई है। जिन परियोजनाओं के PPA या Notice to Proceed 31 दिसंबर 2025 तक जारी हो चुके हैं, उनके पूरा होने की समय-सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है।
- Component A और Component C (Feeder Level Solarisation) की परियोजनाओं के लिए वित्तीय समापन (financial closure) की समय-सीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।
- मौजूदा योजना की प्रतिबद्ध देनदारियों को प्रस्तावित PM Kusum 2.0 में आगे ले जाने की बात कही गई है। साफ़ शब्दों में: PM Kusum 2.0 अभी प्रस्ताव/विचार के चरण में है, लॉन्च नहीं हुआ है। इसमें दिन की अतिरिक्त सोलर बिजली को स्टोर करने के लिए Battery Energy Storage System (BESS) जोड़ने की योजना बताई जा रही है। जब तक MNRE की आधिकारिक घोषणा न आए, किसी भी "Kusum 2.0 आवेदन शुरू" वाले दावे पर भरोसा न करें।
- प्रगति की ईमानदार तस्वीर: Component B सबसे आगे है (सितंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार अपने लक्ष्य का करीब 71%), जबकि Component A अपने लक्ष्य का सिर्फ करीब 6.5% ही पहुँच पाया था। यानी पंप वाला हिस्सा तेज़ी से चल रहा है, प्लांट वाला हिस्सा धीमा है।
- इसका मतलब आपके लिए यह है: कोटा सीमित होता है और आवेदन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर आगे बढ़ते हैं। अपने राज्य में खिड़की खुलते ही आवेदन करना बेहतर रहता है, और स्थापना में देरी हो तो राज्य नोडल एजेंसी से ही संपर्क करें — किसी बिचौलिए को पैसे न दें।
फर्जी वेबसाइटों से सावधान — MNRE की चेतावनी
यह इस आर्टिकल का सबसे ज़रूरी हिस्सा है। MNRE ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर साफ़ चेतावनी दी है कि कई फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप PM Kusum Yojana के नाम पर किसानों से ऑनलाइन आवेदन के साथ रजिस्ट्रेशन शुल्क और पंप की कीमत का ऑनलाइन भुगतान माँग रहे हैं। MNRE ने ऐसे कुछ डोमेन के नाम भी बताए हैं — जैसे kusumyojanaonline.in.net, pmkisankusumyojana.co.in, onlinekusamyojana.org.in, pmkisankusumyojana.com — और कहा है कि इसी तरह की कई और वेबसाइटें भी हैं।
बचाव के नियम:
- आवेदन सिर्फ अपने राज्य के आधिकारिक विभाग/पोर्टल या pmkusum.mnre.gov.in से ही करें।
- कोई भी वेबसाइट या व्यक्ति अगर "रजिस्ट्रेशन फीस" या "पंप की कीमत पहले ऑनलाइन जमा करें" कहे, तो वह फर्जी है — आवेदन के लिए कोई फीस नहीं ली जाती, किसी एजेंट/बिचौलिए की ज़रूरत नहीं है।
- शक हो तो MNRE के टोल-फ्री नंबर 1800-180-3333 पर कॉल करके पूछें, या mnre.gov.in देखें।
- OTP, बैंक डिटेल या UPI PIN किसी को न बताएं — सरकार कभी फोन पर OTP नहीं मांगती।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. PM Kusum Yojana me solar pump par kitni subsidy milti hai?
सामान्य राज्यों में 30% केंद्र + कम से कम 30% राज्य सब्सिडी मिलती है, 30% तक बैंक लोन मिल सकता है और किसान को शुरुआत में लगभग 10% देना होता है। विशेष राज्यों (पूर्वोत्तर, पहाड़ी और द्वीप क्षेत्र) में केंद्र की हिस्सेदारी 50% तक होती है।
2. PM Kusum Yojana me apply kaise karein?
आवेदन आपके राज्य के नोडल विभाग के पोर्टल से होता है — महाराष्ट्र में MEDA, राजस्थान में RRECL, मध्य प्रदेश में MPUVNL, उत्तर प्रदेश में UPNEDA, गुजरात में GEDA। राष्ट्रीय पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in पर जानकारी और रजिस्ट्रेशन का विकल्प है, लेकिन अंतिम प्रक्रिया राज्य की होती है।
3. Kya PM Kusum Yojana me online apply karne ke liye koi fee hai?
नहीं। आवेदन निःशुल्क है। कोई वेबसाइट या व्यक्ति रजिस्ट्रेशन शुल्क माँगे तो वह फर्जी है — MNRE ने इस बारे में आधिकारिक चेतावनी जारी की है।
4. Component A, B aur C me kya antar hai?
Component A — खाली ज़मीन पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली बेचना। Component B — बिना बिजली वाले खेत के लिए स्टैंडअलोन सोलर पंप। Component C — मौजूदा बिजली पंप का सोलरीकरण, जिसमें अतिरिक्त बिजली बेची भी जा सकती है।
5. Kya PM Kusum 2.0 launch ho gaya hai?
नहीं। अक्टूबर 2026 तक PM Kusum 2.0 प्रस्ताव/विचार के चरण में है — इसमें BESS (बैटरी स्टोरेज) जोड़ने की बात है। आधिकारिक घोषणा आने तक "2.0 आवेदन शुरू" वाले दावों पर भरोसा न करें।
6. Solar pump kitne HP tak milta hai?
आमतौर पर 2 HP से 10 HP तक के पंप कवर होते हैं, लेकिन कई राज्यों में सीमा 7.5 HP तक है। अपने राज्य के नियम और टेंडर विवरण देखें।
7. Subsidy ka paisa kise milta hai — kisan ko ya vendor ko?
सब्सिडी सिस्टम की लागत में समायोजित होती है — किसान को सिर्फ अपना हिस्सा देना होता है, सरकारी हिस्सा सीधे वेंडर/लागत में जाता है। इसलिए किसान को सब्सिडी का पैसा अपने हाथ में नहीं मिलता, बल्कि पंप सस्ता पड़ता है।
8. Aavedan ke baad pump lagne me kitna samay lagta hai?
यह राज्य, कोटा, वेंडर उपलब्धता और जाँच की गति पर निर्भर करता है। आवेदन का स्टेटस अपने राज्य के पोर्टल पर Application ID से देखते रहें, और देरी हो तो राज्य नोडल एजेंसी से संपर्क करें।
नोट: GramSuvidha एक निजी सूचना पोर्टल है, सरकारी वेबसाइट नहीं। आवेदन या भुगतान से जुड़ा कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले आधिकारिक पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in या अपने राज्य के नोडल विभाग पर जानकारी की पुष्टि ज़रूर करें।





