कल्पना कीजिए: आप शाम को घर लौट रहे हैं और रास्ते में देखते हैं कि एक मोटरसाइकिल दुर्घटना हुई है। कोई अजनबी सड़क पर घायल पड़ा है। ज़्यादातर लोग गाड़ी धीमी करते हैं, देखते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। कुछ लोग डरते हैं — कहीं पुलिस घंटों पूछताछ न करे, कहीं अस्पताल पैसे न माँगे, कहीं कोर्ट-कचहरी में न फँस जाएँ। इन्हीं डर की वजह से कीमती मिनट बर्बाद हो जाते हैं — और सड़क दुर्घटना में मिनट ही यह तय करते हैं कि कोई व्यक्ति जिएगा या नहीं।
इस लेख में हम उसी सवाल का पूरा जवाब दे रहे हैं जिसे इस समय भारत में हज़ारों लोग खोज रहे हैं: सड़क हादसे के पीड़ित की मदद करने वाले आम नागरिक को कौन सी सरकारी योजना मान्यता और इनाम देती है? इसका जवाब एक राष्ट्रीय योजना है, जिसमें नकद इनाम भी है, सम्मान पत्र भी है, और मदद करने वाले के लिए पूरी कानूनी सुरक्षा भी है। नीचे पूरा गाइड पढ़ें — कौन पात्र है, कितना इनाम मिलता है, कानून आपको क्या सुरक्षा देता है, और इनाम आप तक कैसे पहुँचता है।
Rah-Veer Yojana 2026: एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | राह-वीर योजना (गुड सेमेरिटन योजना) |
| शुरू करने वाला मंत्रालय | सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), भारत सरकार |
| मूल योजना | गुड सेमेरिटन योजना, 3 अक्टूबर 2021 को शुरू |
| नया स्वरूप | 21 अप्रैल 2025 को राह-वीर योजना के रूप में पुनः शुरू |
| नकद इनाम | प्रति घटना 25,000 रुपये + प्रशंसा पत्र |
| दोहराव की सीमा | एक वर्ष में अधिकतम 5 बार तक इनाम मिल सकता है |
| राष्ट्रीय सम्मान | हर साल देश के 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीरों को 1,00,000 रुपये, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र — राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह में |
| सामूहिक मदद | यदि एक ही पीड़ित की मदद कई लोग करें तो 25,000 रुपये सभी में बराबर बाँटे जाते हैं |
| कानूनी आधार | गुड सेमेरिटन नियम, 2020 — मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134A के तहत |
| कौन पात्र है | कोई भी नागरिक जो गोल्डन आवर के भीतर गंभीर रूप से घायल सड़क हादसा पीड़ित को चिकित्सा सहायता दिलाए |
| आवेदन का तरीका | कोई एक केंद्रीय ऑनलाइन फॉर्म नहीं — दावा अस्पताल और ज़िले के परिवहन / सड़क सुरक्षा अधिकारियों के माध्यम से आगे बढ़ता है |
| आधिकारिक मंत्रालय | morth.nic.in (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) |
सड़क हादसे में मदद करने वालों को कौन सी योजना इनाम देती है?
इस योजना का नाम है राह-वीर योजना। “राह-वीर” का अर्थ है — सड़क का बहादुर यात्री, यानी वह आम इंसान जो सड़क पर साहस दिखाता है। इस योजना के तहत कोई भी नागरिक जो सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को हादसे के पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुँचाने या चिकित्सा सहायता दिलाने में मदद करता है, उसे “राह-वीर” के रूप में मान्यता और इनाम दिया जाता है।
यह योजना 3 अक्टूबर 2021 को गुड सेमेरिटन योजना के रूप में शुरू हुई थी। पहले चक्र में मददगारों को 5,000-5,000 रुपये दिए गए थे। फिर 21 अप्रैल 2025 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसे नए स्वरूप में राह-वीर योजना के नाम से जारी किया और इनाम बढ़ाकर प्रति घटना 25,000 रुपये कर दिया, साथ में प्रशंसा पत्र भी दिया जाता है। मंत्रालय ने इस पहल को आगे के वित्तीय चक्रों में भी जारी रखने का फैसला किया है, और राज्य सरकारें इसे सक्रियता से लागू कर रही हैं — उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड, नगालैंड और दिल्ली सहित कई राज्य इन केंद्रीय नियमों का पालन कर रहे हैं।
गोल्डन आवर क्या है, और यह इतना ज़रूरी क्यों है?
“गोल्डन आवर” का अर्थ है हादसे के बाद का पहला एक घंटा, यानी शुरुआती 60 मिनट। डॉक्टरों के अनुसार यही सबसे नाज़ुक समय होता है: यदि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को इस एक घंटे के भीतर चिकित्सा सहायता मिल जाए तो उसके बचने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। इस समय के बाद अच्छा इलाज भी देर से पड़ सकता है। इसीलिए पूरी राह-वीर योजना इसी एक घंटे पर टिकी है — इनाम उसे मिलता है जो जल्दी काम करता है, देर से पहुँचने वाले को नहीं।
पात्रता के लिए ज़रूरी है कि मददगार यह सुनिश्चित करे कि पीड़ित को गोल्डन आवर के भीतर चिकित्सा सहायता मिले। आमतौर पर इसका मतलब है घायल को निकटतम अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर तक पहुँचाना, या एंबुलेंस बुलाकर पीड़ित के पास तब तक रहना जब तक मदद न आ जाए। योजना का मकसद एकदम साफ है: भारत की किसी भी सड़क पर कोई घायल व्यक्ति सिर्फ इसलिए मदद का इंतज़ार न करे क्योंकि आसपास खड़े लोग डर रहे हैं।
राह-वीर को कितना पैसा मिलता है?
मान्यता प्राप्त राह-वीर को प्रति घटना 25,000 रुपये नकद और प्रशंसा पत्र दिया जाता है। तीन ज़रूरी बातें हैं जो ज़्यादातर छोटे लेखों में नहीं मिलतीं:
- बार-बार मदद का भी इनाम: यदि वही व्यक्ति अलग-अलग घटनाओं में लोगों की जान बचाता है तो एक वर्ष में पाँच बार तक यह इनाम दिया जा सकता है। यानी एक दोहरा मददगार एक वर्ष में 1,25,000 रुपये तक इस योजना से पा सकता है।
- सामूहिक मदद में बराबर बँटवारा: यदि एक ही पीड़ित की मदद दो-तीन लोग मिलकर करते हैं तो 25,000 रुपये की राशि उन सभी में समान रूप से बाँट दी जाती है। कोई इसलिए वंचित नहीं रहता क्योंकि किसी और ने भी मदद की।
- राष्ट्रीय स्तर का सम्मान: हर साल देश के दस सबसे साहसी या उत्कृष्ट राह-वीरों को राष्ट्रीय पुरस्कार के रूप में 1,00,000-1,00,000 रुपये, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र दिए जाते हैं, जो राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान प्रदान किए जाते हैं।
यह इनाम किसी सेवा की फीस नहीं, बल्कि बहादुरी की मान्यता है। यह संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की जाँच के बाद दिया जाता है और योजना के नियमों व पात्रता शर्तों के अधीन है।
कानूनी सुरक्षा: वह डर जो ज़्यादातर लोगों को रोकता है
लोग हादसा पीड़ितों की मदद क्यों नहीं करते, इसका सबसे बड़ा कारण डर है — पुलिस पूछताछ का डर, लंबे कोर्ट केस में गवाह बनने का डर, अस्पताल के बिल का डर। गुड सेमेरिटन नियम, 2020, जो मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत बनाए गए हैं, इन डरों को सीधे तौर पर खत्म करते हैं। मददगार को कानून से ये सुरक्षाएँ मिलती हैं:
- कोई हिरासत नहीं: मदद करने के कारण पुलिस आपको हिरासत में नहीं ले सकती, और आपसे ज़बरदस्ती व्यक्तिगत जानकारी देने को नहीं कहा जा सकता।
- ज़बरदस्ती गवाह नहीं: सिर्फ इसलिए कि आपने मदद की, आपको गवाह बनने या बार-बार कानूनी कार्यवाही में हाज़िर होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
- पहचान गोपनीय रखने का अधिकार: यदि आप चाहें तो आपकी पहचान गोपनीय रखी जा सकती है।
- अस्पताल में परेशानी नहीं: अस्पताल सड़क हादसे के पीड़ित का आपातकालीन इलाज मना नहीं कर सकते, और पीड़ित को लाने वाले व्यक्ति से भुगतान की माँग नहीं कर सकते।
- कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा: नेक नीयत से मदद करने वाले व्यक्ति पर उस मदद के लिए दीवानी या आपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकती।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी कई बार बता चुके हैं कि आईआईटी दिल्ली की एक रिपोर्ट के अनुसार सड़क हादसे देश की जीडीपी का लगभग 3 प्रतिशत खा जाते हैं — और हादसा पीड़ितों की मौत का एक कारण दर्शकों की झिझक भी है। इस योजना की कानूनी सुरक्षा इसीलिए बनाई गई है ताकि यह झिझक खत्म हो।
हादसा स्थल पर क्या करें: चरण-दर-चरण गाइड
यदि कभी आप सड़क हादसे के सामने पड़ जाएँ तो इन चरणों का पालन करें। ये पीड़ित की भी रक्षा करते हैं, आपकी भी, और बाद में इनाम के दावे के लिए ज़रूरी रिकॉर्ड भी बनाते हैं।
- सुरक्षित रूप से रुकें: अपना वाहन सुरक्षित दूरी पर हैज़र्ड लाइट जलाकर खड़ा करें ताकि दूसरा हादसा न हो।
- तुरंत आपातकालीन मदद बुलाएँ: 112 (राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर) या 108 पर एंबुलेंस के लिए कॉल करें। सही स्थान, घायलों की संख्या और चोटों की जानकारी बताएँ।
- गंभीर घायल को लापरवाही से न हिलाएँ: जब तक आग जैसा तत्काल खतरा न हो, पीड़ित को घसीटें नहीं। उन्हें स्थिर और आरामदायक स्थिति में रखें।
- पीड़ित को निकटतम अस्पताल पहुँचाएँ: यदि एंबुलेंस में देर हो रही है तो खुद पीड़ित को निकटतम अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर ले जाएँ। गोल्डन आवर याद रखें — पहले 60 मिनट ही मायने रखते हैं।
- अस्पताल को साफ बताएँ कि यह सड़क हादसा है: अस्पताल के स्टाफ को स्पष्ट रूप से बताएँ कि यह गोल्डन आवर के भीतर लाया गया सड़क हादसा पीड़ित है। इससे समय पर मदद का मेडिकल रिकॉर्ड बनता है।
- मदद का सबूत संभालकर रखें: अस्पताल के कागज़, एंबुलेंस या कॉल का रिकॉर्ड, और जिन पुलिस या अस्पताल कर्मियों से बात हुई उनके नाम संभालकर रखें। तारीख, समय और स्थान नोट कर लें। ये दस्तावेज़ इनाम के दावे में काम आएँगे।
- पीड़ित के परिवार से कुछ न माँगें: आपकी मदद स्वैच्छिक और नेक नीयत से होनी चाहिए। इनाम सरकार से मिलता है, पीड़ित से नहीं।
25,000 रुपये के राह-वीर इनाम का दावा कैसे करें
पूरे देश के लिए कोई एक केंद्रीय वेबसाइट नहीं है जहाँ एक ऑनलाइन फॉर्म भर दिया जाए। दावा आपके राज्य की अपनी व्यवस्था से आगे बढ़ता है, और चरण मोटे तौर पर हर जगह एक जैसे हैं:
- अस्पताल का रिकॉर्ड: जिस अस्पताल में पीड़ित का इलाज हुआ, वहाँ दर्ज होता है कि पीड़ित को गोल्डन आवर के भीतर लाया गया और उसे कौन लाया।
- ज़िला स्तर की अनुशंसा: मामला ज़िला सड़क सुरक्षा समिति (या ज़िला परिवहन प्राधिकरण) के सामने रखा जाता है, जो तथ्यों की जाँच करके मददगार के नाम की अनुशंसा करती है।
- राज्य परिवहन विभाग: राज्य परिवहन विभाग जाँच किए गए नामों को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजता है और इनाम की राशि जारी होती है।
- भुगतान और प्रमाण पत्र: स्वीकृत मददगार को 25,000 रुपये और प्रशंसा पत्र मिलता है।
यदि आपने किसी पीड़ित की मदद की है और किसी ने आपसे संपर्क नहीं किया है, तो आप अपने ज़िला परिवहन कार्यालय (RTO / ज़िला परिवहन अधिकारी) में अस्पताल के कागज़ों और घटना का लिखित विवरण लेकर जा सकते हैं और अपने ज़िले में राह-वीर दावा प्रक्रिया के बारे में पूछ सकते हैं। इसके लिए किसी एजेंट या दलाल को पैसे न दें — दावा प्रक्रिया निःशुल्क है, और इनाम “दिलाने” के नाम पर पैसे माँगने वाला व्यक्ति ठग है।
राज्यों में राह-वीर: 2026 के ताज़ा अपडेट
यह योजना सिर्फ कागज़ पर नहीं है। 2026 में राज्य सक्रियता से राह-वीरों की पहचान कर उन्हें सम्मानित कर रहे हैं:
- उत्तर प्रदेश: अक्टूबर 2026 में राज्य परिवहन विभाग ने ज़िला सड़क सुरक्षा समितियों की अनुशंसा पर 27 राह-वीरों को 25,000-25,000 रुपये देने का प्रस्ताव तैयार किया। मंत्रालय ने 21 सितंबर 2026 के पत्र से पुरस्कार वितरण के लिए उत्तर प्रदेश को 10 लाख रुपये जारी किए।
- बिहार: अक्टूबर 2026 में कटिहार ज़िला परिवहन कार्यालय ने नागरिकों को सार्वजनिक रूप से बताया कि राह-वीर योजना के तहत मददगारों को 25,000 रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र मिलेगा, और कई लोगों की मदद पर राशि बराबर बाँटी जाएगी।
- उत्तराखंड: राज्य में गुड सेमेरिटन / राह-वीर योजना उसी 25,000 रुपये के इनाम, एक व्यक्ति को वर्ष में अधिकतम पाँच बार, और मददगार की पहचान गोपनीय रखने के प्रावधान के साथ चल रही है।
- पंजाब: अक्टूबर 2026 में होशियारपुर के ज़िला अधिकारियों ने नागरिकों से बिना डर के आगे आने की अपील की और बताया कि पात्र मददगारों को 25,000 रुपये नकद और प्रशंसा पत्र मिलता है, जो योजना की शर्तों के अधीन है।
- छत्तीसगढ़: पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त कार्यशालाओं में राह-वीर की जागरूकता फैला रहे हैं, साथ ही पीड़ितों के लिए अलग पीएम राहत योजना की जानकारी भी दी जा रही है।
क्रियान्वयन राज्यों के माध्यम से होता है, इसलिए स्थानीय कार्यालय अलग-अलग हो सकता है — लेकिन इनाम की राशि, गोल्डन आवर का नियम और कानूनी सुरक्षा पूरे देश में एक ही राष्ट्रीय नियम हैं।
राह-वीर बनाम पीएम राहत: दोनों में भ्रम न रखें
सड़क हादसों की दो योजनाओं का नाम अक्सर साथ लिया जाता है और पाठक उन्हें मिला देते हैं। दोनों अलग हैं:
- राह-वीर योजना मददगार को इनाम देती है — गोल्डन आवर में पीड़ित को बचाने वाले नागरिक को 25,000 रुपये।
- पीएम राहत (प्रधानमंत्री सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित इलाज) पीड़ित की मदद करती है — घायल व्यक्ति का कैशलेस इलाज, जिसकी सीमा 1.50 लाख रुपये तक बताई जाती है, ताकि कोई पीड़ित पैसे न होने के कारण इलाज से वंचित न रहे।
एक योजना उस व्यक्ति की रक्षा करती है जो मदद के लिए रुकता है; दूसरी उस व्यक्ति की जो घायल हुआ है। दोनों इसलिए हैं ताकि डर — पुलिस का, अस्पताल के बिल का, कोर्ट का — कभी सड़क पर किसी की जान की कीमत न बने।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. सड़क हादसे में मदद करने वालों को कौन सी सरकारी योजना पैसे देती है?
राह-वीर योजना, जो सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय चलाता है। यह गुड सेमेरिटन योजना का नया स्वरूप है और प्रति घटना मददगार को 25,000 रुपये देती है।
2. राह-वीर किसे कहते हैं?
कोई भी नागरिक जो साहस और नेक नीयत से सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन आवर (पहले 60 मिनट) के भीतर चिकित्सा सहायता दिलाता है, उसे राह-वीर कहा जाता है।
3. राह-वीर इनाम कितना है, और एक व्यक्ति कितनी बार पा सकता है?
प्रति घटना 25,000 रुपये नकद + प्रशंसा पत्र, एक वर्ष में अधिकतम पाँच बार। राष्ट्रीय स्तर पर दस सर्वश्रेष्ठ राह-वीरों को हर साल 1,00,000-1,00,000 रुपये मिलते हैं।
4. यदि एक ही पीड़ित की मदद कई लोग करें तो क्या होगा?
25,000 रुपये की राशि उस पीड़ित के सभी मददगारों में बराबर बाँट दी जाती है।
5. मदद करने पर क्या पुलिस मुझे हिरासत में लेगी या गवाह बनने पर मजबूर करेगी?
नहीं। गुड सेमेरिटन नियम, 2020 के तहत मददगार को मदद के कारण हिरासत में नहीं लिया जा सकता, व्यक्तिगत जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, और आपकी पहचान गोपनीय रखी जा सकती है।
6. क्या राह-वीर इनाम के लिए कोई ऑनलाइन फॉर्म है?
कोई एक केंद्रीय ऑनलाइन फॉर्म नहीं है। दावा अस्पताल के रिकॉर्ड और ज़िला सड़क सुरक्षा समिति / ज़िला परिवहन प्राधिकरण की जाँच से आगे बढ़ता है, फिर राज्य परिवहन विभाग इनाम जारी करता है। अपने ज़िला परिवहन कार्यालय में अस्पताल के कागज़ों के साथ संपर्क करें।
7. क्या इनाम के दावे के लिए किसी को पैसे देने पड़ते हैं?
नहीं। प्रक्रिया निःशुल्क है। राह-वीर इनाम दिलाने के नाम पर पैसे माँगने वाला व्यक्ति ठग है — उसे पैसे न दें।
8. क्या यह योजना मेरे राज्य में लागू है?
हाँ, यह केंद्रीय मंत्रालय की राष्ट्रीय योजना है जो राज्य परिवहन विभागों के माध्यम से लागू होती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड, नगालैंड और दिल्ली सहित कई राज्य इन नियमों का पालन कर रहे हैं।
आधिकारिक लिंक
- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय — morth.nic.in
- परिवहन सेवा (Parivahan Sewa) — parivahan.gov.in
- राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर — 112; एंबुलेंस — 108
अस्वीकरण: GramSuvidha एक निजी सूचना पोर्टल है, सरकारी वेबसाइट नहीं। यह लेख केवल सूचना के लिए है; किसी भी इनाम पर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी अधिकारियों का होगा, योजना के नियमों के अनुसार। अपने ज़िले की ताज़ा प्रक्रिया के लिए ज़िला परिवहन कार्यालय से संपर्क करें।





