Digital Life Certificate Campaign 5.0 November 2026: घर बैठे जीवन प्रमाण पत्र कैसे बनाएं

हर साल नवंबर का महीना पेंशनरों के लिए एक जरूरी काम लेकर आता है। पेंशन जारी रखने के लिए यह साबित करना होता है कि पेंशनर जीवित हैं। पहले इसके लिए बैंक या पेंशन कार्यालय जाकर कागज पर प्रमाण पत्र देना पड़ता था। अब यही काम मोबाइल फोन से भी हो सकता है। इस लेख में आप जानेंगे कि Digital Life Certificate क्या होता है, 2026 का खास अभियान किस तरह आपकी मदद करेगा, घर बैठे चेहरे की पहचान से प्रमाण पत्र कैसे बनाएं, और अगर फोन या इंटरनेट की दिक्कत हो तो दूसरे कौन से रास्ते खुले हैं।

यह गाइड खास तौर पर उन पेंशनरों और उनके परिवारों के लिए लिखी गई है जो पहली बार डिजिटल तरीका अपना रहे हैं। हर चरण को आसान भाषा में समझाया गया है, ताकि बेटा, बेटी या पड़ोसी भी अपने बुजुर्ग माता-पिता की मदद कर सकें। साथ में यह भी बताया गया है कि किन कागजों की जरूरत पड़ेगी, प्रमाण पत्र बनने के बाद उसकी पहचान संख्या को कैसे संभालकर रखें, और ठगी से कैसे बचें।

Digital Life Certificate Campaign 5.0: एक नजर में

अभियान का नाम Nationwide Digital Life Certificate Campaign 5.0
चलाने वाला विभाग पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (Department of Pension and Pensioners Welfare)
अभियान की अवधि 1 नवंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक
कवरेज देश के 2,000 शहर और जिले
लक्ष्य 2.30 करोड़ Digital Life Certificate, जिनमें से 1.50 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन से
मुख्य तकनीक आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन (Android और iOS स्मार्टफोन पर)
शिविर लगाने वाले 19 बैंक, 785 जिला डाकघर, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, 56 पेंशनभोगी कल्याण संघ, रेलवे, EPFO, CGDA, दूरसंचार विभाग और राज्य सरकारें
आधिकारिक पोर्टल jeevanpramaan.gov.in
डोरस्टेप सेवा शुल्क इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की डोरस्टेप सेवा में सफलतापूर्वक प्रमाण पत्र बनने पर 70 रुपये

Digital Life Certificate क्या होता है

Digital Life Certificate को जीवन प्रमाण पत्र भी कहा जाता है। यह एक डिजिटल सबूत होता है कि पेंशनर जीवित हैं। सरकार हर साल पेंशन देने से पहले यह जानना चाहती है कि पेंशन सही व्यक्ति को मिल रही है। इसलिए हर पेंशनर को साल में एक बार जीवन प्रमाण पत्र देना होता है। केंद्र सरकार के पेंशनरों के लिए यह महीना आमतौर पर नवंबर होता है।

Jeevan Pramaan भारत सरकार की वह व्यवस्था है जिसके जरिए यह प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से बनता है। इसमें आधार की पहचान का इस्तेमाल होता है। प्रमाण पत्र बनने के बाद वह एक केंद्रीय भंडार में सुरक्षित हो जाता है, जहां से पेंशन देने वाला बैंक या विभाग उसे खुद उठा लेता है। पेंशनर को कागज लेकर बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। प्रमाण पत्र बनते ही एक खास पहचान संख्या मिलती है, जिसे Pramaan ID कहा जाता है। इसी संख्या से बाद में प्रमाण पत्र को डाउनलोड किया जा सकता है और उसकी स्थिति देखी जा सकती है।

यह व्यवस्था 10 नवंबर 2014 को शुरू हुई थी। तब से करोड़ों पेंशनर इसका इस्तेमाल कर चुके हैं। नवंबर 2021 में इसमें चेहरे की पहचान वाली तकनीक जुड़ी, जिससे स्मार्टफोन से ही प्रमाण पत्र बनाना संभव हो गया। पिछले साल के अभियान में 60 प्रतिशत से ज्यादा प्रमाण पत्र फेस ऑथेंटिकेशन से ही बने थे, ऐसा पेंशन विभाग के आंकड़ों से पता चलता है। इससे साफ है कि बुजुर्गों के बीच यह तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

Campaign 5.0 क्या है और यह क्यों खास है

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग हर साल नवंबर में एक देशव्यापी अभियान चलाता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा पेंशनर समय पर अपना प्रमाण पत्र जमा कर सकें। साल 2026 का यह पांचवां अभियान है, इसलिए इसे Campaign 5.0 कहा जा रहा है। सरकार ने इसे अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान बताया है।

इस बार अभियान का सबसे ज्यादा जोर फेस ऑथेंटिकेशन पर है। इसका मतलब है कि पेंशनर को अंगूठे के निशान वाली मशीन की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिन बुजुर्गों के हाथ के निशान उम्र के कारण साफ नहीं आते, उनके लिए चेहरा स्कैन करना कहीं आसान है। अच्छी रोशनी में फोन का कैमरा चेहरा पहचान लेता है और कुछ ही मिनट में प्रमाण पत्र तैयार हो जाता है।

अभियान के दौरान देश भर में उत्सव के माहौल में शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में सिर्फ प्रमाण पत्र ही नहीं बनेगा, बल्कि स्वास्थ्य जांच और आधार अपडेट जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। बैंक, डाकघर, रेलवे कार्यालय और पेंशनभोगी संघों के शिविरों में प्रशिक्षित लोग मदद करेंगे। अगर किसी पेंशनर को दिक्कत आती है, तो शिकायतों के लिए विशेष अधिकारी भी तैनात रहेंगे। दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचने के लिए डाक विभाग और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की बड़ी भूमिका रहेगी।

कौन जीवन प्रमाण पत्र बना सकता है

यह सुविधा उन सभी पेंशनरों के लिए है जिनका पेंशन देने वाला विभाग Jeevan Pramaan व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और दूसरे सरकारी संगठनों के पेंशनर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, बशर्ते उनका आधार पेंशन देने वाली एजेंसी से जुड़ा हो।

उम्र के हिसाब से समय सीमा अलग है। 80 साल या उससे ज्यादा उम्र के पेंशनर 1 अक्टूबर से ही अपना प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। 80 साल से कम उम्र के पेंशनरों के लिए जमा करने का समय 1 नवंबर से 30 नवंबर तक है। इसलिए अगर आपके घर में 80 साल से ऊपर कोई पेंशनर है और उन्होंने अक्टूबर में प्रमाण पत्र नहीं बनाया है, तो नवंबर में भी वह इसे बना सकते हैं।

दो स्थितियों में Jeevan Pramaan की जगह पुरानी प्रक्रिया अपनानी होती है। अगर पेंशनर दोबारा किसी नौकरी में लग गए हैं, या पुनर्विवाह कर चुके हैं, तो उन्हें जीवन प्रमाण पत्र पुराने तरीके से ही देना होता है। यह नियम Jeevan Pramaan पोर्टल के सवाल-जवाब खंड में दिया गया है। बाकी सभी पेंशनर डिजिटल तरीका अपना सकते हैं।

प्रमाण पत्र बनाने से पहले क्या तैयार रखें

काम शुरू करने से पहले कुछ जानकारियां हाथ में रख लें, ताकि बीच में रुकना न पड़े। सबसे पहले आधार नंबर चाहिए। मोबाइल नंबर वही होना चाहिए जो आधार से जुड़ा हो, क्योंकि उसी पर OTP आएगा। इसके अलावा पेंशन पेमेंट ऑर्डर नंबर, जिसे PPO नंबर कहा जाता है, पेंशन खाते का नंबर, बैंक का नाम, पेंशन मंजूर करने वाले प्राधिकरण और पेंशन देने वाली एजेंसी का नाम भी दर्ज करना होता है। ये जानकारियां पेंशन की पासबुक या PPO पुस्तिका में मिल जाती हैं।

अगर आप परिवार के किसी सदस्य की मदद कर रहे हैं, तो पेंशनर का खुद मौजूद होना जरूरी है, क्योंकि चेहरा उन्हीं का स्कैन होगा। फोन किसी का भी हो सकता है। बेटे या बेटी के फोन से भी माता-पिता का प्रमाण पत्र बन सकता है। बस रोशनी अच्छी होनी चाहिए और पेंशनर का चेहरा साफ दिखना चाहिए।

तरीका 1: मोबाइल से फेस ऑथेंटिकेशन से प्रमाण पत्र बनाएं

यह सबसे आसान तरीका है और अभियान 2026 में इसी पर सबसे ज्यादा जोर है। इसमें किसी मशीन या कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है।

  1. सबसे पहले फोन में दो आधिकारिक ऐप इंस्टॉल करें: AadhaarFaceRD ऐप और Jeevan Pramaan फेस ऐप। दोनों ऐप सिर्फ Google Play Store या Apple App Store से ही डाउनलोड करें। किसी के भेजे हुए लिंक या फाइल से ऐप कभी इंस्टॉल न करें।
  2. Jeevan Pramaan ऐप खोलें। सबसे पहले ऑपरेटर के रूप में अपनी पहचान करें। इसके लिए अपना आधार नंबर डालें और आधार से जुड़े मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करें। ऑपरेटर वह व्यक्ति होता है जो फोन चला रहा है, यह पेंशनर भी हो सकता है और परिवार का सदस्य भी।
  3. अब पेंशनर की जानकारी भरें: पेंशनर का आधार नंबर, मोबाइल नंबर, PPO नंबर, पेंशन खाता नंबर, बैंक का नाम और संबंधित प्राधिकरण का नाम।
  4. इसके बाद ऐप पेंशनर के चेहरे का स्कैन लेगा। पेंशनर को अच्छी रोशनी में बैठाएं, चेहरा सीधा रखें और ऐप के निर्देशों का पालन करें। स्कैन सफल होते ही प्रमाण पत्र बन जाएगा।
  5. प्रमाण पत्र बनने पर मोबाइल पर SMS आएगा और Pramaan ID मिलेगी। इस संख्या को संभालकर रखें। इसी से आप बाद में प्रमाण पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।

अगर पहली कोशिश में चेहरा स्कैन न हो, तो घबराएं नहीं। रोशनी बदलकर, चश्मा हटाकर या चेहरा थोड़ा आगे-पीछे करके दोबारा कोशिश करें। कई बार धीमी इंटरनेट स्पीड से भी दिक्कत आती है, ऐसे में थोड़ी देर बाद दोबारा प्रयास करें।

तरीका 2: बैंक, डाकघर या सेवा केंद्र पर बायोमेट्रिक से बनाएं

अगर आपके पास स्मार्टफोन नहीं है, या फेस स्कैन में बार-बार दिक्कत आ रही है, तो दूसरा रास्ता बायोमेट्रिक है। अपने पेंशन देने वाले बैंक की शाखा, नजदीकी डाकघर या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाएं। वहां अंगूठे के निशान या आंखों की पुतली की जांच से प्रमाण पत्र बनाया जाता है। अभियान के दौरान लगने वाले शिविरों में भी यही सुविधा मिलेगी। साथ में आधार कार्ड, PPO पुस्तिका और बैंक पासबुक ले जाना न भूलें।

रेलवे और दूरसंचार विभाग जैसे बड़े विभाग अपने पेंशनरों के लिए अलग से शिविर भी लगा रहे हैं। अगर आप रेलवे या दूरसंचार विभाग के पेंशनर हैं, तो अपने विभाग के स्थानीय कार्यालय से शिविर की तारीख और जगह की जानकारी ले लें। इससे लंबी लाइन से बचा जा सकता है।

तरीका 3: डाकिया घर आकर प्रमाण पत्र बनाएगा

जो पेंशनर चलने-फिरने में असमर्थ हैं, उनके लिए डोरस्टेप सेवा सबसे अच्छी है। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के जरिए डाकिया घर आकर डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बना देता है। इसके लिए नजदीकी डाकघर से संपर्क करना होता है। सफलतापूर्वक प्रमाण पत्र बनने पर 70 रुपये का शुल्क लगता है। यह सेवा उन बुजुर्गों के लिए वरदान है जो बैंक या शिविर तक नहीं जा सकते।

प्रमाण पत्र बनने के बाद क्या करें

प्रमाण पत्र बनने के बाद सबसे पहला काम Pramaan ID को संभालकर रखना है। इसे एक डायरी में लिख लें या मोबाइल में सुरक्षित जगह सेव कर लें। अगर प्रमाण पत्र की कॉपी चाहिए, तो jeevanpramaan.gov.in पोर्टल पर Pramaan ID डालकर उसे PDF में डाउनलोड किया जा सकता है।

कुछ दिनों बाद यह भी जांच लें कि पेंशन देने वाली एजेंसी तक आपका प्रमाण पत्र पहुंच गया है या नहीं। आमतौर पर यह जानकारी अपने आप पहुंच जाती है, लेकिन अगर पेंशन में देरी दिखे, तो बैंक शाखा या पेंशन कार्यालय में Pramaan ID दिखाकर पूछताछ करें। नवंबर के आखिरी दिनों का इंतजार न करें, क्योंकि महीने के अंत में शिविरों और ऐप पर भीड़ बढ़ जाती है।

अगर प्रमाण पत्र समय पर न बन पाए तो क्या होगा

पेंशन जारी रखने के लिए हर साल नवंबर में जीवन प्रमाण पत्र देना जरूरी है। अगर प्रमाण पत्र समय पर जमा नहीं होता, तो पेंशन रुक सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पेंशन हमेशा के लिए खत्म हो गई। प्रमाण पत्र जमा करते ही रुकी हुई पेंशन आमतौर पर फिर से शुरू हो जाती है। इसलिए अगर किसी वजह से नवंबर बीत भी जाए, तो भी जितनी जल्दी हो सके प्रमाण पत्र बनवाएं और बैंक को जानकारी दें।

ठगी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां

नवंबर के महीने में ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। याद रखें, सरकार का कोई अधिकारी फोन करके आपसे OTP, आधार नंबर या बैंक की जानकारी नहीं मांगता। अगर कोई फोन करके कहे कि आपकी पेंशन रोक दी जाएगी और तुरंत कोई ऐप डाउनलोड करने को कहे, तो वह ठगी की कोशिश हो सकती है। किसी के भेजे हुए लिंक से ऐप इंस्टॉल न करें और व्हाट्सऐप पर आई किसी फाइल को खोलकर इंस्टॉल न करें। Jeevan Pramaan और AadhaarFaceRD ऐप सिर्फ आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।

किसी अजनबी को अपना PPO नंबर, आधार नंबर या Pramaan ID बताने से बचें। अगर कोई खुद को अधिकारी बताकर घर आकर पैसे मांगे, तो पहले स्थानीय डाकघर या बैंक से पुष्टि करें। डोरस्टेप सेवा का शुल्क सिर्फ सफल प्रमाण पत्र बनने पर ही लगता है, और वह भी निर्धारित राशि ही होती है।

Digital Life Certificate से जुड़े आम सवाल

Digital Life Certificate हर साल क्यों देना होता है

पेंशन सही व्यक्ति को मिल रही है, यह सुनिश्चित करने के लिए हर साल जीवन प्रमाण पत्र देना जरूरी है। इससे फर्जी पेंशन भुगतान रोका जा सकता है और पेंशन व्यवस्था पारदर्शी रहती है।

80 साल से ऊपर के पेंशनर कब प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं

80 साल या उससे ज्यादा उम्र के पेंशनर 1 अक्टूबर से ही अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। 80 साल से कम उम्र के पेंशनरों के लिए समय 1 नवंबर से 30 नवंबर तक है।

क्या बेटे के फोन से माता-पिता का प्रमाण पत्र बन सकता है

हां, फोन किसी का भी हो सकता है। ऑपरेटर के रूप में परिवार का कोई सदस्य ऐप चला सकता है, लेकिन चेहरा स्कैन पेंशनर का ही होगा, इसलिए पेंशनर का मौजूद होना जरूरी है।

फेस स्कैन न हो तो क्या करें

रोशनी अच्छी करें, चश्मा हटाएं और दोबारा कोशिश करें। अगर फिर भी न हो, तो बैंक, डाकघर या शिविर में जाकर अंगूठे के निशान से प्रमाण पत्र बनवाएं।

Pramaan ID खो जाए तो क्या करें

प्रमाण पत्र बनने पर SMS में Pramaan ID आती है। अगर वह खो जाए, तो jeevanpramaan.gov.in पोर्टल पर आधार नंबर से भी प्रमाण पत्र खोजा जा सकता है। बैंक शाखा में भी Pramaan ID से पूछताछ की जा सकती है।

डोरस्टेप सेवा का कितना शुल्क लगता है

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की डोरस्टेप सेवा में सफलतापूर्वक प्रमाण पत्र बनने पर 70 रुपये का शुल्क लगता है। अगर प्रमाण पत्र न बने, तो शुल्क नहीं लगता।

क्या यह प्रमाण पत्र सिर्फ केंद्र सरकार के पेंशनरों के लिए है

नहीं, जिन राज्य सरकारों और संगठनों के पेंशन विभाग Jeevan Pramaan से जुड़े हैं, उनके पेंशनर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने पेंशन देने वाले विभाग से एक बार पुष्टि जरूर कर लें।

आधिकारिक लिंक और जानकारी

जीवन प्रमाण पत्र बनाने और डाउनलोड करने के लिए आधिकारिक पोर्टल jeevanpramaan.gov.in है। अभियान से जुड़ी ताजा जानकारी पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की ओर से जारी की जाती है। अपने नजदीकी बैंक शाखा, डाकघर या पेंशनभोगी संघ के शिविर की जानकारी के लिए स्थानीय कार्यालय से संपर्क करें।

यह भी पढ़ें: Atal Pension Yojana 2026, National Pension System NPS 2026 Guide, e-Shram Card Registration

अस्वीकरण: यह लेख एक निजी सूचना पोर्टल (सरकारी वेबसाइट नहीं) द्वारा जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। कृपया अंतिम पुष्टि के लिए आधिकारिक पोर्टल jeevanpramaan.gov.in या अपने पेंशन देने वाले विभाग से संपर्क करें।

अंतिम अपडेट: 30 अक्टूबर 2026