MSP 2026: न्यूनतम समर्थन मूल्य की नई सूची — गेहूं, सरसों, चना, मसूर की पूरी जानकारी

Updated: 27 October 2026

अभी आपको कौन सा MSP लागू होता है

अगर आप अभी रबी की बुवाई कर रहे हैं, तो विपणन सीजन 2027-28 की दरें देखें। अगर आप अभी खरीफ की फसल बेच रहे हैं, तो विपणन सीजन 2026-27 की दरें देखें। दोनों सीजन की दरों को आपस में न मिलाएं।

खरीफ MSP 2026-27

सीजन: खरीफ विपणन सीजन 2026-27। मंजूरी: 13 मई 2026। स्रोत: PIB।

फसलMSP (रुपये प्रति क्विंटल)
धान (सामान्य)2441
धान (ग्रेड A)2461
ज्वार (हाइब्रिड)4023
ज्वार (मालदंडी)4073
बाजरा2900
रागी5205
मक्का2410
तुअर / अरहर8450
मूंग8780
उड़द8200
मूंगफली7517
सूरजमुखी बीज8343
सोयाबीन (पीला)5708
तिल10346
नाइजरसीड10052
कपास (मध्यम स्टेपल)8267
कपास (लंबा स्टेपल)8667

रबी MSP 2027-28

सीजन: रबी विपणन सीजन 2027-28। मंजूरी: 30 सितंबर 2026। स्रोत: PIB।

फसलMSP (रुपये प्रति क्विंटल)
गेहूं2610
जौ2286
चना5958
मसूर7390
रेपसीड और सरसों6613
कुसुम7215

MSP व्यवहार में कैसे काम करता है

MSP वह न्यूनतम कीमत है, जिस पर सरकार अधिदेशित फसल खरीदती है। सरकार हर साल 22 अधिदेशित कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है, जो कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिश पर आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा मंजूर किए जाते हैं।

MSP पर बेचने के लिए अपनी फसल सरकारी खरीद केंद्र या अपने राज्य द्वारा अधिसूचित नामित एजेंसी केंद्र पर ले जाएं। निजी मंडी में की गई बिक्री अपने आप MSP पर बिक्री नहीं होती।

खरीदी गई उपज के लिए किसानों को MSP की राशि का भुगतान किया जाता है। केंद्र, तारीखें, पंजीकरण और गुणवत्ता जांच राज्य की अधिसूचना के अनुसार होते हैं, इसलिए फसल ले जाने से पहले राज्य की सूचना देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: अभी कौन से सीजन की MSP दर लागू होती है?

उत्तर: अगर आप अभी रबी की बुवाई कर रहे हैं, तो विपणन सीजन 2027-28 की दरें देखें। अगर आप अभी खरीफ की फसल बेच रहे हैं, तो विपणन सीजन 2026-27 की दरें देखें।

प्रश्न: धान ग्रेड A और धान सामान्य में क्या अंतर है?

उत्तर: खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए, 13 मई 2026 को मंजूर, धान ग्रेड A का MSP 2461 रुपये प्रति क्विंटल है और धान सामान्य का MSP 2441 रुपये प्रति क्विंटल है, यानी 20 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है।

प्रश्न: क्या रबी 2027-28 की दरें मंजूर हो चुकी हैं?

उत्तर: हां। रबी विपणन सीजन 2027-28 की दरें 30 सितंबर 2026 को मंजूर हुईं। गेहूं का MSP 2610 रुपये प्रति क्विंटल है और रेपसीड और सरसों का MSP 6613 रुपये प्रति क्विंटल है।

प्रश्न: MSP पर फसल कहां बेच सकते हैं?

उत्तर: सरकारी खरीद केंद्र या अपने राज्य द्वारा अधिसूचित नामित एजेंसी केंद्र पर। केंद्र, तारीखें, पंजीकरण और गुणवत्ता जांच के लिए राज्य की सूचना देखें।

तेज़ जानकारी (Quick Facts)

विषयविवरण
MSP का पूरा नामन्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price)
MSP कौन तय करता हैकृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिश पर केंद्रीय मंत्रिमंडल समिति (CCEA)
नई रबी सूचीविपणन सीजन 2027-28 के लिए, 30 सितंबर 2026 को मंजूर
नई खरीफ सूचीविपणन सीजन 2026-27 के लिए, 13 मई 2026 को मंजूर
कितनी फसलों पर MSP22 अधिदेशित फसलें (गन्ने पर MSP की जगह FRP)
खरीद कौन करता हैFCI, NAFED, NCCF, CCI, JCI और राज्य एजेंसियां
अंतिम अपडेट18 अक्टूबर 2026

अगर आप किसान हैं, तो एक सवाल हर सीजन में आपके मन में आता है — इस बार मेरी फसल का सही दाम क्या मिलेगा? मंडी में भाव ऊपर-नीचे होता रहता है, कभी फसल के दाम अच्छे मिलते हैं, कभी लागत भी नहीं निकलती। इसी अनिश्चितता से किसानों को बचाने के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था बनाई है। इस लेख में हम आपको पूरी जानकारी देंगे — MSP क्या है, यह कैसे तय होता है, नई रबी और खरीफ सूची में कौन सी फसल का कितना दाम तय हुआ है, MSP पर फसल बेचने की पूरी प्रक्रिया क्या है, और MSP और मंडी भाव में क्या फर्क है। साथ में आपके मन में आने वाले सबसे आम सवालों के जवाब भी मिलेंगे। लेख को अंत तक पढ़ें, क्योंकि आखिर में हमने MSP की सीमाओं के बारे में भी ईमानदारी से बताया है, ताकि आपको पूरी तस्वीर मिले।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है?

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह न्यूनतम कीमत है, जिस पर सरकार किसानों से उनकी फसल खरीदने की गारंटी देती है। आसान भाषा में कहें तो MSP एक सुरक्षा कवच है। अगर बाजार में किसी फसल का भाव MSP से नीचे चला जाता है, तो किसान अपनी फसल सरकार या सरकार की अधिकृत एजेंसियों को MSP पर बेच सकता है। इससे किसान को नुकसान से बचाव मिलता है और उसे अपनी उपज का कम से कम एक तय दाम मिलने का भरोसा रहता है।

MSP की घोषणा फसल की बुवाई से पहले की जाती है, ताकि किसान पहले से जान सके कि उसकी फसल का न्यूनतम दाम क्या होगा और वह उसी हिसाब से यह तय कर सके कि कौन सी फसल लगानी है। MSP की व्यवस्था का एक और बड़ा मकसद फसलों में विविधता लाना है — यानी किसानों को सिर्फ गेहूं और धान तक सीमित न रहकर दालों और तिलहनों की खेती के लिए भी प्रोत्साहित करना, क्योंकि देश में दालों और खाद्य तेलों का आयात अभी भी काफी होता है।

एक बात साफ समझना जरूरी है: MSP का मतलब यह नहीं है कि सरकार आपकी पूरी फसल खरीद ही लेगी। सरकार केवल बाजार में बिकने लायक अधिशेष (marketable surplus) की खरीद करती है, और वह भी तब जब बाजार भाव MSP से नीचे चला जाए। अगर मंडी में भाव MSP से ऊपर है, तो किसान मंडी में बेचकर ज्यादा फायदा उठा सकता है। यानी MSP एक न्यूनतम सुरक्षा है, अधिकतम कीमत नहीं।

MSP कैसे तय होता है?

MSP तय करने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है और इसमें किसानों, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों की राय ली जाती है।

पहला चरण — CACP की सिफारिश: कृषि लागत और मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices — CACP) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का एक संबद्ध कार्यालय है। यह आयोग हर फसल की उत्पादन लागत, मांग-आपूर्ति की स्थिति, बाजार भाव के रुझान, अंतर-फसल मूल्य समानता, उपभोक्ताओं पर असर और महंगाई जैसे कई पहलुओं का अध्ययन करके MSP की सिफारिश करता है। सिफारिश तैयार करने से पहले आयोग राज्य सरकारों, संबंधित मंत्रालयों और किसान संगठनों से भी विचार-विमर्श करता है।

दूसरा चरण — CCEA की मंजूरी: CACP की सिफारिश पर अंतिम फैसला आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs — CCEA) लेती है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। CCEA की मंजूरी के बाद ही नए MSP की औपचारिक घोषणा होती है।

लागत का फॉर्मूला — A2+FL का डेढ़ गुना: केंद्रीय बजट 2018-19 में घोषित सिद्धांत के अनुसार MSP को उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत के कम से कम डेढ़ गुना स्तर पर रखा जाता है। उत्पादन लागत में A2+FL लागत को आधार माना जाता है। A2 में बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, डीजल-बिजली, किराए पर लिया श्रम, मशीन का किराया और पट्टे की जमीन का किराया जैसे सभी नकद खर्च शामिल होते हैं। FL का मतलब है परिवार के श्रम का अनुमानित मूल्य — यानी खेत में काम करने वाले परिवार के सदस्यों के श्रम की कीमत भी लागत में जोड़ी जाती है। इस A2+FL लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का मार्जिन जोड़कर MSP तय होता है। कुछ फसलों में यह मार्जिन 50 प्रतिशत से कहीं ज्यादा भी होता है, जैसे नई रबी सूची में गेहूं पर मार्जिन 106 प्रतिशत है।

C2 लागत क्या है: कई बार आप C2 लागत का नाम भी सुनते होंगे। C2 में A2+FL के अलावा अपनी जमीन का किराया और पूंजी पर ब्याज भी शामिल होता है, इसलिए C2 लागत A2+FL से ज्यादा होती है। मौजूदा नीति में MSP का आधार A2+FL लागत है, C2 नहीं — यह फर्क समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि कुछ मांगों में MSP को C2 लागत के आधार पर तय करने की बात कही जाती है।