आपके गांव में नई सड़क बनी है या नहीं, पंचायत को कितना पैसा मिला, वह पैसा कहां खर्च हुआ, किस ठेकेदार को कितना भुगतान हुआ — ये सवाल हर गांव वाले के मन में कभी न कभी आते हैं। पहले इन सवालों के जवाब जानने के लिए पंचायत दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते थे, रजिस्टर खुलवाने पड़ते थे, और कई बार तो जवाब मिलता ही नहीं था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। सरकार ने पंचायतों का पूरा हिसाब-किताब ऑनलाइन कर दिया है, और वह भी इस तरह कि कोई भी नागरिक अपने मोबाइल से अपने गांव की पंचायत की पूरी रिपोर्ट घर बैठे देख सकता है। इस आर्टिकल में हम आपको उस पोर्टल की पूरी जानकारी देंगे — बिना लॉगिन रिपोर्ट कैसे देखें, भुगतान की स्थिति कैसे जांचें, काम की प्रगति रिपोर्ट कहां मिलेगी, और अगर रिपोर्ट में कुछ गलत दिखे तो शिकायत कहां करें। साथ में 2026 की नई जानकारी और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल भी हैं।
eGramSwaraj Portal क्या है?
eGramSwaraj भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय (Ministry of Panchayati Raj) का आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल है। इसका आधिकारिक पता egramswaraj.gov.in है। इस पोर्टल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के मौके पर लॉन्च किया था। यह पोर्टल ई-पंचायत मिशन मोड प्रोजेक्ट (e-Panchayat Mission Mode Project) के तहत चलता है, जो पुनर्गठित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (Rashtriya Gram Swaraj Abhiyan – RGSA) का हिस्सा है।
सीधे शब्दों में कहें तो eGramSwaraj एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है जहां देश की हर ग्राम पंचायत अपनी योजना बनाती है, अपना बजट और हिसाब-किताब दर्ज करती है, और अपने कामों की प्रगति की रिपोर्ट देती है। पहले पंचायतों का लेखा-जोखा कागज के रजिस्टरों में होता था, जिसमें देरी, गलती और गड़बड़ी की गुंजाइश बहुत ज्यादा थी। अब वही सारा काम ऑनलाइन होता है — योजना से लेकर भुगतान तक, हर कदम डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होता है।
पोर्टल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सिर्फ अधिकारियों के लिए नहीं है। आम नागरिक भी बिना किसी लॉगिन और बिना किसी फीस के अपनी पंचायत की फंड रिपोर्ट, खर्च का ब्योरा, भुगतान की स्थिति और कामों की प्रगति देख सकते हैं। यानी गांव का पैसा कहां गया, यह जानने के लिए अब किसी की इजाजत या सिफारिश की जरूरत नहीं है।
एक नजर में – eGramSwaraj Quick Facts
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पोर्टल का नाम | eGramSwaraj |
| आधिकारिक वेबसाइट | egramswaraj.gov.in |
| मंत्रालय | पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार |
| लॉन्च की तारीख | 24 अप्रैल 2020 (राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस) |
| किसके लिए | देश की सभी ग्राम पंचायतें और आम नागरिक |
| मुख्य काम | योजना, लेखा-जोखा, भुगतान और कामों की निगरानी |
| नागरिकों के लिए शुल्क | बिल्कुल मुफ्त, रिपोर्ट देखने के लिए लॉगिन की जरूरत नहीं |
| लॉगिन किसके लिए | केवल अधिकृत पंचायत अधिकारी (Data Entry, Accountant, Administrator) |
| भुगतान व्यवस्था | PFMS (Public Financial Management System) से जुड़ा हुआ |
| वित्त वर्ष | अप्रैल से मार्च |
| मोबाइल ऐप | eGram Swaraj ऐप Google Play Store पर, और Meri Panchayat ऐप भी उपलब्ध |
eGramSwaraj Portal क्यों शुरू किया गया?
गांवों के विकास के लिए सरकार हर साल हजारों करोड़ रुपये पंचायतों को देती है। यह पैसा सड़कों, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, स्कूल भवन और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए। लेकिन जब तक हिसाब कागज पर था, तब तक यह जानना मुश्किल था कि पैसा सच में काम पर लगा या सिर्फ कागजों में खर्च दिखा दिया गया।
eGramSwaraj इसी समस्या का समाधान है। इस पोर्टल पर हर पंचायत को अपनी ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan – GPDP) ऑनलाइन तैयार करके अपलोड करनी होती है। योजना में जो काम मंजूर होते हैं, उन्हीं पर पैसा खर्च होता है, और हर भुगतान PFMS के जरिए ऑनलाइन दर्ज होता है। काम पूरा होने पर उसकी जियो-टैग वाली फोटो अपलोड करनी होती है, यानी GPS लोकेशन के साथ असली तस्वीर, जिससे साबित होता है कि काम जमीन पर सच में हुआ है, सिर्फ कागज पर नहीं।
इस व्यवस्था से तीन बड़े फायदे हुए हैं। पहला, पंचायतों का काम पारदर्शी हुआ — कोई भी नागरिक हिसाब देख सकता है। दूसरा, भुगतान में देरी और गड़बड़ी कम हुई, क्योंकि पैसा सीधे PFMS से ट्रैक होता है। तीसरा, सरकार को देश भर की पंचायतों का सही और ताजा डेटा एक जगह मिलता है, जिससे योजनाएं बेहतर बनती हैं।
2026 में eGramSwaraj कितना बड़ा हो चुका है?
राज्यसभा में 12 अगस्त 2026 को दिए गए सरकार के जवाब के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश की कुल 2,58,725 ग्राम पंचायतों में से 2,55,251 पंचायतों (98.65 प्रतिशत) ने अपनी ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) eGramSwaraj पर अपलोड की थी। उसी वित्त वर्ष में 2,45,839 पंचायतों (95 प्रतिशत) ने eGramSwaraj-PFMS व्यवस्था से 57,337 करोड़ रुपये का भुगतान किया। मार्च 2026 तक इस व्यवस्था से कुल 3,00,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान हो चुका था।
GPDP अपलोड करने वाली पंचायतों की संख्या हर साल बढ़ रही है — 25 मार्च 2026 को राज्यसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में 2,55,256, वित्त वर्ष 2024-25 में 2,55,608 और वित्त वर्ष 2025-26 में 2,55,173 पंचायतों ने अपनी योजनाएं पोर्टल पर अपलोड की थीं। बाद में 12 अगस्त 2026 के जवाब में वित्त वर्ष 2025-26 का आंकड़ा अपडेट होकर 2,55,251 हो गया था। ये आंकड़े बताते हैं कि eGramSwaraj अब गांवों के शासन की रीढ़ बन चुका है, कोई छोटा प्रयोग नहीं।
2026 में पोर्टल से जुड़ा एक नया टूल भी चर्चा में है — SabhaSaar। यह एक AI आधारित टूल है जो ग्राम सभा की बैठकों की आवाज को लिखित कार्यवृत्त (Minutes of Meeting) में बदल देता है। 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, 1,35,956 ग्राम पंचायतों ने इस टूल का इस्तेमाल किया था और 3,57,020 से ज्यादा बैठकों के कार्यवृत्त तैयार किए गए थे। इससे ग्राम सभा की बैठकों का रिकॉर्ड रखना आसान हुआ है और यह भी पता चलता है कि बैठकें कितनी बार और किस तरह हो रही हैं।
16th Finance Commission और पंचायतों के लिए बड़ी रकम
2026 से पंचायतों के लिए पैसों का एक नया दौर शुरू हुआ है। 16वें वित्त आयोग (16th Finance Commission) ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए 4,35,236 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है। यह अनुदान दो हिस्सों में बंटा है — बेसिक ग्रांट और परफॉर्मेंस ग्रांट, 80:20 के अनुपात में। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 21 मई 2026 को इसके क्रियान्वयन के लिए परिचालन दिशानिर्देश (Operational Guidelines) भी जारी कर दिए हैं।
इस रकम का मतलब यह है कि आने वाले पांच सालों में गांवों के विकास के लिए पहले से कहीं ज्यादा पैसा आएगा, और वह पैसा eGramSwaraj के जरिए ही ट्रैक होगा। इसलिए अगर आप अपने गांव के विकास कार्यों पर नजर रखना चाहते हैं, तो इस पोर्टल को समझना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। परफॉर्मेंस ग्रांट का हिस्सा पंचायत के काम के प्रदर्शन से जुड़ा है, यानी जो पंचायत अच्छा काम करेगी और सही रिकॉर्ड रखेगी, उसे आगे और मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM VGSY) – 2026 की बड़ी खबर
28 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (Pradhan Mantri Viksit Gram Swaraj Yojana – PM VGSY) को मंजूरी दी। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है जो वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी। इसका कुल परिव्यय 7,395.55 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 4,869.48 करोड़ रुपये और राज्यों का हिस्सा 2,526.07 करोड़ रुपये है। यह योजना देश की 2.55 लाख पंचायतों तक पहुंचेगी।
इस योजना का सीधा संबंध eGramSwaraj से है। इसका मकसद है कि हर ग्राम पंचायत हर साल एक समग्र ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार करे — और वह योजना eGramSwaraj पोर्टल पर ही बनाई और अपलोड की जाए। साथ ही, योजना पंचायतों की क्षमता बढ़ाएगी ताकि वे 16वें वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदान का सही और पूरा इस्तेमाल कर सकें।
आम नागरिक के लिए इसका मतलब साफ है — आने वाले पांच सालों में आपकी पंचायत की हर योजना, हर काम और हर रुपये का हिसाब eGramSwaraj पर और भी ज्यादा विस्तार से दिखेगा। अगर आप अब से इस पोर्टल को पढ़ना सीख लेते हैं, तो PM VGSY के तहत बनने वाली योजनाओं पर भी आप शुरू से नजर रख पाएंगे।
बिना लॉगिन क्या-क्या देख सकते हैं?
बहुत से लोग यह समझते हैं कि सरकारी पोर्टल देखने के लिए यूजर ID और पासवर्ड चाहिए, लेकिन eGramSwaraj पर ऐसा नहीं है। आम नागरिक बिना रजिस्ट्रेशन और बिना लॉगिन के ये जानकारी देख सकते हैं:
- पंचायत प्रोफाइल (Panchayat Profile) — ग्राम पंचायत का नाम, पंचायत कोड, सरपंच या प्रधान का नाम, सचिव और अन्य अधिकारियों के विवरण।
- फंड आवंटन और खर्च रिपोर्ट — पंचायत को किस योजना से कितना पैसा मिला और कितना खर्च हुआ।
- भुगतान स्थिति (Payment Status) — किस काम के लिए किसे कितना भुगतान हुआ, वाउचर नंबर सहित।
- जियो-टैगिंग रिपोर्ट (Geo-Tagging Report) — पूरे हुए और चल रहे कामों की GPS लोकेशन वाली तस्वीरें।
- वित्तीय प्रगति रिपोर्ट (Financial Progress Report) — महीने और साल के हिसाब से बजट उपयोग और खर्च का सारांश।
- लाभार्थी रिपोर्ट (Beneficiary Report) — अलग-अलग योजनाओं के लाभार्थियों की जानकारी।
- योजना और प्रगति रिपोर्ट — मंजूर काम, उनकी लागत और प्रगति की स्थिति।
ये सारी जानकारी पोर्टल के Reports सेक्शन में मिलती है। आपको सिर्फ अपना राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत चुननी होती है। कोई फीस नहीं लगती, कोई OTP नहीं आता, और कोई भी आपकी निजी जानकारी नहीं मांगता। अगर कोई वेबसाइट eGramSwaraj की रिपोर्ट दिखाने के बदले पैसे मांगे, तो समझ जाइए कि वह फर्जी है।
eGramSwaraj Login कैसे करें? (अधिकारियों के लिए)
लॉगिन सिर्फ अधिकृत पंचायत अधिकारियों के लिए है। आम नागरिकों को रिपोर्ट देखने के लिए लॉगिन करने की जरूरत नहीं है। अगर आप पंचायत सचिव, डेटा एंट्री ऑपरेटर या लेखाकार हैं और आपको लॉगिन करना है, तो प्रक्रिया इस प्रकार है:
स्टेप 1: अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउजर में आधिकारिक वेबसाइट egramswaraj.gov.in खोलें। ध्यान रखें कि सही पता .gov.in से खत्म हो, क्योंकि इसी नाम से मिलती-जुलती कई निजी वेबसाइटें भी हैं।
स्टेप 2: होमपेज पर ऊपर दिए गए Login बटन पर क्लिक करें। आपके सामने तीन विकल्प आएंगे — Data Entry, Accountant और Administrator। अपनी भूमिका के अनुसार सही विकल्प चुनें।
स्टेप 3: लॉगिन पेज पर अपना User ID, Password और Captcha Code ध्यान से भरें। कैप्चा गलत भरने पर लॉगिन नहीं होगा, इसलिए अक्षर और अंक ध्यान से देखें।
स्टेप 4: Login बटन पर क्लिक करें। सही जानकारी भरने पर आपका डैशबोर्ड खुल जाएगा, जहां से आप पंचायत की वित्तीय रिपोर्ट, वाउचर, भुगतान स्थिति और डिजिटल लेखा-जोखा देख और अपडेट कर सकते हैं।
स्टेप 5: काम खत्म होने के बाद हमेशा Logout पर क्लिक करें, ताकि कोई और आपके खाते का गलत इस्तेमाल न कर सके। सार्वजनिक कंप्यूटर या साइबर कैफे से लॉगिन करने पर यह और भी जरूरी हो जाता है।
लॉगिन ID और पासवर्ड पंचायत को राज्य एजेंसी देती है। अगर आप अधिकारी हैं और आपका पासवर्ड काम नहीं कर रहा है या ID भूल गए हैं, तो अपने जिला पंचायत कार्यालय या राज्य की नोडल एजेंसी से संपर्क करें। पोर्टल पर आम नागरिकों के लिए खुद से रजिस्टर करने का विकल्प नहीं है।
भुगतान की स्थिति (Payment Status) कैसे देखें?
यह पोर्टल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला फीचर है। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपकी पंचायत में किसी काम का भुगतान हुआ या नहीं, किसे कितना पैसा मिला, तो ये स्टेप फॉलो करें:
स्टेप 1: ब्राउजर में egramswaraj.gov.in खोलें।
स्टेप 2: मुख्य मेनू में Accounting पर जाएं और All India Report पर क्लिक करें।
स्टेप 3: State wise Expenditure Report चुनें।
स्टेप 4: पहले वित्त वर्ष चुनें — जैसे 2026-2027। याद रखें, वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च तक चलता है, इसलिए अप्रैल 2026 से मार्च 2027 का साल वित्त वर्ष 2026-27 कहलाता है।
स्टेप 5: अब क्रम से अपना राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत चुनें।
स्टेप 6: रिपोर्ट खुल जाएगी। इसमें आपको फंड का स्रोत (जैसे 15th Finance Commission, 16th Finance Commission, MGNREGA या राज्य योजना), आवंटित राशि, खर्च की गई राशि और हर भुगतान का वाउचर विवरण दिखेगा। किसी वाउचर पर क्लिक करके उसका पूरा विवरण और PFMS स्थिति भी देखी जा सकती है।
रिपोर्ट पढ़ते समय दो बातों पर ध्यान दें। पहली, आवंटित राशि और खर्च राशि का अंतर — अगर पैसा आया लेकिन खर्च नहीं हुआ, तो वह अनस्पेंट बैलेंस के रूप में दिखेगा। दूसरी, भुगतान की तारीख और वाउचर नंबर — ये दोनों जानकारी शिकायत या सवाल पूछते समय काम आती है।
ग्राम पंचायत वर्क रिपोर्ट कैसे देखें?
वर्क रिपोर्ट से पता चलता है कि आपकी पंचायत में कौन से काम मंजूर हुए, कौन से पूरे हुए और कौन से अभी चल रहे हैं। इसे देखने की प्रक्रिया भुगतान रिपोर्ट जैसी ही है:
स्टेप 1: egramswaraj.gov.in खोलें और Reports सेक्शन में जाएं।
स्टेप 2: Planning and Progress Report या Approved Activities वाला विकल्प चुनें।
स्टेप 3: वित्त वर्ष चुनें। पिछले सालों की रिपोर्ट देखने के लिए पुराना वित्त वर्ष चुन सकते हैं — इससे यह पता चलता है कि काम समय पर पूरे हुए या सालों से अटके हैं।
स्टेप 4: राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत चुनें।
स्टेप 5: रिपोर्ट में मंजूर कामों की सूची, हर काम की अनुमानित लागत, अब तक का खर्च और काम की स्थिति (शुरू नहीं हुआ, चल रहा है, पूरा हुआ) दिखाई देगी।
वर्क रिपोर्ट को जियो-टैगिंग रिपोर्ट के साथ मिलाकर देखना सबसे अच्छा तरीका है। जियो-टैगिंग रिपोर्ट में पूरे हुए काम की GPS लोकेशन वाली असली तस्वीर होती है। अगर कोई सड़क रिपोर्ट में पूरी दिख रही है, तो उसकी तस्वीर भी होनी चाहिए। अगर तस्वीर नहीं है या तस्वीर में कुछ और दिख रहा है, तो यह सवाल पूछने लायक बात है।
Beneficiary Report कैसे देखें?
अगर आप जानना चाहते हैं कि किसी योजना के लाभार्थी कौन हैं, तो पोर्टल पर Beneficiary Report का विकल्प है। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:
स्टेप 1: egramswaraj.gov.in के होमपेज पर Reports सेक्शन में जाएं और Sponsored Schemes Data के तहत Beneficiary पर क्लिक करें।
स्टेप 2: Beneficiary Data Integration (Existing Approach) के तहत Beneficiary Report चुनें।
स्टेप 3: Panchayat Wise या Land Region Wise में से उपयुक्त विकल्प चुनें।
स्टेप 4: Scheme Name चुनें — जैसे Pradhan Mantri Awas Yojana-Gramin, PM-Kisan Samman Nidhi, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना या जल जीवन मिशन। इसके बाद Plan Year और State Name चुनें।
स्टेप 5: कैप्चा कोड भरें और Get Report पर क्लिक करें। चुनी गई योजना, साल और राज्य के लाभार्थियों की रिपोर्ट खुल जाएगी।
लाभार्थी रिपोर्ट उन परिवारों के लिए खास तौर पर उपयोगी है जो यह जांचना चाहते हैं कि उनका नाम किसी योजना की सूची में है या नहीं। अगर आपका नाम सूची में होना चाहिए लेकिन नहीं है, तो पहले पंचायत सचिव से बात करें और फिर ग्राम सभा में मुद्दा उठाएं।
पंचायत का पैसा कहां से आता है?
रिपोर्ट पढ़ते समय यह समझना जरूरी है कि पंचायत का पैसा किन स्रोतों से आता है। मुख्य स्रोत ये हैं:
- वित्त आयोग अनुदान (Finance Commission Grants) — केंद्र सरकार से मिलने वाला अनुदान। 16वें वित्त आयोग के तहत 2026-27 से 2030-31 के बीच ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4,35,236 करोड़ रुपये की सिफारिश की गई है। इसमें बेसिक ग्रांट (80 प्रतिशत) और परफॉर्मेंस ग्रांट (20 प्रतिशत) शामिल हैं।
- केंद्र प्रायोजित योजनाएं — MGNREGA, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G), स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का पैसा।
- राज्य वित्त आयोग अनुदान — राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला अनुदान।
- स्वयं के स्रोत (Own Source Revenue) — स्थानीय कर, शुल्क, पंचायत की संपत्ति से किराया और इसी तरह की आय।
रिपोर्ट में हर काम के साथ उसका फंड स्रोत लिखा होता है। बेसिक ग्रांट का एक हिस्सा बिना शर्त (untied) होता है, जिसे पंचायत अपनी जरूरत के हिसाब से खर्च कर सकती है, जबकि बंधा हुआ (tied) हिस्सा सिर्फ तय कामों — जैसे स्वच्छता और पेयजल — पर खर्च होना चाहिए। अगर आप रिपोर्ट में देखें कि tied फंड किसी और काम पर खर्च हुआ है, तो यह गलत है और सवाल उठाया जा सकता है।
eGramSwaraj Mobile App और Meri Panchayat App
पोर्टल की जानकारी सिर्फ कंप्यूटर पर ही नहीं, मोबाइल पर भी मिलती है। पंचायती राज मंत्रालय ने eGram Swaraj नाम का आधिकारिक ऐप Google Play Store पर जारी किया है। यह ऐप अप्रैल 2020 से Play Store पर है और इसे मंत्रालय ने ही प्रकाशित किया है। ऐप से पंचायत प्रोफाइल, फंड आवंटन, खर्च रिपोर्ट और जियो-टैग वाले कामों की स्थिति देखी जा सकती है।
इसके अलावा मंत्रालय का एक और आधिकारिक ऐप है — Meri Panchayat। यह ऐप राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने बनाया है और यह 80 करोड़ ग्रामीण नागरिकों, पंचायत पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों के लिए एकीकृत मोबाइल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है। यह ऐप eGram Swaraj, GPDP, AuditOnline, MGNREGA और Vibrant Gram Sabha जैसे कई पोर्टलों से जुड़ा है। अक्टूबर 2026 में इस ऐप का नया अपडेट भी जारी हुआ था।
ऐप डाउनलोड करते समय एक बात का खास ध्यान रखें — सिर्फ वही ऐप डाउनलोड करें जिसके प्रकाशक (publisher) का नाम Ministry of Panchayati Raj हो। इसी नाम से कई नकली ऐप भी हो सकते हैं। अगर कोई ऐप या वेबसाइट पैसे मांगती है या आपकी निजी जानकारी जैसे बैंक डिटेल मांगती है, तो वह सरकारी नहीं है।
फर्जी वेबसाइटों और ऐप से कैसे बचें?
eGramSwaraj के नाम पर कई निजी वेबसाइटें भी चल रही हैं, जिनके पते egramswaraj.com या egramswaraj.in जैसे हैं। ये वेबसाइटें असली पोर्टल नहीं हैं — ये सिर्फ जानकारी देने वाली निजी साइटें हैं। असली सरकारी पोर्टल का पता सिर्फ egramswaraj.gov.in है। सरकारी वेबसाइट का पता हमेशा .gov.in या .nic.in से खत्म होता है।
कुछ जरूरी सावधानियां:
- कभी भी किसी निजी साइट या ऐप पर अपना यूजर ID, पासवर्ड, बैंक खाता नंबर या OTP साझा न करें।
- रिपोर्ट देखने के लिए कोई फीस नहीं लगती — पैसे मांगने वाली हर साइट या व्यक्ति फर्जी है।
- APK फाइलें अनजान वेबसाइटों से डाउनलोड न करें — ऐप सिर्फ Google Play Store से ही डाउनलोड करें।
- किसी एजेंट को पंचायत रिपोर्ट निकलवाने के पैसे न दें — यह काम आप खुद दो मिनट में मुफ्त कर सकते हैं।
रिपोर्ट में गलती दिखे तो क्या करें?
ऑनलाइन रिपोर्ट सिर्फ वही दिखाती है जो पंचायत ने पोर्टल पर दर्ज किया है। अगर रिपोर्ट और गांव की असली हालत में फर्क दिखे, तो घबराएं नहीं — नीचे दिए गए कदम क्रम से उठाएं:
पहला कदम — जमीन पर जांच करें: अगर कोई सड़क रिपोर्ट में पूरी दिख रही है, तो जाकर देखें कि वह सच में बनी है या नहीं। तारीख और लोकेशन के साथ फोटो लें। काम का नाम, कोड और रिपोर्ट में दिख रही राशि नोट कर लें।
दूसरा कदम — पंचायत से बात करें: पहले सरपंच या पंचायत सचिव से शांति से बात करें। कई गलतियां सिर्फ डेटा एंट्री की भूल होती हैं, जैसे गलत राशि या गलत काम का नाम, जो बताने पर जल्दी ठीक हो जाती हैं।
तीसरा कदम — ग्राम सभा में उठाएं: ग्राम सभा गांव के सभी वयस्क नागरिकों की सभा है, जहां पंचायत को अपनी योजना और हिसाब रखना होता है। अपनी रिपोर्ट की कॉपी लेकर जाएं और सवाल पूछें — काम क्यों देर से पूरा हुआ, खर्च अनुमान से ज्यादा क्यों हुआ, सामग्री किससे और किस भाव पर खरीदी गई।
चौथा कदम — लिखित शिकायत: अगर स्थानीय स्तर पर बात नहीं बनती, तो खंड विकास अधिकारी (BDO) या जिला पंचायत अधिकारी को लिखित शिकायत दें। MGNREGA से जुड़े मामलों के लिए अलग से शिकायत व्यवस्था और हेल्पलाइन भी है।
पांचवां कदम — RTI और ऑनलाइन शिकायत: सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आप मस्टर रोल, बिल, माप पुस्तिका और प्रस्तावों की प्रमाणित कॉपी मांग सकते हैं। पंचायत को तय समय में जवाब देना होता है। इसके अलावा केंद्र सरकार के सार्वजनिक शिकायत पोर्टल (CPGRAMS) और राज्य के शिकायत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
हर शिकायत की कॉपी और पावती संख्या संभालकर रखें। शिकायत करते समय तथ्यों पर टिके रहें — काम का नाम, तारीख, राशि और फोटो ही आपकी सबसे मजबूत दलील हैं।
पंचायत की अन्य योजनाओं से जुड़ी जानकारी
eGramSwaraj अकेला पोर्टल नहीं है — गांव के विकास से जुड़ी कई योजनाओं की जानकारी अलग-अलग सरकारी पोर्टलों पर मिलती है। मसलन, रोजगार और मजदूरी का सबसे विस्तृत ब्योरा MGNREGA पोर्टल पर मिलता है, जहां जॉब कार्ड, मस्टर रोल और मजदूरी भुगतान की स्थिति देखी जा सकती है। आवास योजना के लाभार्थी PMAY-G पोर्टल पर अपनी किस्त की स्थिति जांच सकते हैं। मध्य प्रदेश के पाठकों के लिए हमारे पोर्टल पर Panchayat Darpan MP 2026 Portal Guide भी उपलब्ध है, जिससे पंचायतों के प्रदर्शन और पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स के बारे में जानकारी मिलती है। शहरी आवास योजना की सूची के लिए PMAY Urban List 2026 देखें, और मनरेगा जॉब कार्ड से जुड़ी जानकारी के लिए VB-G RAM G 2026 MGNREGA Job Card वाला लेख पढ़ें।
इन सब पोर्टलों के बीच eGramSwaraj की खासियत यह है कि यह पंचायत की पूरी तस्वीर एक जगह देता है — योजना, पैसा, भुगतान और प्रगति, सब कुछ। इसलिए किसी भी गांव की जानकारी लेनी हो, तो शुरुआत यहीं से करनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) – eGramSwaraj Portal
1. क्या eGramSwaraj पर रिपोर्ट देखने के लिए लॉगिन जरूरी है?
नहीं। आम नागरिक बिना लॉगिन, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना फीस के पंचायत प्रोफाइल, फंड रिपोर्ट, भुगतान स्थिति, जियो-टैगिंग रिपोर्ट और लाभार्थी रिपोर्ट देख सकते हैं। लॉगिन सिर्फ अधिकृत पंचायत अधिकारियों के लिए है।
2. eGramSwaraj Portal की आधिकारिक वेबसाइट कौन सी है?
आधिकारिक वेबसाइट egramswaraj.gov.in है। यह पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार का पोर्टल है। egramswaraj.com या egramswaraj.in जैसे पते वाली निजी वेबसाइटें सरकारी पोर्टल नहीं हैं।
3. eGramSwaraj Login के लिए कौन से विकल्प मिलते हैं?
लॉगिन पेज पर तीन भूमिकाएं मिलती हैं — Data Entry, Accountant और Administrator। अपनी भूमिका चुनकर User ID, Password और Captcha भरकर लॉगिन किया जाता है।
4. अपनी ग्राम पंचायत का भुगतान स्टेटस कैसे चेक करें?
egramswaraj.gov.in खोलें, Accounting और All India Report पर जाएं, State wise Expenditure Report चुनें, वित्त वर्ष, राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत चुनें। पूरी भुगतान रिपोर्ट वाउचर विवरण के साथ खुल जाएगी।
5. क्या eGramSwaraj का मोबाइल ऐप भी है?
हां। eGram Swaraj ऐप Google Play Store पर उपलब्ध है, जिसे पंचायती राज मंत्रालय ने प्रकाशित किया है। इसके अलावा मंत्रालय का Meri Panchayat ऐप भी है, जो eGram Swaraj, GPDP, AuditOnline और MGNREGA से जुड़ा है।
6. ग्राम पंचायत वर्क रिपोर्ट में क्या-क्या दिखता है?
वर्क रिपोर्ट में मंजूर कामों की सूची, हर काम की अनुमानित लागत, अब तक का खर्च, काम की स्थिति और जियो-टैग वाली तस्वीरें दिखती हैं। इससे पता चलता है कि कौन सा काम पूरा हुआ और कौन सा अभी चल रहा है।
7. eGramSwaraj पर कौन से वित्त वर्ष की रिपोर्ट देख सकते हैं?
पोर्टल पर वित्त वर्ष के हिसाब से रिपोर्ट मिलती है। वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च तक चलता है, जैसे वित्त वर्ष 2026-27 का मतलब अप्रैल 2026 से मार्च 2027 है। आप पुराने वित्त वर्षों की रिपोर्ट भी देख सकते हैं।
8. अगर पोर्टल पर दिख रही जानकारी गलत लगे तो क्या करें?
पहले जमीन पर जाकर जांच करें और फोटो के साथ सबूत नोट करें। फिर सरपंच या पंचायत सचिव से बात करें, ग्राम सभा में मुद्दा उठाएं, और जरूरत पड़े तो BDO या जिला पंचायत अधिकारी को लिखित शिकायत दें। RTI के तहत प्रमाणित रिकॉर्ड भी मांगे जा सकते हैं।
9. eGramSwaraj पर रिपोर्ट देखने के लिए कोई फीस लगती है?
नहीं, यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है। अगर कोई वेबसाइट, ऐप या व्यक्ति रिपोर्ट दिखाने के बदले पैसे मांगता है, तो वह फर्जी है।
निष्कर्ष
eGramSwaraj ने गांव के शासन को आम आदमी की पहुंच में ला दिया है। 24 अप्रैल 2020 को शुरू हुआ यह पोर्टल आज देश की लगभग सभी ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है — वित्त वर्ष 2025-26 में 98.65 प्रतिशत पंचायतों ने अपनी विकास योजना इस पर अपलोड की और 57,337 करोड़ रुपये का भुगतान इसी व्यवस्था से हुआ। 16वें वित्त आयोग के तहत आने वाले पांच सालों में पंचायतों को 4,35,236 करोड़ रुपये मिलने हैं, और हर रुपये का हिसाब इसी पोर्टल पर दिखेगा।
इसलिए अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके गांव का पैसा कहां खर्च हुआ, तो अब पंचायत दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। मोबाइल खोलिए, egramswaraj.gov.in पर जाइए, अपनी पंचायत चुनिए और रिपोर्ट देखिए। और अगर रिपोर्ट में कुछ गलत दिखे, तो चुप मत रहिए — ग्राम सभा में सवाल पूछिए, क्योंकि जागरूक नागरिक ही गांव के विकास की सबसे बड़ी ताकत हैं।
आधिकारिक लिंक: eGramSwaraj Portal – egramswaraj.gov.in | पंचायती राज मंत्रालय – panchayat.gov.in
Last Updated: 8 November 2026
अस्वीकरण: GramSuvidha एक निजी सूचना पोर्टल (सरकारी वेबसाइट नहीं) है। यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी आधिकारिक काम के लिए कृपया egramswaraj.gov.in या संबंधित सरकारी कार्यालय से जानकारी की पुष्टि करें।





