गांव में काम की गारंटी को लेकर सबसे बड़ा सवाल आज यही है — VB-G RAM G 2026 असल में है क्या, और जो जॉब कार्ड आपकी जेब में पड़ा है, उसका अब क्या होगा? पिछले बीस साल से मनरेगा जिस तरह चल रहा था, अब वह ढांचा पूरी तरह बदल चुका है। नया कानून लागू हो चुका है, कामों की नई लिस्ट आ चुकी है, और आंकड़े भी सामने आ गए हैं।
लेकिन खबरों के शोर में सबसे जरूरी बात अक्सर दब जाती है — आपको खुद क्या करना है? क्या पुराना जॉब कार्ड अब भी चलेगा? नया कार्ड कब बनेगा? काम कैसे मांगा जाएगा? मजदूरी कब और कितनी मिलेगी? इस आर्टिकल में हम इन्हीं सवालों के जवाब देंगे — सरकारी घोषणाओं, अक्टूबर 2026 की नई अधिसूचना और ताज़ा फैक्टशीट के आधार पर, बिना किसी अफवाह के।
इस गाइड में आप जानेंगे: VB-G RAM G का पूरा नाम और मतलब • मनरेगा से क्या-क्या बदला • आपके मौजूदा जॉब कार्ड का भविष्य • 6 अक्टूबर 2026 को नोटिफाई हुए 375 काम • 60:40 फंडिंग का मतलब • पात्रता और काम मांगने के स्टेप्स • ताज़ा आंकड़े • और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल।
VB-G RAM G 2026 क्या है? पूरा नाम और मतलब
VB-G RAM G का पूरा नाम है — Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)। यह केंद्र सरकार का नया ग्रामीण रोजगार ढांचा है, जो Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act, 2025 के तहत बना है। यह कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हो गया और उसी तारीख से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 निरस्त (repealed) हो गया।
सरल भाषा में कहें तो — गांव के हर उस परिवार को, जिसके व्यस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम (unskilled manual work) करने के लिए तैयार हों, अब हर वित्तीय वर्ष में 125 दिन के वेतन-रोजगार की कानूनी गारंटी मिलती है। मनरेगा के तहत यह गारंटी 100 दिन की थी। यानी गारंटी वाले दिनों में 25 दिन की बढ़ोतरी हुई है।
इस योजना का मकसद सिर्फ रोजगार देना नहीं है। सरकार का कहना है कि रोजगार के साथ-साथ टिकाऊ ग्रामीण संपत्ति (durable rural assets) भी बनाई जाएगी — पानी की सुरक्षा, गांव की बुनियादी ढांचा-सुविधाएं, आजीविका से जुड़ी इमारतें और चरम मौसमी घटनाओं से बचाव। इसे सरकार Viksit Bharat @2047 के विजन से जोड़कर देख रही है।
MGNREGA बनाम VB-G RAM G — क्या-क्या बदला?
| बिंदु | MGNREGA (2005–2026) | VB-G RAM G (1 जुलाई 2026 से) |
|---|---|---|
| गारंटी वाले दिन | 100 दिन प्रति ग्रामीण परिवार प्रति वर्ष | 125 दिन प्रति ग्रामीण परिवार प्रति वर्ष |
| अनुमत कामों की संख्या | 266 काम | 375 काम (6 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना; 41% बढ़ोतरी) |
| कामों का फोकस | मुख्यतः जल संरक्षण, सूखा-रोकथाम, सिंचाई, भूमि विकास | चार स्तंभ: जल सुरक्षा, बुनियादी ग्रामीण ढांचा, आजीविका ढांचा, आपदा-तैयारी |
| फंडिंग पैटर्न | केंद्र सरकार अधिकांश खर्च उठाती थी | 60:40 केंद्र-राज्य अनुपात (अधिकतर राज्यों में) |
| योजना की योजना-प्रणाली | मांग-आधारित (demand-driven) | Viksit Gram Panchayat Plans — ग्राम सभा से अनुमोदित स्थानीय जरूरतों पर आधारित |
| डिजिटल निगरानी | चरणबद्ध डिजिटल प्रणालियां | पहले दिन से डिजिटल — e-KYC, बायोमेट्रिक/फेस ऑथेंटिकेशन, जियो-टैगिंग, e-MB |
| वेज पेमेंट | DBT के माध्यम से | DBT के माध्यम से (पहले 3 महीनों में 3.76 करोड़ पेमेंट) |
| कृषि सीजन में रोक | ऐसा प्रावधान नहीं था | राज्य साल में 60 दिन तक काम रोक सकते हैं (चरम कृषि सीजन में) |
आपके MGNREGA जॉब कार्ड का क्या होगा? — ट्रांजिशन की पूरी सच्चाई
यह इस आर्टिकल का सबसे अहम हिस्सा है, क्योंकि यही सवाल गांव-गांव में पूछा जा रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के आधिकारिक बयान (मई 2026) के अनुसार ट्रांजिशन को “सहज और बिना रुकावट” (seamless and disruption-free) रखने का आश्वासन दिया गया है। जानिए क्या तय हुआ है:
- मौजूदा जॉब कार्ड चलते रहेंगे: जिन मजदूरों का e-KYC पूरा हो चुका है, उनके मौजूदा MGNREGA जॉब कार्ड तब तक वैध रहेंगे जब तक नया “Gramin Rozgar Guarantee Card” जारी नहीं हो जाता। यानी पुराना कार्ड फेंकने की जरूरत नहीं है।
- चल रहे काम नहीं रुकेंगे: 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत जो काम चल रहे थे, वे सभी नए ढांचे में जारी रहेंगे। अधूरे सार्वजनिक कामों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाएगी।
- नया रजिस्ट्रेशन खुला है: जिनके पास जॉब कार्ड नहीं है, वे ग्राम पंचायत स्तर पर रजिस्ट्रेशन जारी रख सकते हैं। कुछ राज्यों ने हर ग्राम पंचायत में जॉब कार्ड रजिस्ट्रेशन कैंप भी लगाए हैं।
- e-KYC लंबित होने पर भी काम से इनकार नहीं: मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि e-KYC लंबित होने की वजह से किसी मजदूर को रोजगार से इनकार नहीं किया जाएगा।
- राज्यों की अपनी योजनाएं: हर राज्य सरकार को एक्ट लागू होने के छह महीने के भीतर (यानी 1 जनवरी 2027 तक) अपनी राज्य-स्तरीय योजना नोटिफाई करनी है। तब तक अंतरिम व्यवस्था के तहत काम चलता रहेगा।
आपको क्या करना है? अगर आपके पास पुराना जॉब कार्ड है और e-KYC हो चुका है — तो फिलहाल कुछ करने की जरूरत नहीं, कार्ड वैध है। अगर e-KYC नहीं हुआ है, तो अपनी ग्राम पंचायत जाकर उसे पूरा कराएं। नया रजिस्ट्रेशन कराना है तो ग्राम पंचायत या रोजगार सेवक से संपर्क करें। नया Gramin Rozgar Guarantee Card जारी होने की प्रक्रिया और नियम अभी राज्यों के साथ परामर्श में अंतिम रूप ले रहे हैं — जैसे ही नोटिफाई होंगे, हम यह आर्टिकल अपडेट करेंगे।
6 अक्टूबर 2026: 375 कामों की नई लिस्ट — 41% बढ़ोतरी
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 6 अक्टूबर 2026 को VB-G RAM G के तहत अनुमत कामों की विस्तारित अनुसूची (Schedule) नोटिफाई की। अब 375 काम अनुमत हैं — पुराने ढांचे के 266 कामों से 41% ज्यादा। इन कामों को चार श्रेणियों में बांटा गया है:
- कृषि और संबद्ध गतिविधियां — 181 काम (सबसे बड़ा हिस्सा): इनमें 52 व्यक्तिगत लाभार्थी (individual-beneficiary) काम शामिल हैं — जैसे भूमि विकास, बागवानी, पशु-आश्रय (livestock shelters) और खेती से जुड़ी उत्पादक संपत्तियां।
- अंत्योदय और कमजोर परिवार — 107 काम: इनमें 68 व्यक्तिगत लाभार्थी काम हैं — आवास-संबंधी सहायता, स्वच्छता, ऊर्जा, सिंचाई, बागान और पशुधन संपत्तियां।
- आपदा-तैयारी — 38 काम (पहली बार अलग श्रेणी): बाढ़ राहत आश्रय, तटबंध सुदृढ़ीकरण, बाढ़ सुरक्षा, आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों और सामुदायिक संपत्तियों की मरम्मत, वन-अग्नि प्रबंधन।
- महिला-केंद्रित — 36 काम और युवा-केंद्रित — 36 काम: महिला समूहों का ढांचा, स्वयं सहायता समूह (SHG) वर्कशेड, युवा केंद्र, कौशल विकास और उद्यम-संबंधी सुविधाएं।
कामों के कुछ ठोस उदाहरण जो नई लिस्ट में हैं: सोलर स्ट्रीट लाइट, Common Service Centre (CSC), सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं और प्रयोगशालाएं, ग्रामीण पुस्तकालय, पशु-चिकित्सा और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, Jal Jeevan Mission की जल-आपूर्ति संरचनाओं की मरम्मत, चेक डैम, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, कृत्रिम ग्लेशियर (artificial glaciers), नदी-नालों का पुनरुद्धार, वर्षा-जल संचयन, मिनी आटा मिल, डेयरी ढांचा, मशरूम शेड, मत्स्य-पालन संरचनाएं, बाजार प्रांगण, कोल्ड स्टोरेज और एग्रो-प्रोसेसिंग इकाइयां।
एक अहम बदलाव: आजीविका-संबंधी काम अब कुल लिस्ट का 26% हैं, जबकि पुराने ढांचे में यह हिस्सा सिर्फ 1.1% था। यानी अब रोजगार के साथ ऐसी संपत्तियां बनेंगी जिनसे गांव की आमदनी बढ़े — जैसे प्रसंस्करण इकाइयां, भंडारण और बाजार तक पहुंच।
कामों की योजना कौन बनाएगा?
काम Viksit Gram Panchayat Plans (VGPPs) के जरिए तय होंगे — ये गांव-स्तर की एकीकृत विकास योजनाएं हैं, जो स्थानीय जरूरतों के आधार पर बनेंगी और ग्राम सभा से अनुमोदित होंगी। डिजिटल निगरानी Viksit Bharat National Rural Infrastructure Stack के माध्यम से होगी — जियो-टैगिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और दूसरी योजनाओं के साथ समन्वय (convergence) के साथ।
फंडिंग में बदलाव: 60:40 का मतलब समझिए
नए कानून में फंडिंग पैटर्न भी बदला है। अब अधिकतर राज्यों में केंद्र और राज्य 60:40 के अनुपात में खर्च उठाएंगे। केंद्र राज्य-वार normative allocations (मानक आवंटन) तय करेगा — और अगर कोई राज्य उससे ज्यादा खर्च करता है, तो अतिरिक्त खर्च राज्य को खुद उठाना होगा।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अंतरिम आवंटन के रूप में ₹93,841 करोड़ दिए हैं, जिसमें पहली किस्त के तौर पर ₹25,880 करोड़ का Mother Sanction जारी किया गया है (29 सितंबर 2026 की सरकारी फैक्टशीट के अनुसार)।
एक और नया प्रावधान: राज्य साल में अधिकतम 60 दिन तक काम रोक सकते हैं — चरम कृषि सीजन (बुवाई-कटाई) के दौरान, ताकि खेतों में मजदूरों की उपलब्धता बनी रहे। इस प्रावधान पर मजदूर संगठनों ने आपत्ति भी जताई है — उनका कहना है कि इससे मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत घट सकती है।
पात्रता: कौन काम मांग सकता है?
- ग्रामीण क्षेत्र का स्थायी निवासी परिवार (ग्राम पंचायत क्षेत्र में)।
- परिवार का कोई भी 18 वर्ष या अधिक आयु का सदस्य काम के लिए आवेदन कर सकता है।
- अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए तैयार होना जरूरी है — कोई तकनीकी योग्यता या पढ़ाई की शर्त नहीं।
- रजिस्ट्रेशन परिवार के आधार पर होता है — प्रति परिवार प्रति वर्ष 125 दिन की गारंटी।
- वयस्क सदस्यों का Aadhaar-लिंक्ड e-KYC या बायोमेट्रिक/फेस ऑथेंटिकेशन जरूरी है (लंबित e-KYC पर काम से इनकार नहीं होगा — मंत्रालय का आश्वासन)।
- पुरुषों और महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन। SC, ST, PVTG और महिला-प्रधान परिवारों के लिए विशेष रजिस्ट्रेशन अभियान चलाए जाते हैं।
काम कैसे मांगें? — स्टेप-बाय-स्टेप
- ग्राम पंचायत जाएं: काम की मांग ग्राम पंचायत में दर्ज कराएं — लिखित आवेदन दें और पावती (receipt) जरूर लें।
- रजिस्ट्रेशन/कार्ड दिखाएं: मौजूदा जॉब कार्ड (e-KYC सत्यापित) दिखाएं; नया रजिस्ट्रेशन ग्राम पंचायत स्तर पर कराएं।
- काम का आवंटन: मांग के अनुसार ग्राम पंचायत VGPP में स्वीकृत कामों में से काम आवंटित करेगी।
- हाजिरी और माप: डिजिटल हाजिरी (बायोमेट्रिक/फेस ऑथेंटिकेशन), जियो-टैगिंग और इलेक्ट्रॉनिक माप-पुस्तिका (e-MB) के जरिए काम दर्ज होगा।
- वेतन DBT से: मजदूरी सीधे आपके बैंक/डाकघर खाते में Direct Benefit Transfer (DBT) के जरिए आएगी। औसत दैनिक वेतन फैक्टशीट के अनुसार ₹283.24 है (राज्य-वार अधिसूचित दरें अलग-अलग हो सकती हैं — अपनी ग्राम पंचायत से अपने राज्य की दर जरूर पूछें)।
स्टेटस कहां चेक करें? काम की मांग, आवंटन और पेमेंट की जानकारी के लिए अपनी ग्राम पंचायत/रोजगार सेवक से संपर्क करें और ग्रामीण विकास मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट rural.nic.in पर योजना की आधिकारिक जानकारी देखें। किसी भी बिचौलिए को पैसे न दें — रजिस्ट्रेशन और जॉब कार्ड की प्रक्रिया निःशुल्क है।
ताज़ा आंकड़े: योजना के पहले 3 महीने (29 सितंबर 2026 फैक्टशीट)
| आंकड़ा | विवरण (24 सितंबर 2026 तक) |
|---|---|
| सक्रिय मजदूर रजिस्ट्रेशन | 10.88 करोड़ |
| सृजित व्यक्ति-दिवस (person-days) | 31.69 करोड़ |
| महिला कार्यबल | 61.65% |
| औसत दैनिक वेतन | ₹283.24 |
| DBT पेमेंट (बैंक खातों में) | 3.76 करोड़ |
| चालू काम | 97.17 लाख (2.31 लाख ग्राम पंचायतों में) |
| वित्त वर्ष 2026-27 आवंटन | ₹93,841 करोड़ (पहली किस्त ₹25,880 करोड़) |
विवाद और सवाल — दोनों पक्ष जानिए
किसी भी बड़ी नीति की तरह इस बदलाव पर भी बहस हो रही है। विपक्ष और मजदूर संगठनों ने तीन मुख्य आपत्तियां दर्ज की हैं: (1) योजना के नाम से “महात्मा गांधी” का नाम हटाना, (2) नया 60:40 फंडिंग पैटर्न — गरीब राज्यों पर बोझ बढ़ने की आशंका, और (3) normative allocation की व्यवस्था और 60 दिन तक काम रोकने का प्रावधान। कई जगहों पर “मनरेगा बचाओ” अभियान के तहत प्रदर्शन भी हुए हैं।
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि पुराने ढांचे में निगरानी की कमियां, असमान संपत्ति-गुणवत्ता और भुगतान में देरी जैसी दिक्कतें थीं — नया कानून इन्हीं को ठीक करने, पहले दिन से डिजिटल सिस्टम चलाने और रोजगार को गांव के विकास से जोड़ने के लिए लाया गया है। फैसला आपके हाथ में है, लेकिन तथ्य दोनों तरफ के जानना जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या मेरा पुराना MGNREGA जॉब कार्ड अब भी चलेगा?
हां। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, जिन कार्डों का e-KYC पूरा हो चुका है, वे तब तक वैध रहेंगे जब तक नया “Gramin Rozgar Guarantee Card” जारी नहीं हो जाता। नया रजिस्ट्रेशन ग्राम पंचायत में जारी है।
2. VB-G RAM G 2026 में कितने दिन काम की गारंटी है?
हर ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिन के वेतन-रोजगार की कानूनी गारंटी है — मनरेगा के 100 दिन से 25 दिन ज्यादा।
3. 375 कामों वाली नई लिस्ट कब आई?
6 अक्टूबर 2026 को मंत्रालय ने नई अनुसूची नोटिफाई की — 375 अनुमत काम, जो पुराने 266 कामों से 41% ज्यादा हैं। इनमें पहली बार आपदा-तैयारी के 38 काम अलग श्रेणी में रखे गए हैं।
4. मजदूरी कितनी मिलेगी और कब?
सरकारी फैक्टशीट (24 सितंबर 2026 तक) के अनुसार औसत दैनिक वेतन ₹283.24 है और 3.76 करोड़ DBT पेमेंट हो चुके हैं। वेतन सीधे बैंक/डाकघर खाते में आता है। राज्य-वार अधिसूचित दरें अलग हो सकती हैं — अपनी ग्राम पंचायत से पूछें।
5. क्या राज्य सच में 60 दिन तक काम रोक सकते हैं?
हां, नया कानून राज्यों को चरम कृषि सीजन में साल में अधिकतम 60 दिन तक काम रोकने की अनुमति देता है, ताकि खेतों में मजदूर मिल सकें। इस प्रावधान की मजदूर संगठनों ने आलोचना की है।
6. काम की मांग कहां और कैसे दर्ज कराएं?
अपनी ग्राम पंचायत में लिखित आवेदन देकर काम की मांग दर्ज कराएं और पावती लें। e-KYC लंबित होने पर भी रोजगार से इनकार नहीं किया जाएगा — यह मंत्रालय का आधिकारिक आश्वासन है।
7. अगर तय समय में काम या वेतन न मिले तो?
योजना से जुड़ी गाइड्स के अनुसार एक्ट में बेरोजगारी भत्ते (unemployment allowance) का भी प्रावधान बताया गया है, लेकिन इसके विस्तृत नियम अभी राज्यों के साथ परामर्श में अंतिम रूप ले रहे हैं। सटीक नियम नोटिफाई होने पर हम यह आर्टिकल अपडेट करेंगे — फिलहाल अपनी ग्राम पंचायत/जिला कार्यक्रम समन्वयक से शिकायत दर्ज कराएं।
8. VB-G RAM G की आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?
ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट rural.nic.in और अपनी ग्राम पंचायत से आधिकारिक जानकारी लें। योजना से जुड़ी कोई भी “फीस” मांगने वाले बिचौलियों से सावधान रहें।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल एक निजी सूचना पोर्टल (सरकारी वेबसाइट नहीं) द्वारा प्रकाशित शैक्षणिक जानकारी है। योजना के नियम, दरें और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कोई भी कदम उठाने से पहले अपनी ग्राम पंचायत या ग्रामीण विकास मंत्रालय की आधिकारिक अधिसूचना से पुष्टि जरूर करें।





