Updated: 27 October 2026
छठ पूजा 2026: 13 नवंबर (नहाय खाय), 14 नवंबर (खरना), 15 नवंबर (संध्या अर्घ्य) और 16 नवंबर (उषा अर्घ्य)। अपने शहर का सही सूर्यास्त और सूर्योदय समय जानने के लिए मुख्य छठ पूजा लेख देखें: https://gramsuvidha.co.in/chhath-puja-2026-date-vidhi/ – इस लेख में समय-सारणी दोबारा नहीं दी गई है, ताकि गलत या पुराना समय न फैले।
व्रती के लिए नियम: कौन व्रत रखे और तैयारी कैसे करे
- व्रत आमतौर पर परिवार का कोई एक सदस्य संकल्प लेकर रखता है, बाकी परिवार सहयोग करता है।
- तैयारी में घर और रसोई की सफाई, स्नान और साफ वस्त्र शामिल हैं।
- प्रसाद की रसोई अलग रखें और प्रसाद बनाने से पहले हाथ-पैर धोएं।
- कुछ नियम परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए अपने घर के बड़ों या पुरोहित से पुष्टि करें।
कौन पूरा व्रत न रखे और चेतावनी के संकेत
- गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और जिन्हें डॉक्टर ने उपवास से मना किया है, वे पूरा निर्जला व्रत न रखें।
- चक्कर, तेज कमजोरी, सीने में दर्द, सांस फूलना या बार-बार उल्टी जैसे लक्षण दिखें तो व्रत जारी न रखें और तुरंत डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
- जरूरी दवाएं डॉक्टर की सलाह के बिना न छोड़ें।
- यह सामान्य जानकारी है, किसी व्यक्ति की स्थिति का निदान नहीं है।
घाट पर शिष्टाचार और सुरक्षा
- अर्घ्य के समय शोर न करें और दूसरों के स्थान और सूप का सम्मान करें।
- भीड़ में धक्का न दें, कतार में रहें और बच्चों तथा बुजुर्गों का हाथ पकड़कर रखें।
- बच्चों को पानी के पास अकेला न छोड़ें और गहरे पानी में न जाएं।
- फिसलन से बचें, अंधेरे में टॉर्च रखें और पहले से मिलने की जगह तय करें।
- नदी या तालाब में प्लास्टिक और कचरा न फेंकें, अपना कचरा साथ ले जाएं।
पहली बार व्रत रखने वालों की सामान्य गलतियां: चेकलिस्ट
- गलत समय मान लेना – हमेशा अपने शहर का सही समय मुख्य लेख से जांचें, अंदाजे पर न चलें।
- प्रसाद पहले खुद चख लेना – पहले अर्पित करें, फिर प्रसाद लें।
- घाट पर देर से पहुंचना – भीड़ से बचने के लिए समय से पहले पहुंचें।
- सामग्री आखिरी समय पर खरीदना – सूप, फल और पूजा सामग्री 1-2 दिन पहले ले आएं।
- व्रत के दौरान दवा छोड़ देना – जरूरी दवाएं डॉक्टर की सलाह से जारी रखें।
नए प्रश्न (FAQs): व्रत, समय चूकना, घर पर पूजा और घाट सुरक्षा
- कौन व्रत रख सकता है – आमतौर पर स्वस्थ वयस्क संकल्प लेकर व्रत रखते हैं, बच्चे और स्वास्थ्य कारणों वाले लोग आंशिक नियम निभा सकते हैं।
- समय चूक जाए तो क्या करें – घबराएं नहीं, अपने घर के बड़ों या पुरोहित से पूछें, कोई नया नियम खुद न बनाएं।
- घर पर पूजा हो सकती है – घाट न जा सकें तो घर की साफ जगह पर, परंपरा के अनुसार, अर्घ्य की व्यवस्था की जा सकती है।
- घाट पर सुरक्षा – बच्चों और बुजुर्गों को साथ रखें, गहरे पानी से बचें, फिसलन का ध्यान रखें और कचरा न फैलाएं।
छठ पूजा में शुद्धता (शुद्धि) सबसे बड़ा नियम है। चार दिनों तक व्रती का हर काम — नहाना, खाना, पकाना, सोना, बोलना — नियमों से बंधा होता है। एक छोटी सी चूक भी व्रत को खंडित मान लिया जाता है। इसलिए हर व्रती और उसके परिवार को Chhath Puja ke niyam पहले से जान लेने चाहिए। इस लेख में हम चारों दिन के क्या करें और क्या न करें, रसोई और प्रसाद के नियम, तथा स्वास्थ्य-सुरक्षा की जरूरी बातें विस्तार से बता रहे हैं।
छठ पूजा के सामान्य नियम (चारों दिन लागू)
ये नियम पूरे छठ पर्व के दौरान व्रती और उसके परिवार पर लागू होते हैं:
| विषय | क्या करें ✅ | क्या न करें ❌ |
|---|---|---|
| शुद्धता | रोज पवित्र स्नान करें (नदी या गंगाजल) | प्याज, लहसुन, मांसाहार, शराब, तंबाकू बिल्कुल नहीं |
| रसोई | मिट्टी के चूल्हे पर, मिट्टी/बांस के बर्तनों में प्रसाद बनाएं | प्रसाद के लिए गैस, स्टील या एल्युमीनियम के बर्तन नहीं |
| वस्त्र | साफ, धुले सूती वस्त्र पहनें (पीला/केसरिया शुभ) | काले, सिंथेटिक या गंदे कपड़े न पहनें |
| व्यवहार | धीमे बोलें, शांत रहें, प्रार्थना में मन लगाएं | झूठ, क्रोध, चुगली और वाद-विवाद से बचें |
| शयन | जमीन पर चटाई बिछाकर सोएं | गद्दे, तकिया पर सोने से बचें (परंपरा अनुसार) |
| शरीर | प्राकृतिक रहें | बाल-दाढ़ी न कटवाएं, साबुन-तेल का प्रयोग न करें |
| जूते-चप्पल | घाट के पास नंगे पैर चलें | प्रसाद या पूजा स्थल के पास चप्पल न पहनें |
| प्रसाद | प्रसाद सभी में बांटें — मनुष्य और पशु-पक्षी भी | प्रसाद कभी फेंकें नहीं, बर्बाद न करें |
सुनहरा नियम: व्रती को पूर्ण शुद्ध अवस्था में रहना चाहिए। अशुद्ध वस्तु का स्पर्श भी — जाने-अनजाने — व्रत भंग माना जाता है।
पहला दिन — नहाय खाय (13 नवंबर): क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें
- सूर्योदय से पहले उठकर नदी में या गंगाजल से स्नान करें।
- पूरे घर की सफाई करें — गोबर और गंगाजल से घर लीपना शुभ माना जाता है।
- नए मिट्टी के बर्तनों में शुद्ध घी से कद्दू-भात (लौकी, चावल, चना दाल) बनाएं।
- स्नान और पूजा के बाद ही एक बार भोजन करें।
- व्रती पहले खाए, फिर परिवार के सदस्य।
❌ क्या न करें
- स्नान से पहले कुछ न खाएं।
- साबुन, शैंपू या कृत्रिम सफाई उत्पाद न इस्तेमाल करें।
- बाहर का खाना या बासी भोजन न खाएं।
- पुराने/पहले इस्तेमाल किए बर्तन दोबारा न प्रयोग करें।
दूसरा दिन — खरना (14 नवंबर): क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्जला उपवास रखें।
- सुबह पवित्र स्नान करें और पूजा स्थल को शुद्ध करें।
- मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी जलाकर प्रसाद बनाएं — गुड़ की खीर, रोटी।
- सिर्फ सात्विक सामग्री प्रयोग करें — गुड़, चावल, दूध, घी, गेहूं।
- “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
- जरूरतमंदों को भोजन या दान दें।
❌ क्या न करें
- सूर्यास्त से पहले अन्न-जल ग्रहण न करें।
- प्रसाद चखकर न देखें — पहले देवता को अर्पित करें।
- गैस चूल्हे पर प्रसाद न बनाएं (परंपरा अनुसार मिट्टी का चूल्हा)।
- प्रसंस्कृत (पैकेटबंद) सामग्री प्रसाद में न मिलाएं।
याद रखें: खरना की शाम प्रसाद के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है — यह संकल्प का क्षण है।
तीसरा दिन — संध्या अर्घ्य (15 नवंबर): क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें
- सुबह से ठेकुआ, चावल के लड्डू और प्रसाद तैयार करें।
- बांस के सूप में फल, ठेकुआ, नारियल, गन्ना, दीया सजाएं।
- सूर्यास्त से 30-45 मिनट पहले घाट पहुंचें।
- अर्घ्य के समय मौन रखें और ध्यान लगाएं।
- बुजुर्गों और बच्चों की सहायता करें।
- घाट की सफाई का ध्यान रखें — अपना कचरा साथ ले जाएं।
❌ क्या न करें
- अर्घ्य के लिए धातु या प्लास्टिक के बर्तन प्रयोग न करें — बांस/मिट्टी ही शुभ।
- नदी में कचरा या प्लास्टिक न फेंकें।
- अर्घ्य के समय शोर न मचाएं, मोबाइल पर बात न करें।
- सूर्यास्त के बाद घाट पर अकेले गहरे पानी में न जाएं।
- शराब या तंबाकू का सेवन घाट के आसपास बिल्कुल नहीं।
चौथा दिन — उषा अर्घ्य और पारण (16 नवंबर): क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- सूर्योदय से 45 मिनट पहले घाट पहुंचें।
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके उगते सूर्य को अर्घ्य दें।
- पारण में पहले अदरक का पानी या शरबत पिएं, फिर प्रसाद खाएं।
- प्रसाद गरीबों और पड़ोसियों में उदारता से बांटें।
❌ क्या न करें
- उषा अर्घ्य से पहले व्रत न तोड़ें — 36 घंटे पूरे होने दें।
- पारण में एकदम भारी भोजन न करें — हल्के प्रसाद से शुरुआत करें।
- व्रत पूर्ण होने से पहले “व्रत टूट गया” मानकर नियम न छोड़ें — भूल-चूक के लिए क्षमा-याचना का विधान है।
प्रसाद और रसोई के विशेष नियम
- सेंधा नमक: प्रसाद में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक प्रयोग करें।
- शुद्ध घी: प्रसाद सिर्फ शुद्ध घी में बनाएं — वनस्पति घी या तेल नहीं।
- अलग रसोई: छठ के चार दिनों तक प्रसाद की रसोई अलग रखें; उसमें रोज का खाना न बनाएं।
- हाथ-पैर की शुद्धि: प्रसाद बनाने से पहले हाथ-पैर साफ पानी से धोएं।
- सहयोग: गेहूं सुखाने और प्रसाद बनाने में अन्य श्रद्धालुओं की मदद करना पुण्य का काम है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा — जरूरी सावधानियां

किन्हें विशेष सावधानी चाहिए
- गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, मधुमेह/हृदय रोगी: डॉक्टर की सलाह के बिना 36 घंटे का निर्जला व्रत न रखें। स्वास्थ्य सर्वोपरि है।
- बच्चे: बच्चों से पूर्ण व्रत की अपेक्षा न करें — वे आंशिक नियम निभा सकते हैं।
घाट पर सुरक्षा
- गहरे पानी में न जाएं — कमर तक पानी ही पर्याप्त है।
- बच्चों को अकेले पानी के पास न छोड़ें।
- फिसलन वाली जगहों पर सावधान रहें; टॉर्च/मोबाइल लाइट साथ रखें।
- भीड़ में अपने सामान (सूप, प्रसाद) का ध्यान रखें।
पर्यावरण की रक्षा
- नदी-तालाब में प्लास्टिक, पॉलिथीन न फेंकें।
- बचे हुए फूल-पत्ते किनारे एकत्र करके निस्तारित करें।
- कृत्रिम रंगों वाले दीयों से बचें।
सामान्य गलतियां जिनसे बचें
- गलती 1: अर्घ्य का समय गलत मान लेना — हमेशा स्थानीय पंचांग से सूर्यास्त/सूर्योदय जांचें।
- गलती 2: प्रसाद पहले खुद चख लेना — पहले देवता को अर्पित करें।
- गलती 3: घाट पर देर से पहुंचना — भीड़ में जगह नहीं मिलती; 45 मिनट पहले पहुंचें।
- गलती 4: सामग्री आखिरी दिन खरीदना — सूप, गन्ना, फल 1-2 दिन पहले ही ले आएं।
- गलती 5: व्रत के दौरान दवा छोड़ देना — जरूरी दवाएं डॉक्टर की सलाह से जारी रखें।
अर्घ्य वाले दिनों की घंटे-दर-घंटे समय-सारणी
15 नवंबर (संध्या अर्घ्य) — दिन की योजना
- सुबह 6-9 बजे: स्नान, घर की सफाई, सूप की तैयारी शुरू करें।
- सुबह 9-12 बजे: ठेकुआ तलना, फल काटना, सूप सजाना।
- दोपहर 12-3 बजे: विश्राम — व्रती निर्जला है, ऊर्जा बचाएं।
- दोपहर 3:00 बजे: तैयार होकर सूप उठाएं, घाट के लिए निकलें।
- शाम 4:00-4:15 बजे: घाट पहुंचें (सूर्यास्त से 45 मिनट पहले)।
- शाम 4:15-5:00 बजे: पानी में स्थान लें, सूप सजाएं, दीये जलाएं।
- शाम 5:00 बजे (लगभग): संध्या अर्घ्य — डूबते सूर्य को जल-धार।
- शाम 5:30 बजे: प्रसाद वितरण, घर वापसी।
16 नवंबर (उषा अर्घ्य) — भोर की योजना
- सुबह 4:30 बजे: उठें, स्नान करें, तैयार हों।
- सुबह 5:00 बजे: सूप उठाकर घाट के लिए निकलें।
- सुबह 5:15-5:30 बजे: घाट पहुंचें, पानी में स्थान लें।
- सुबह 6:07 बजे (लगभग): उषा अर्घ्य — उगते सूर्य को जल-धार।
- सुबह 6:30 बजे: पारण — अदरक का पानी/शरबत, फिर प्रसाद।
- सुबह 7:30 बजे: घर आकर प्रसाद वितरण।
सामग्री खरीदने की चेकलिस्ट (मात्रा सहित)
छठ से 2-3 दिन पहले ही सारी खरीदारी कर लें:
| सामग्री | अनुमानित मात्रा | नोट |
|---|---|---|
| गेहूं का आटा | 2-3 किलो | ठेकुआ + रोटी के लिए |
| गुड़ | 1 किलो | ठेकुआ + खीर के लिए |
| चावल | 1 किलो | खीर + भात के लिए |
| दूध | 2-3 लीटर | खीर + अर्घ्य के लिए |
| शुद्ध घी | 500 ग्राम | केवल शुद्ध घी |
| केला | 2-3 दर्जन | पूरे गुच्छे शुभ |
| नारियल (पानी वाला) | 2-3 नग | सूप सजावट के लिए |
| गन्ना | 2-4 डंठल | पूरा डंठल लें |
| सेब, संतरा, सिंघाड़ा | 1-1 किलो | मौसमी फल |
| बांस का सूप | 1-2 नग | मजबूत बुनाई वाला |
| मिट्टी के दीये | 20-25 नग | बिना रंग वाले |
| अगरबत्ती, कपूर | 2 पैकेट | — |
| पान, सुपारी | 11-21 नग | शुभ संख्या में |
| हल्दी, अदरक की गांठ | 250 ग्राम | पूरी गांठ |
| नया सूती वस्त्र | 1 जोड़ी | व्रती के लिए |
परिवार के सदस्यों के लिए नियम
छठ सिर्फ व्रती का नहीं — पूरे परिवार का पर्व है:
- पति/पत्नी: व्रती का सहयोग करें — भारी काम खुद करें, व्रती को आराम दें।
- बच्चे: शोर न मचाएं, पूजा में बाधा न डालें। छोटे बच्चे आंशिक नियम निभा सकते हैं।
- बुजुर्ग: उनकी सुविधा का ध्यान रखें — घाट पर बैठने की व्यवस्था करें।
- पूरा परिवार: चारों दिन घर में मांसाहार, शराब, प्याज-लहसुन न बनाएं — चाहे व्रत न भी रखा हो।
- मेहमान: छठ के दिनों में घर आए मेहमानों को भी नियमों की जानकारी दें।
आपात स्थिति में क्या करें
- चक्कर/कमजोरी: व्रती को छांव में बिठाएं, पारण की अनुमति परंपरा में है — जान है तो जहान है।
- पानी में फिसलन: घाट पर रस्सी या सहारा लें; अकेले गहरे में न जाएं।
- बच्चा खो जाए: पहले से मिलने की जगह तय करें; बच्चे की जेब में संपर्क नंबर रखें।
- मेडिकल इमरजेंसी: बड़े घाटों पर मेडिकल कैंप होते हैं — स्थान पहले से नोट कर लें।
छठ के बाद की परंपराएं
- प्रसाद वितरण: पारण के बाद 2-3 दिन तक रिश्तेदारों और पड़ोसियों में प्रसाद बांटा जाता है।
- कोशी भरना (मिथिला): कुछ परिवारों में छठ के बाद आंगन में कोशी की पूजा होती है।
- अगले साल का संकल्प: जो पहली बार व्रत रखता है, वह परंपरा के अनुसार हर साल जारी रखने का संकल्प लेता है।
व्रती की चार दिनों की दिनचर्या (मॉडल रूटीन)
पहली बार व्रत रखने वालों के लिए एक आदर्श दिनचर्या:
- ब्रह्म मुहूर्त (4-5 बजे): उठना, स्नान, ध्यान।
- सुबह (6-9 बजे): घर की सफाई, पूजा की तैयारी।
- दोपहर (12-3 बजे): विश्राम — ऊर्जा संरक्षण जरूरी है।
- शाम: दिन के अनुसार प्रसाद/अर्घ्य की तैयारी।
- रात (9 बजे): छठी मइया की कथा, भजन, फिर विश्राम।
चारों दिन मौन व्रत का पालन (कम से कम पूजा के समय) अत्यंत शुभ माना जाता है।
छठ के बाद घर की शुद्धि
- पारण के बाद रसोई को फिर से सामान्य प्रयोग में लाने से पहले साफ करें।
- बचे हुए प्रसाद को 2-3 दिन में बांट दें — फ्रिज में रखकर भी शुद्धता बनाए रखें।
- सूप और पूजा के बर्तनों को धोकर संभालकर रखें — अगले साल काम आएंगे।
प्रसाद वितरण की मर्यादा
छठ का प्रसाद सिर्फ मिठाई नहीं — यह आशीर्वाद माना जाता है। इसके वितरण के भी नियम हैं:
- प्रसाद हमेशा दोनों हाथों से दें और लें — एक हाथ से देना अशुभ माना जाता है।
- पहले देवता, फिर व्रती, फिर परिवार के बड़े, फिर बच्चे — यही क्रम रखें।
- पड़ोसियों, गरीबों और काम करने वालों (सफाईकर्मी, ड्राइवर) को भी प्रसाद जरूर दें।
- प्रसाद मांगने आए किसी को खाली हाथ न लौटाएं।
- बचा हुआ प्रसाद फ्रिज में रखें, लेकिन 2-3 दिन में बांट दें।
अगर चारों दिन व्रत न रख सकें तो?
कभी-कभी स्वास्थ्य, नौकरी या यात्रा के कारण पूरे चार दिन व्रत रखना संभव नहीं होता। परंपरा में विकल्प हैं:
- केवल अर्घ्य में शामिल हों: व्रत न रखकर भी घाट जाकर अर्घ्य में भाग ले सकते हैं।
- आंशिक व्रत: सिर्फ नहाय खाय और खरना का नियम निभाएं।
- परिवार का कोई सदस्य व्रत रखे: घर का एक व्यक्ति व्रत रखे, बाकी सहयोग करें — फल पूरे परिवार को मिलता है।
- मानसिक व्रत: अत्यंत असमर्थता में मानसिक संकल्प और प्रार्थना भी मान्य है।
महत्वपूर्ण: आधा-अधूरा व्रत रखने से बेहतर है कि श्रद्धा से जितना संभव हो उतना करें। छठी मइया भाव देखती हैं, दिखावा नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
छठ पूजा में क्या-क्या नहीं करना चाहिए?
प्याज-लहसुन-मांसाहार-शराब से परहेज, प्रसाद में गैस/स्टील के बर्तन नहीं, अर्घ्य के समय शोर नहीं, नदी में कचरा नहीं, और उषा अर्घ्य से पहले व्रत नहीं तोड़ना चाहिए।
क्या छठ व्रत में पानी पी सकते हैं?
नहाय खाय के दिन पानी पी सकते हैं। खरना के दिन सूर्यास्त तक निर्जला, फिर प्रसाद के बाद से उषा अर्घ्य तक पूर्ण निर्जला व्रत रहता है।
छठ पूजा में कौन से कपड़े पहनने चाहिए?
साफ-धुले सूती वस्त्र; परंपरा के अनुसार बिना सिले वस्त्र और पीला/केसरिया रंग शुभ माना जाता है। काले कपड़ों से बचें।
अगर घाट न जा सकें तो क्या करें?
घर की छत या आंगन में साफ जगह पर पानी का बर्तन रखकर, वही सूप-सामग्री से अर्घ्य दिया जा सकता है — भावना ही मुख्य है।
क्या बीमार व्यक्ति छठ व्रत रख सकता है?
डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं। परंपरा में स्वास्थ्य कारणों से छूट का प्रावधान है — परिवार का कोई अन्य सदस्य व्रत रख सकता है।
यह एक निजी सूचना पोर्टल है (सरकारी वेबसाइट नहीं)। नियम विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं पर आधारित हैं — आपके परिवार/क्षेत्र की परंपरा ही अंतिम मानी जाए।





