Updated: 27 October 2026
संध्या और उषा अर्घ्य का समय — 12 शहरों की तालिका (Drik Panchang के अनुसार)
नीचे दिए गए सभी समय Drik Panchang के अनुसार हैं। संध्या अर्घ्य का समय 15 नवंबर 2026 के सूर्यास्त का समय है और उषा अर्घ्य का समय 16 नवंबर 2026 के सूर्योदय का समय है।
| शहर | संध्या अर्घ्य — सूर्यास्त, 15 नवंबर 2026 | उषा अर्घ्य — सूर्योदय, 16 नवंबर 2026 |
|---|---|---|
| पटना | शाम 5:01 बजे | सुबह 6:07 बजे |
| रांची | शाम 5:04 बजे | सुबह 6:03 बजे |
| वाराणसी | शाम 5:10 बजे | सुबह 6:16 बजे |
| दिल्ली | शाम 5:28 बजे | सुबह 6:44 बजे |
| कोलकाता | शाम 4:53 बजे | सुबह 5:50 बजे |
| मुंबई | शाम 6:00 बजे | सुबह 6:46 बजे |
| गया | शाम 5:03 बजे | सुबह 6:07 बजे |
| मुजफ्फरपुर | शाम 4:59 बजे | सुबह 6:07 बजे |
| भागलपुर | शाम 4:54 बजे | सुबह 6:00 बजे |
| गोरखपुर | शाम 5:06 बजे | सुबह 6:17 बजे |
| दरभंगा | शाम 4:57 बजे | सुबह 6:05 बजे |
| लखनऊ | शाम 5:16 बजे | सुबह 6:26 बजे |
सुधार की जानकारी: यह नई तालिका इस लेख में पहले दी गई अनुमानित तालिका का स्थान लेती है। Drik Panchang के अनुसार सही समय ये हैं: पटना सूर्यास्त शाम 5:01 बजे; रांची सूर्यास्त शाम 5:04 बजे और सूर्योदय सुबह 6:03 बजे; वाराणसी सूर्यास्त शाम 5:10 बजे और सूर्योदय सुबह 6:16 बजे; दिल्ली सूर्यास्त शाम 5:28 बजे; कोलकाता सूर्यास्त शाम 4:53 बजे; मुंबई सूर्यास्त शाम 6:00 बजे और सूर्योदय सुबह 6:46 बजे। गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गोरखपुर, दरभंगा और लखनऊ इस तालिका में पहली बार जोड़े गए हैं।
नोट: नदी किनारे पेड़ या इमारतों के कारण सूर्य कुछ मिनट पहले भी छिप सकता है, इसलिए घाट पर समय से पहले पहुंचें।
छठ पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं है — यह बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों की आस्था का सबसे बड़ा पर्व है। चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व सूर्य देव और छठी मइया को समर्पित है, जिसमें व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि Chhath Puja 2026 kab hai, चारों दिन की सही तिथियां क्या हैं, हर दिन की विधि कैसे करें और अर्घ्य का सही समय क्या है — तो यह लेख आपके लिए है। यहां आपको Drik Panchang के आधार पर सत्यापित तिथियां, दिन-वार पूरी विधि, सामग्री सूची और अर्घ्य समय की पूरी जानकारी मिलेगी।
Chhath Puja 2026 Kab Hai — चारों दिन की तिथियां
साल 2026 में छठ पूजा 13 नवंबर (शुक्रवार) से 16 नवंबर (सोमवार) तक मनाई जाएगी। मुख्य दिन — संध्या अर्घ्य — 15 नवंबर, रविवार को है।
| दिन | तिथि (2026) | तिथि (पंचांग) | मुख्य अनुष्ठान |
|---|---|---|---|
| पहला दिन — नहाय खाय | 13 नवंबर, शुक्रवार | कार्तिक शुक्ल चतुर्थी | पवित्र स्नान, घर की सफाई, एक समय सात्विक भोजन |
| दूसरा दिन — खरना | 14 नवंबर, शनिवार | कार्तिक शुक्ल पंचमी | दिन भर उपवास, सूर्यास्त के बाद खीर-रोटी का प्रसाद |
| तीसरा दिन — संध्या अर्घ्य | 15 नवंबर, रविवार | कार्तिक शुक्ल षष्ठी | डूबते सूर्य को अर्घ्य (मुख्य दिन) |
| चौथा दिन — उषा अर्घ्य व पारण | 16 नवंबर, सोमवार | कार्तिक शुक्ल सप्तमी | उगते सूर्य को अर्घ्य, व्रत का पारण |
तिथि निर्धारण — Drik Panchang के अनुसार क्यों यही तारीखें हैं
छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है — “छठ” शब्द ही षष्ठी का भोजपुरी-मैथिली उच्चारण है। साल 2026 में षष्ठी तिथि 14 नवंबर की रात 11:24 बजे से शुरू होकर 16 नवंबर की रात 2:01 बजे तक रहेगी (भारतीय मानक समय)।
इसका अर्थ है कि 15 नवंबर (रविवार) की शाम सूर्यास्त के समय षष्ठी तिथि विद्यमान रहेगी — इसलिए संध्या अर्घ्य 15 नवंबर को होगा। और 16 नवंबर (सोमवार) की सुबह सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि लग चुकी होगी, लेकिन परंपरा के अनुसार उषा अर्घ्य 16 नवंबर की सुबह ही दिया जाएगा।
इसी गणना के आधार पर नहाय खाय (चतुर्थी) 13 नवंबर और खरना (पंचमी) 14 नवंबर को पड़ रहा है। केंद्र सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची में भी छठ पूजा (प्रतिहार षष्ठी/सूर्य षष्ठी) 15 नवंबर को दर्ज है।
नोट: दिवाली 2026 (8 नवंबर, रविवार) के ठीक एक सप्ताह बाद छठ का संध्या अर्घ्य है, और भाई दूज (11 नवंबर, बुधवार) के चार दिन बाद।
पहला दिन — नहाय खाय (13 नवंबर, शुक्रवार): विधि

नहाय खाय का अर्थ है — नहाना और खाना। यह छठ व्रत की शुद्धता की शुरुआत का दिन है।
सुबह की विधि
- सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी, तालाब या घर में गंगाजल मिले पानी से स्नान करें।
- स्नान के बाद साफ, धुले हुए वस्त्र पहनें — परंपरा के अनुसार बिना सिले हुए सूती वस्त्र उत्तम माने जाते हैं।
- पूरे घर की सफाई करें। रसोई को विशेष रूप से शुद्ध करें — छठ के प्रसाद के लिए रसोई अलग और पवित्र रखी जाती है।
भोजन की विधि
- इस दिन एक ही बार सात्विक भोजन किया जाता है — परंपरागत रूप से कद्दू-भात (लौकी की सब्जी, चावल और चना दाल)।
- भोजन मिट्टी के चूल्हे पर, शुद्ध घी में, नए बर्तनों में बनाया जाता है।
- प्याज, लहसुन, मांसाहार पूरी तरह वर्जित है।
- व्रती (मुख्य व्रत रखने वाला/वाली) पहले भोजन करता है, फिर परिवार के अन्य सदस्य।
इस दिन क्या न करें
- स्नान से पहले कुछ न खाएं।
- साबुन, शैंपू या कृत्रिम सफाई उत्पादों का प्रयोग न करें।
- बाहर का बना खाना या बासी भोजन न खाएं।
दूसरा दिन — खरना (14 नवंबर, शनिवार): विधि
खरना को कुछ क्षेत्रों में लोहंडा भी कहा जाता है। यह दिन आत्म-संयम और आंतरिक शुद्धि का है।
दिन भर का उपवास
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्जला उपवास रखा जाता है — न अन्न, न जल।
- सुबह पवित्र स्नान के बाद दिन भर भगवान सूर्य का ध्यान और छठ गीत गाए जाते हैं।
- शाम को रसोई में विशेष प्रसाद तैयार किया जाता है।
शाम का प्रसाद (सूर्यास्त के बाद)
- सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर (रसियाव), रोटी और फल का प्रसाद बनाया जाता है।
- पहले यह प्रसाद सूर्य देव को अर्पित किया जाता है, फिर व्रती इसे ग्रहण करता है।
- इसके बाद परिवार और पड़ोसियों में प्रसाद बांटा जाता है।
महत्वपूर्ण: खरना की शाम प्रसाद ग्रहण करने के बाद से 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जो चौथे दिन उषा अर्घ्य के बाद पारण तक चलता है।
तीसरा दिन — संध्या अर्घ्य (15 नवंबर, रविवार): विधि

यह छठ पूजा का मुख्य और सबसे भव्य दिन है। लाखों व्रती नदी, तालाब और घाटों पर एकत्र होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
दिन की तैयारी
- सुबह से ही ठेकुआ (गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना प्रसाद), चावल के लड्डू और अन्य प्रसाद तैयार किए जाते हैं।
- सूप (बांस की टोकरी/दउरा) में फल, ठेकुआ, नारियल, गन्ना, दीया, अगरबत्ती और सुपारी सजाई जाती है।
- व्रती दिन भर निर्जला रहता है।
घाट पर अर्घ्य की विधि
- सूर्यास्त से 30-45 मिनट पहले घाट पहुंचें।
- कमर तक पानी में खड़े होकर बांस के सूप को उठाएं।
- डूबते सूर्य की ओर मुख करके जल और दूध की धार अर्पित करें (अर्घ्य दें)।
- “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
- छठी मइया की कथा सुनें और छठ गीत गाएं।
- अर्घ्य के बाद प्रसाद का वितरण करें।
संध्या अर्घ्य का समय (15 नवंबर, अनुमानित)
| शहर | सूर्यास्त (अनुमानित) |
|---|---|
| पटना | शाम 5:00 बजे |
| रांची | शाम 5:05 बजे |
| वाराणसी | शाम 5:15 बजे |
| दिल्ली | शाम 5:27 बजे |
| कोलकाता | शाम 4:55 बजे |
| मुंबई | शाम 5:55 बजे |
ध्यान दें: यह समय अनुमानित है — नदी किनारे पेड़ या इमारतों के कारण सूर्य कुछ मिनट पहले भी छिप सकता है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग से सही समय जरूर जांच लें और घाट पर समय से पहले पहुंचें।
चौथा दिन — उषा अर्घ्य और पारण (16 नवंबर, सोमवार): विधि

अंतिम दिन भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है — यह अंधेरे से उजाले, निराशा से आशा का प्रतीक है।
उषा अर्घ्य की विधि
- सूर्योदय से पहले घाट पहुंचें (लगभग 45 मिनट पहले)।
- पानी में खड़े होकर पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
- जैसे ही सूर्य की पहली किरण दिखे, सूप उठाकर जल और दूध का अर्घ्य दें।
- छठी मइया से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
उषा अर्घ्य का समय (16 नवंबर, अनुमानित)
| शहर | सूर्योदय (अनुमानित) |
|---|---|
| पटना | सुबह 6:07 बजे |
| रांची | सुबह 6:00 बजे |
| वाराणसी | सुबह 6:20 बजे |
| दिल्ली | सुबह 6:44 बजे |
| कोलकाता | सुबह 5:50 बजे |
| मुंबई | सुबह 6:35 बजे |
ध्यान दें: यह समय अनुमानित है — अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
पारण (व्रत खोलना)
- उषा अर्घ्य के बाद व्रती अदरक का पानी या शरबत पीकर 36 घंटे का निर्जला व्रत खोलता है।
- फिर प्रसाद (ठेकुआ, फल, खीर) ग्रहण किया जाता है।
- परिवार, पड़ोसियों और गरीबों में प्रसाद बांटना पुण्य माना जाता है।
छठ पूजा सामग्री सूची (संपूर्ण)
छठ पूजा के लिए पहले से ही सारी सामग्री जुटा लें:
- प्रसाद के लिए: गेहूं का आटा, गुड़, चावल, दूध, शुद्ध घी, चीनी
- फल: केला, नारियल (पानी वाला), सेब, संतरा, सिंघाड़ा, शरीफा
- विशेष: गन्ना (पूरा डंठल), हल्दी की गांठ, अदरक, पान, सुपारी
- पूजा सामग्री: बांस का सूप (दउरा), मिट्टी के दीये, अगरबत्ती, कपूर, रोली, चावल (अक्षत), फूल, गंगाजल, कलश
- वस्त्र: नया सूती वस्त्र (परंपरा के अनुसार बिना सिला, पीला/केसरिया रंग शुभ)
- अन्य: नई टोकरी, थाली, लोटा
नोट: छठ पूजा में प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का ही प्रयोग होता है — प्लास्टिक के बर्तन या कृत्रिम सजावट से बचें।
36 घंटे का निर्जला व्रत — क्या है और कैसे निभाएं
खरना की शाम प्रसाद खाने के बाद से लेकर चौथे दिन उषा अर्घ्य के बाद पारण तक — लगभग 36 घंटे — व्रती न अन्न ग्रहण करता है, न जल। यह हिंदू परंपरा के सबसे कठिन व्रतों में से एक है।
- इस दौरान मौन और ध्यान को शुभ माना जाता है।
- भारी शारीरिक श्रम से बचें।
- स्वास्थ्य नोट: गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, मधुमेह या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला व्रत न रखें। स्वास्थ्य पहले है — परंपरा में भी छूट का प्रावधान है।
ठेकुआ बनाने की विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
ठेकुआ छठ का सबसे प्रसिद्ध प्रसाद है। इसे सही विधि से बनाना हर व्रती के लिए गर्व की बात है।
सामग्री (लगभग 30-35 ठेकुआ के लिए)
- गेहूं का आटा — 500 ग्राम
- गुड़ — 250 ग्राम (कद्दूकस किया हुआ)
- शुद्ध घी — 100 ग्राम (मोयन के लिए) + तलने के लिए अलग
- नारियल का बुरादा — 50 ग्राम
- सौंफ — 1 बड़ा चम्मच
- इलायची पाउडर — आधा छोटा चम्मच
- पानी — आवश्यकतानुसार (गुड़ घोलने के लिए)
बनाने की विधि
- चरण 1: गुड़ को थोड़े पानी में धीमी आंच पर पिघलाएं। छानकर ठंडा होने दें — गुड़ का घोल गुनगुना होना चाहिए, गर्म नहीं।
- चरण 2: आटे में घी का मोयन डालकर अच्छी तरह मिलाएं — मुट्ठी बांधने पर आटा बंधना चाहिए।
- चरण 3: अब गुड़ का घोल, नारियल बुरादा, सौंफ और इलायची डालकर कड़ा आटा गूंथें। आटा न ज्यादा नरम, न ज्यादा कड़ा हो।
- चरण 4: आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर हाथ से या ठेकुआ के सांचे से चपटा करें। पारंपरिक डिजाइन के लिए लकड़ी के सांचे का प्रयोग करें।
- चरण 5: कड़ाही में घी गर्म करें (मध्यम आंच)। ठेकुआ को सुनहरा-कुरकुरा होने तक तलें — हर तरफ से लगभग 3-4 मिनट।
- चरण 6: निकालकर ठंडा करें। ठंडा होने पर ठेकुआ और कुरकुरा हो जाता है।
टिप: ठेकुआ 7-10 दिन तक खराब नहीं होता, इसलिए इसे 1-2 दिन पहले भी बनाया जा सकता है। लेकिन छठ के नियमों के अनुसार प्रसाद की शुद्धता बनाए रखें — बनाने वाला भी शुद्ध अवस्था में हो।
खरना की गुड़-खीर बनाने की विधि
खरना की शाम बनने वाली गुड़ की खीर (रसियाव) का विशेष महत्व है — इसी से दिन का उपवास टूटता है।
- सामग्री: बासमती/टुकड़ा चावल 100 ग्राम, दूध 1 लीटर, गुड़ 200 ग्राम, इलायची, शुद्ध घी 1 चम्मच।
- विधि: दूध को उबालकर चावल डालें और धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक पकाएं। अलग बर्तन में गुड़ पिघलाएं। गैस बंद करके (दूध फटने से बचाने के लिए) गुड़ का घोल मिलाएं। इलायची डालें।
- सावधानी: गुड़ को उबलते दूध में सीधे न डालें — दूध फट सकता है। हमेशा आंच बंद करके मिलाएं।
- खीर के साथ घी लगी रोटियां और फल परोसे जाते हैं।
छठ का सूप (दउरा) कैसे सजाएं
बांस का सूप छठ पूजा का केंद्र है — इसमें सारा प्रसाद सजाकर घाट ले जाया जाता है।
- चरण 1: सूप को धोकर सुखाएं। नीचे केले के पत्ते बिछाएं।
- चरण 2: बीच में ठेकुआ और चावल के लड्डू रखें।
- चरण 3: चारों ओर फल सजाएं — केला, सेब, संतरा, सिंघाड़ा।
- चरण 4: एक कोने में पानी वाला नारियल, दूसरी ओर गन्ने के टुकड़े रखें।
- चरण 5: मिट्टी के दीये, अगरबत्ती, पान-सुपारी और हल्दी-अदरक की गांठ रखें।
- चरण 6: ऊपर से नया कपड़ा (चुनरी) ढकें।
सूप को सिर पर या हाथों में उठाकर घाट ले जाया जाता है — यह दृश्य छठ की पहचान है।
क्षेत्रीय विविधताएं — बिहार, यूपी, झारखंड, नेपाल
छठ की मूल विधि एक है, लेकिन क्षेत्रों के अनुसार कुछ अंतर हैं:
- बिहार (मिथिला): सबसे विस्तृत परंपरा — कोशी भरना (आंगन में मिट्टी का हाथी बनाकर पूजा) विशेष है।
- भोजपुर क्षेत्र: खरना को “लोहंडा” कहा जाता है; ठेकुआ में विविधता।
- पूर्वी यूपी: “छठी मइया के गीत” की जगह “सूर्य षष्ठी” नाम प्रचलित; घाटों पर मेले लगते हैं।
- झारखंड: सामुदायिक आयोजन ज्यादा — गांव का एक ही घाट।
- नेपाल (मधेश): “छठ” के साथ “सूर्य षष्ठी” नाम; जनकपुर में विशेष आयोजन।
छठ गीत — पर्व की आत्मा
छठ बिना लोकगीतों के अधूरा है। कुछ प्रसिद्ध छठ गीत:
- “केलवा के पात पर उगेलन सूरजमल” — सबसे प्रसिद्ध छठ गीत।
- “उग हे सूरज देव” — अर्घ्य के समय गाया जाने वाला गीत।
- “छठी मइया के महिमा” — छठी मइया की स्तुति।
- शारदा सिन्हा के गाए छठ गीतों ने इस परंपरा को घर-घर पहुंचाया।
अर्घ्य के समय महिलाएं समूह में ये गीत गाती हैं — घाट का वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
छठ पूजा 2026 में कब है?
छठ पूजा 2026 में 13 नवंबर (शुक्रवार) से 16 नवंबर (सोमवार) तक है। मुख्य दिन संध्या अर्घ्य 15 नवंबर (रविवार) को है।
नहाय खाय 2026 कब है?
नहाय खाय 13 नवंबर 2026, शुक्रवार को है।
खरना 2026 कब है?
खरना 14 नवंबर 2026, शनिवार को है।
संध्या अर्घ्य का समय क्या है?
15 नवंबर 2026 को सूर्यास्त के समय — पटना में लगभग शाम 5:00 बजे। अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग से जांचें।
उषा अर्घ्य कब है?
16 नवंबर 2026, सोमवार की सुबह सूर्योदय के समय — पटना में लगभग सुबह 6:07 बजे।
छठ पूजा कितने दिन की होती है?
चार दिन — नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य (पारण)।
क्या छठ पूजा में मूर्ति पूजा होती है?
नहीं। छठ में किसी मूर्ति या पुजारी की आवश्यकता नहीं होती — सीधे सूर्य देव और छठी मइया की पूजा जल में खड़े होकर की जाती है।
यह एक निजी सूचना पोर्टल है (सरकारी वेबसाइट नहीं)। तिथियां Drik Panchang सहित कई पंचांग स्रोतों से सत्यापित हैं, फिर भी अपने स्थानीय पंचांग या पंडित से अंतिम पुष्टि कर लें। अर्घ्य का समय शहर के अनुसार बदलता है।
घाट पर सुरक्षा और पहली बार व्रत रखने वालों के लिए मार्गदर्शन
घाट तक पहुंचना
- संध्या अर्घ्य के लिए सूर्यास्त से कम से कम 45 मिनट पहले और उषा अर्घ्य के लिए सूर्योदय से कम से कम 45 मिनट पहले घाट पहुंचें, ताकि भीड़ में जगह मिल सके।
- पहले से तय कर लें कि परिवार के सभी सदस्य किस घाट पर मिलेंगे और भीड़ में बिछड़ने पर कहां इकट्ठा होंगे।
- अपना वाहन निर्धारित पार्किंग में ही खड़ा करें और घाट तक पैदल जाने के लिए अतिरिक्त समय रखें।
क्या साथ ले जाएं
- सूप, प्रसाद, दीया और अगरबत्ती के अलावा पीने का पानी, टॉर्च, पूरी तरह चार्ज मोबाइल फोन और एक छोटी प्राथमिक चिकित्सा किट साथ रखें।
- गीले रास्तों पर फिसलन से बचने के लिए पकड़ वाली चप्पल पहनें और कीमती सामान घर पर ही छोड़ दें।
भीड़ में सुरक्षा
- घाट पर बनाए गए रास्तों और घेरों का पालन करें, धक्का-मुक्की से बचें और पानी में निर्धारित सीमा से आगे न जाएं।
- बच्चों का हाथ हमेशा पकड़े रखें और उनकी जेब में नाम और मोबाइल नंबर वाली पर्ची रख दें।
- बुजुर्गों के लिए किनारे पर बैठने की जगह पहले से तय करें और उन्हें पानी में देर तक खड़ा न रहने दें।
बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल
- बच्चों को गहरे पानी से दूर रखें और किसी एक वयस्क को उनकी जिम्मेदारी सौंपें।
- बुजुर्गों के लिए बैठने की व्यवस्था, दवाइयां और गर्म कपड़े साथ रखें, क्योंकि सुबह के समय ठंड रहती है।
- लंबे उपवास वाले व्रती को चक्कर या कमजोरी लगे तो तुरंत किनारे बैठाएं, पानी पिलाएं और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता लें।
अगर अर्घ्य का समय छूट जाए तो क्या करें
अगर भीड़ या देरी के कारण आप सूर्यास्त या सूर्योदय के ठीक समय पर घाट नहीं पहुंच पाते, तो घबराएं नहीं। सुरक्षित जगह पर खड़े होकर शांति से अर्घ्य दें और प्रसाद का वितरण करें। आगे क्या करना सही रहेगा, इस बारे में परिवार के बड़ों या स्थानीय पंडित से सलाह लें।
बारिश और खराब मौसम में क्या करें
- बारिश की संभावना हो तो प्रसाद को ढकने के लिए प्लास्टिक कवर या बड़ी पॉलिथीन साथ रखें और दीयों को हवा-बारिश से बचाने की व्यवस्था करें।
- तेज बारिश, बिजली कड़कने या घाट पर पानी का स्तर बढ़ने पर प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और जोखिम वाली जगह से हट जाएं।
- ऐसी स्थिति में घर पर भी अर्घ्य दिया जा सकता है — नीचे दिए गए प्रश्नोत्तर में इसका विवरण है।
अक्सर पूछे जाने वाले नए प्रश्न
हर शहर में अर्घ्य का समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर जगह के देशांतर और अक्षांश पर निर्भर करता है। पूर्व के शहरों में सूर्य पहले उगता और पहले डूबता है, इसलिए कोलकाता में सूर्यास्त पटना से पहले होता है और मुंबई में सबसे बाद में। यही कारण है कि एक ही दिन का अर्घ्य समय हर शहर में कुछ मिनट से लेकर एक घंटे तक अलग होता है।
अगर छठ के दिन बारिश हो जाए तो क्या करें?
हल्की बारिश में घाट पर अर्घ्य दिया जा सकता है, बस प्रसाद और दीयों को भीगने से बचाएं। तेज बारिश, आंधी या बिजली गिरने की चेतावनी हो तो सुरक्षित जगह पर रहें और प्रशासन के निर्देश मानें। ऐसी स्थिति में घर पर भी अर्घ्य दिया जा सकता है।
क्या छठ का व्रत घर पर रखा जा सकता है?
हां। नदी या घाट तक जाना संभव न हो तो घर पर छत, आंगन या बालकनी में साफ पानी से भरे टब या टंकी के सामने खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जा सकता है। व्रत के नियम वही रहते हैं, सिर्फ स्थान बदलता है।
अपने नजदीकी घाट का पता कैसे लगाएं?
अपने शहर के नगर निगम या जिला प्रशासन की ओर से जारी घाटों की सूची देखें, क्योंकि छठ के लिए कई शहरों में विशेष घाट तैयार किए जाते हैं। पड़ोसियों या स्थानीय समिति से भी पूछ सकते हैं। घाट चुनते समय सफाई, रोशनी, पार्किंग और भीड़ की व्यवस्था को ध्यान में रखें और अर्घ्य वाले दिन से पहले घाट देख लें।






2 thoughts on “Chhath Puja 2026 Date: छठ पूजा 2026 कब है — नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य की तिथि और विधि”
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