PM RAHAT Cashless Treatment Scheme 2026: सड़क हादसे में ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज — पात्रता, अस्पताल प्रक्रिया और पूरी जानकारी

सड़क पर चलते समय एक पल में सब कुछ बदल सकता है। एक हादसा, एक घायल व्यक्ति और परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि अस्पताल का खर्च कहां से आएगा। कई बार लोग इसी डर से घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाने में देर कर देते हैं। कभी परिवार के लोग पहले यह सोचते हैं कि इलाज के पैसे जेब से देने पड़ेंगे या नहीं। कभी अस्पताल में ही यह चिंता शुरू हो जाती है कि भर्ती के समय पैसे जमा कराने होंगे या नहीं। इसी डर और देरी के कारण कई घायलों का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पाता, जबकि हादसे के बाद के पहले घंटे को डॉक्टर सबसे कीमती मानते हैं।

इसी समस्या को दूर करने के लिए भारत सरकार ने सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए एक खास योजना बनाई है। इस योजना का नाम है Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025। अब इसे PM RAHAT के नाम से भी जाना जाता है। PM RAHAT का पूरा नाम Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment है। इस योजना का मकसद साफ है कि सड़क हादसे में घायल किसी भी व्यक्ति का इलाज पैसे की कमी के कारण न रुके। अस्पताल में भर्ती के समय परिवार को इलाज के लिए पैसे जमा नहीं कराने पड़ेंगे, क्योंकि इलाज कैशलेस होगा।

इस लेख में हम आपको इस योजना की पूरी जानकारी आसान भाषा में देंगे। सबसे पहले हम जानेंगे कि यह योजना क्या है और यह कब लागू हुई। इसके बाद यह समझेंगे कि कौन इस योजना का लाभ ले सकता है और किस तरह की सड़कों पर हुए हादसे इसमें आते हैं। फिर हम इलाज की सीमा, अस्पताल की व्यवस्था, हादसे के बाद परिवार को क्या करना चाहिए और अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया को कदम-दर-कदम समझेंगे। अंत में हम इस योजना की तुलना आयुष्मान भारत, राह-वीर योजना और हिट एंड रन मुआवजा योजना से करेंगे, ताकि कोई भ्रम न रहे। आखिर में अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब भी दिए गए हैं।

इसलिए अगर आप गाड़ी चलाते हैं, आपके परिवार में कोई रोज सड़क से सफर करता है या आप किसी हादसे के गवाह बनते हैं, तो इस लेख को अंत तक पढ़ें। इसमें दी गई जानकारी किसी दिन किसी की जान बचाने में काम आ सकती है।

PM RAHAT Cashless Treatment Scheme क्या है

Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025 एक कानूनी योजना है। यह योजना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के तहत बनाई गई है। इसका मतलब यह है कि यह कोई अस्थायी घोषणा नहीं है, बल्कि कानून के तहत तय की गई व्यवस्था है। सरकार ने इस योजना को 5 मई 2025 को अधिसूचित किया था। इसकी विस्तृत दिशा-निर्देश 4 जून 2025 को जारी किए गए। इसके बाद 13 फरवरी 2026 को इस योजना को पूरे देश में लागू किया गया और इसी समय इसे PM RAHAT के नाम से शुरू किया गया।

इस योजना के तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को तय सीमा तक कैशलेस इलाज मिलता है। इलाज का खर्च सीधे अस्पताल को योजना के तहत दिया जाता है। घायल व्यक्ति या उसके परिवार को इलाज के लिए अपनी जेब से पैसे नहीं देने पड़ते, जब तक इलाज तय सीमा के अंदर है। यह बात इस योजना को बाकी स्वास्थ्य योजनाओं से अलग बनाती है, क्योंकि इसमें पहले से नाम दर्ज कराने की शर्त नहीं है। हादसा होने के बाद ही व्यक्ति इस योजना का लाभार्थी बन जाता है।

इस योजना को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, यानी National Health Authority (NHA) लागू करता है। NHA वही संस्था है जो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को भी लागू करती है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि PM RAHAT आयुष्मान भारत का हिस्सा नहीं है। यह एक अलग योजना है, जो सिर्फ सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए बनी है। इसमें आयुष्मान कार्ड होना जरूरी नहीं है और इसमें गरीबी रेखा या आय की कोई शर्त भी नहीं है।

योजना का पैसा मोटर वाहन दुर्घटना कोष, यानी Motor Vehicle Accident Fund (MVAF) से दिया जाता है। जिन मामलों में दुर्घटना करने वाला वाहन बीमित होता है, वहां बीमा कंपनियों के योगदान से भुगतान होता है। जिन मामलों में वाहन बीमित नहीं होता, वहां केंद्र सरकार बजटीय मदद से भुगतान करती है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बीमित मामलों से अलग मामलों के लिए 272 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था।

Quick Facts: PM RAHAT योजना एक नजर में

बिंदु जानकारी
योजना का नाम Cashless Treatment of Road Accident Victims Scheme, 2025 (PM RAHAT)
PM RAHAT का पूरा नाम Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment
कानूनी आधार मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162
अधिसूचना 5 मई 2025 (एस.ओ. 2015(E))
दिशा-निर्देश 4 जून 2025 (एस.ओ. 2489(E))
पूरे देश में लागू 13 फरवरी 2026 से
इलाज की सीमा प्रति पीड़ित 1.5 लाख रुपये तक
समय सीमा हादसे की तारीख से अधिकतम 7 दिन तक
लागू करने वाली संस्था राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA)
आपातकालीन नंबर 112 (Emergency Response Support System)
आय या बीमा की शर्त कोई नहीं — किसी भी सड़क हादसे का पीड़ित पात्र है
ऑनलाइन आवेदन नहीं — इलाज अस्पताल के जरिए ही शुरू होता है

कौन पात्र है: पात्रता की शर्तें

इस योजना की पात्रता बहुत सीधी है। कोई भी व्यक्ति जो मोटर वाहन के इस्तेमाल से हुए सड़क हादसे में घायल हुआ है, वह इस योजना का पात्र है। हादसा किसी भी तरह की सड़क पर हुआ हो — राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, जिला सड़क या गांव की सड़क — इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। योजना हर तरह की सड़क पर लागू होती है।

इसमें पीड़ित की आय नहीं देखी जाती। पीड़ित अमीर हो या गरीब, उसके पास अपना स्वास्थ्य बीमा हो या न हो, इससे योजना का लाभ नहीं रुकता। पीड़ित के पास आयुष्मान कार्ड होना भी जरूरी नहीं है। यही वजह है कि यह योजना उन लोगों के लिए भी काम करती है, जो किसी दूसरी स्वास्थ्य योजना के दायरे में नहीं आते।

इसमें वाहन का मालिक कौन है, यह भी शर्त नहीं है। पीड़ित चाहे पैदल चल रहा हो, साइकिल पर हो, दोपहिया या चार पहिया वाहन में हो या बस का यात्री हो — अगर हादसा मोटर वाहन के कारण हुआ है, तो वह पात्र है। एक बात साफ है कि हादसा मोटर वाहन से जुड़ा होना चाहिए। सिर्फ सड़क पर गिरने या बिना वाहन के हुई चोट इस योजना के दायरे में नहीं आती।

एक और जरूरी बात यह है कि इलाज तय अस्पताल, यानी designated hospital में होना चाहिए। अगर घायल व्यक्ति को पहले किसी दूसरे अस्पताल ले जाया जाता है, तो वहां सिर्फ शुरुआती स्थिरता वाला इलाज, यानी stabilization treatment दिया जाता है। जान को खतरा न होने वाले मामलों में यह इलाज 24 घंटे तक और जान को खतरा होने वाले मामलों में 48 घंटे तक दिया जाता है। यह व्यवस्था पुलिस की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है। इसके बाद पीड़ित को तय अस्पताल में भेजा जाता है, जहां पूरी कैशलेस इलाज की व्यवस्था लागू होती है।

कितना इलाज मिलेगा: राशि और समय की सीमा

इस योजना के तहत हर पीड़ित को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलता है। यह सीमा हर पीड़ित के लिए अलग-अलग लागू होती है। अगर एक ही हादसे में कई लोग घायल होते हैं, तो हर घायल व्यक्ति के लिए अलग से 1.5 लाख रुपये तक की सीमा लागू होगी। एक व्यक्ति की सीमा दूसरे व्यक्ति की सीमा से नहीं जुड़ेगी।

दूसरी सीमा समय की है। इलाज की यह सुविधा हादसे की तारीख से अधिकतम 7 दिन तक मिलती है। यह गिनती हादसे की तारीख से शुरू होती है, अस्पताल में भर्ती की तारीख से नहीं। इसलिए समय पर अस्पताल पहुंचना बहुत जरूरी है। अगर इलाज 7 दिन से ज्यादा चलता है या खर्च 1.5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है, तो उससे आगे का खर्च इस योजना के तहत कवर नहीं होगा। ऐसी स्थिति में आगे का इलाज पीड़ित के अपने बीमा, दूसरी योजना या अपने खर्च से होगा।

इलाज NHA के तय स्वास्थ्य पैकेजों के हिसाब से दिया जाता है। इसका मतलब यह है कि अस्पताल मनमाने दाम नहीं लगा सकता। ट्रॉमा और पॉलीट्रॉमा जैसे इलाज के लिए आयुष्मान भारत के पैकेजों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। अस्पताल को इलाज के बाद अपना दावा राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, यानी State Health Agency (SHA) को देना होता है। दावा मंजूर होने के बाद अस्पताल को 10 दिन के अंदर भुगतान करने की समय सीमा तय की गई है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अस्पताल इलाज देने से पीछे न हटें।

एक बात और साफ करना जरूरी है। यह योजना पीड़ित के बैंक खाते में पैसे नहीं भेजती। इसमें 1.5 लाख रुपये नकद नहीं मिलते। यह सिर्फ अस्पताल में इलाज का खर्च कवर करती है और पैसा सीधे अस्पताल को दिया जाता है। अगर कोई व्यक्ति यह दावा करे कि वह इस योजना के तहत नकद राशि दिला देगा, तो उस पर भरोसा न करें।

कौन से अस्पताल में इलाज मिलेगा

इस योजना के तहत इलाज तय अस्पतालों में मिलता है। इन अस्पतालों को designated hospital कहा जाता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने NHA के साथ मिलकर इन अस्पतालों को तय किया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पताल, जो NHA के दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं, उन्हें अपने आप इस योजना के तहत तय अस्पताल माना जाता है। इसके अलावा राज्य NHA के दिशा-निर्देशों के हिसाब से और अस्पतालों को भी जोड़ सकते हैं।

हादसे के समय सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि नजदीकी अस्पताल कौन सा है, यह पता नहीं चलता। इसी परेशानी को दूर करने के लिए इस योजना को 112 आपातकालीन सेवा से जोड़ा गया है। 112 पर कॉल करने पर ऑपरेटर पीड़ित को नजदीकी तय अस्पताल के बारे में बताता है और जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस की सुविधा भी देता है। इसलिए हादसे के बाद सबसे पहला काम 112 पर कॉल करना है। यह नंबर पूरे देश में एक जैसा है और इसे याद रखना आसान है।

अगर घायल व्यक्ति को गलती से किसी ऐसे अस्पताल ले जाया जाता है, जो इस योजना के तहत तय नहीं है, तो घबराएं नहीं। ऐसे अस्पताल में भी शुरुआती स्थिरता वाला इलाज दिया जाता है। जान को खतरा न होने पर 24 घंटे तक और जान को खतरा होने पर 48 घंटे तक यह इलाज मिलता है। इसके बाद पीड़ित को तय अस्पताल में भेजा जाता है। इसलिए शुरुआती इलाज में देर नहीं करनी चाहिए, भले ही अस्पताल तय सूची में न हो।

हादसे के बाद क्या करें: परिवार और मददगार के लिए कदम

हादसे के बाद के पहले मिनट सबसे कीमती होते हैं। डॉक्टर इन्हें गोल्डन आवर कहते हैं। इस समय सही कदम उठाने से जान बच सकती है। नीचे दिए गए कदम परिवार, मददगार और गवाह के लिए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और याद रखें।

पहला कदम 112 पर कॉल करें। कॉल पर हादसे की जगह साफ-साफ बताएं, कितने लोग घायल हैं, यह बताएं और एंबुलेंस मांगे। 112 ऑपरेटर आपको नजदीकी तय अस्पताल के बारे में भी बता सकता है। अगर आप खुद घायल को अस्पताल ले जा रहे हैं, तो भी 112 पर सूचना देना जरूरी है, क्योंकि पुलिस की सूचना इस योजना की प्रक्रिया का हिस्सा है।

दूसरा कदम घायल व्यक्ति को नजदीकी तय अस्पताल तक पहुंचाएं। अगर तय अस्पताल दूर है और पास में कोई और अस्पताल है, तो पहले पास के अस्पताल में शुरुआती इलाज कराएं। देर करना घायल के लिए खतरनाक हो सकता है। अस्पताल पहुंचने पर यह जरूर बताएं कि यह सड़क हादसे का मामला है, ताकि अस्पताल योजना की प्रक्रिया शुरू कर सके।

तीसरा कदम अस्पताल में यह साफ करें कि इलाज PM RAHAT योजना के तहत होना चाहिए। अस्पताल घायल व्यक्ति की जानकारी दर्ज करता है और इलाज की प्रक्रिया शुरू करता है। पुलिस हादसे की रिपोर्ट eDAR प्रणाली पर दर्ज करती है। यह eDAR, यानी electronic Detailed Accident Report, सड़क परिवहन मंत्रालय की प्रणाली है। अस्पताल इलाज और भुगतान के लिए NHA की TMS 2.0 प्रणाली का इस्तेमाल करता है। परिवार को इन प्रणालियों में खुद कुछ भरने की जरूरत नहीं है, लेकिन अस्पताल को सही जानकारी देना जरूरी है।

चौथा कदम इलाज के दौरान अस्पताल से जानकारी लेते रहें। पूछें कि इलाज किस पैकेज के तहत हो रहा है और 1.5 लाख रुपये की सीमा में कितना खर्च हो चुका है। अगर इलाज की अवधि 7 दिन के करीब पहुंच रही है या खर्च सीमा के करीब है, तो पहले से ही आगे की व्यवस्था के बारे में अस्पताल से बात कर लें। इससे आखिरी समय में भागदौड़ नहीं होगी।

पांचवां कदम छुट्टी के बाद अस्पताल के दावे की जानकारी रखें। अस्पताल इलाज के बाद अपना दावा राज्य स्वास्थ्य एजेंसी को देता है। परिवार को अस्पताल का बिल चुकाने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए, जब तक इलाज तय सीमा के अंदर है। अगर कोई अस्पताल तय सीमा के अंदर के इलाज के लिए भी पैसे मांगे, तो इसकी शिकायत राज्य स्वास्थ्य एजेंसी या NHA के जरिए की जा सकती है।

क्या-क्या कवर नहीं होगा

हर योजना की कुछ सीमाएं होती हैं और इन्हें पहले से जानना जरूरी है। इस योजना में 1.5 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च कवर नहीं होगा। हादसे की तारीख से 7 दिन के बाद का इलाज भी इस योजना में कवर नहीं होगा। अगर हादसा मोटर वाहन से नहीं हुआ है, तो वह भी इस योजना के दायरे में नहीं आएगा।

इस योजना में इलाज का खर्च कवर होता है, लेकिन हादसे से हुई कमाई का नुकसान, गाड़ी का नुकसान या मानसिक परेशानी का मुआवजा इसमें नहीं मिलता। ऐसे मामलों के लिए बीमा दावा या मुआवजे की अलग व्यवस्था होती है। हिट एंड रन के मामलों में मौत या गंभीर चोट के लिए मुआवजे की अलग योजना है, जिसके बारे में नीचे बताया गया है।

एक और भ्रम दूर करना जरूरी है। इस योजना के लिए कोई ऑनलाइन फॉर्म भरकर आवेदन नहीं करना होता। अगर कोई वेबसाइट या व्यक्ति यह कहे कि वह इस योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करा देगा और इसके लिए पैसे ले, तो यह गलत है। इस योजना का लाभ अस्पताल में इलाज के समय ही मिलता है। किसी को भी इसके लिए पैसे नहीं देने हैं।

दूसरी योजनाओं से अंतर: भ्रम दूर करें

योजना किसके लिए क्या मिलता है
PM RAHAT (Cashless Treatment Scheme, 2025) किसी भी सड़क हादसे का पीड़ित 7 दिन तक 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज
आयुष्मान भारत PM-JAY पहले से पहचाने गए पात्र परिवार सालाना 5 लाख रुपये तक स्वास्थ्य बीमा, सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं
राह-वीर योजना हादसे में मदद करने वाला नागरिक गोल्डन आवर में मदद पर 25,000 रुपये का इनाम और प्रशंसा पत्र
हिट एंड रन मुआवजा योजना (2022) हिट एंड रन हादसे के पीड़ित का परिवार मौत पर 2 लाख रुपये, गंभीर चोट पर 50,000 रुपये की तय राशि

आयुष्मान भारत से सबसे बड़ा अंतर यह है कि आयुष्मान में लाभार्थी पहले से तय होते हैं, जबकि PM RAHAT में हादसे के बाद कोई भी पीड़ित लाभार्थी बन जाता है। राह-वीर योजना से अंतर यह है कि राह-वीर मदद करने वाले को इनाम देती है, जबकि PM RAHAT घायल व्यक्ति का इलाज कराती है। दोनों योजनाएं एक साथ चलती हैं और एक-दूसरे की जगह नहीं लेतीं। हिट एंड रन मुआवजा योजना से अंतर यह है कि वह मुआवजा देती है, इलाज नहीं।

योजना की तारीखें और अब तक के आंकड़े

इस योजना की कहानी कुछ सालों में बनी है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात पर जोर दिया था कि सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज की व्यवस्था बननी चाहिए। इसके बाद सरकार ने 5 मई 2025 को योजना को अधिसूचित किया। 4 जून 2025 को इसके दिशा-निर्देश जारी हुए। 13 फरवरी 2026 को इसे PM RAHAT के नाम से पूरे देश में लागू किया गया।

सरकार के लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 22,481 पीड़ितों को मुफ्त इलाज मिला था। यह आंकड़ा बताता है कि योजना सिर्फ कागज पर नहीं है, बल्कि जमीन पर भी काम कर रही है। फिर भी, कई लोगों को अभी तक इस योजना के बारे में पता नहीं है। यही वजह है कि हादसे के समय लोग इलाज के खर्च से डरते हैं। इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना ही इस लेख का मकसद है।

सरकार ने इस योजना के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सड़क सुरक्षा अभियान भी शुरू किया है। यह अभियान केंद्रीय संचार ब्यूरो के जरिए चलाया जा रहा है। इसका मकसद लोगों को यह बताना है कि हादसे के बाद इलाज के लिए पैसे की चिंता न करें और घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. क्या PM RAHAT के लिए पहले से पंजीकरण कराना जरूरी है?
नहीं। इसमें पहले से पंजीकरण नहीं होता। सड़क हादसे में घायल कोई भी व्यक्ति तय अस्पताल में इलाज के समय इस योजना का लाभ ले सकता है।

2. क्या इस योजना में गरीब और अमीर, दोनों पात्र हैं?
हां। इसमें आय की कोई शर्त नहीं है। आयुष्मान कार्ड होना भी जरूरी नहीं है।

3. क्या गांव की सड़क पर हुए हादसे में भी यह योजना लागू होगी?
हां। यह योजना किसी भी तरह की सड़क पर हुए मोटर वाहन हादसे पर लागू होती है।

4. क्या पीड़ित को अस्पताल में पैसे जमा कराने होंगे?
नहीं, जब तक इलाज 1.5 लाख रुपये की सीमा और 7 दिन की अवधि के अंदर है। इस सीमा के अंदर का इलाज कैशलेस होता है और भुगतान अस्पताल को योजना के तहत मिलता है।

5. क्या यह योजना बैंक खाते में पैसे भेजती है?
नहीं। यह नकद राशि नहीं देती। यह सिर्फ अस्पताल में इलाज का खर्च कवर करती है।

6. अगर घायल व्यक्ति को पहले किसी दूसरे अस्पताल ले जाया जाए, तो क्या होगा?
ऐसे अस्पताल में शुरुआती स्थिरता वाला इलाज दिया जाता है — जान को खतरा न होने पर 24 घंटे तक और जान को खतरा होने पर 48 घंटे तक। इसके बाद पीड़ित को तय अस्पताल में भेजा जाता है।

7. हादसे के बाद सबसे पहले क्या करना चाहिए?
सबसे पहले 112 पर कॉल करें। हादसे की जगह बताएं, एंबुलेंस मांगे और घायल को नजदीकी तय अस्पताल तक पहुंचाएं। समय पर अस्पताल पहुंचना ही सबसे जरूरी कदम है।

8. क्या इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है?
नहीं। इसके लिए कोई ऑनलाइन आवेदन नहीं है। अगर कोई व्यक्ति इसके नाम पर पैसे मांगे, तो वह गलत है।

Important Links

जानकारी आधिकारिक लिंक
PM RAHAT / Cashless Treatment Scheme के बारे में PIB प्रेस विज्ञप्ति https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2220125
योजना की अधिसूचना और दिशा-निर्देशों के बारे में PIB जानकारी https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2153890

इस लेख में दी गई जानकारी सरकारी अधिसूचना, PIB प्रेस विज्ञप्ति और लोकसभा में दिए गए जवाबों पर आधारित है। नियमों और अस्पतालों की सूची में समय-समय पर बदलाव हो सकता है, इसलिए हादसे के समय 112 पर कॉल करके नजदीकी तय अस्पताल की जानकारी जरूर लें।

ध्यान दें: GramSuvidha एक निजी सूचना पोर्टल (सरकारी वेबसाइट नहीं) है। यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। किसी भी तरह के इलाज या दावे के लिए अस्पताल, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी या संबंधित सरकारी विभाग से ही अंतिम जानकारी लें।