बिहार के किसान भाइयों के लिए एक ऐसी योजना, जिसे समझना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है
Fasal Sahayata Yojana Bihar के बारे में इस लेख में हम एक-एक बात साफ़-साफ़ समझेंगे। अगर आप बिहार के किसान हैं, अगर आपने इस खरीफ मौसम में धान, मकई, सोयाबीन या कोई और अधिसूचित फसल लगाई है, और अगर मौसम ने आपकी मेहनत पर पानी फेर दिया है, तो यह लेख आपके लिए है।
इस लेख को पढ़ने के बाद आपके पास कोई अधूरा सवाल नहीं बचेगा। आप जानेंगे कि यह योजना असल में क्या है, यह बीमा योजना से कैसे अलग है, कौन किसान इसमें आवेदन कर सकता है, कौन नहीं कर सकता, कौन-कौन सी फसलें इस बार शामिल हैं, आवेदन का पूरा तरीका क्या है, कौन-से कागज़ चाहिए, पैसा कब और कैसे मिलता है, और अगर कोई दिक्कत आए तो मदद कहाँ से मिलेगी।
एक बात शुरू में ही साफ़ कर दें। इस लेख में कोई भी जानकारी हवा में नहीं लिखी गई है। जहाँ तक संभव हुआ है, हर तथ्य को बिहार सरकार के सहकारिता विभाग के आधिकारिक पोर्टल, कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल और सरकारी स्वीकृति की खबरों से जाँचा गया है। जहाँ कोई बात अभी साफ़ नहीं है, वहाँ हमने उसे साफ़-साफ़ “अभी पुष्टि नहीं हुई” लिखा है, ताकि आप किसी गलत उम्मीद में न रहें।
तो चलिए, बिना समय गँवाए, इस योजना को शुरू से समझते हैं।
Fasal Sahayata Yojana क्या है
Fasal Sahayata Yojana बिहार सरकार की एक राज्य योजना है। इसे बिहार राज्य फसल सहायता योजना के नाम से भी जाना जाता है। इस योजना को बिहार सरकार का सहकारिता विभाग चलाता है। इसका मकसद बहुत सीधा है। जब किसी अधिसूचित फसल की पैदावार तय सीमा से कम हो जाती है, तो किसान को आर्थिक सहायता दी जाती है।
यहाँ एक शब्द पर ध्यान दीजिए — सहायता। यह योजना किसान को मदद देती है। यह किसी बीमा कंपनी की पॉलिसी नहीं है। इसमें किसान को कोई प्रीमियम नहीं देना होता। आवेदन भी निःशुल्क होता है। पैसा सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजा जाता है।
यह योजना साल 2018 से चल रही है। बिहार ने उस समय केंद्र की फसल बीमा योजना से अलग रास्ता चुना और अपनी खुद की सहायता योजना बनाई। तब से यह योजना हर साल खरीफ और रबी मौसम के लिए लागू होती है। हर मौसम में सरकार यह तय करती है कि कौन-कौन सी फसलें किस जिले या पंचायत में अधिसूचित होंगी। अधिसूचित का मतलब है — इस योजना के दायरे में शामिल। अगर आपकी फसल और आपका इलाका अधिसूचित सूची में है, तभी आप इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
एक और ज़रूरी बात। यह सहायता आपकी पूरी फसल के बाज़ार मूल्य के बराबर नहीं होती। यह एक तय दर से दी जाने वाली सहायता राशि है। इसका मकसद किसान को संकट के समय थोड़ा सहारा देना है, ताकि वह अगली फसल की तैयारी कर सके और कर्ज़ के बोझ में पूरी तरह न दब जाए।
Fasal Sahayata Yojana, PM Fasal Bima Yojana नहीं है — इस फर्क को समझ लीजिए
इंटरनेट पर सबसे बड़ी गड़बड़ी इसी जगह होती है। बहुत सी वेबसाइटें इस योजना को “फसल बीमा” लिख देती हैं। कुछ तो इसे सीधे PM Fasal Bima Yojana बता देती हैं। यह गलत है। दोनों योजनाएँ अलग-अलग हैं। इस फर्क को समझना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि अगर आप गलत योजना समझकर आवेदन करेंगे, तो आपका समय बर्बाद होगा और हो सकता है कि सही योजना का आवेदन भी छूट जाए।
PM Fasal Bima Yojana केंद्र सरकार की बीमा योजना है। उसमें किसान प्रीमियम देता है, बीमा कंपनी जोखिम उठाती है, और नुकसान होने पर बीमा कंपनी से क्लेम मिलता है। बिहार में यह स्थिति अलग है। बिहार ने अपनी अलग सहायता योजना बनाई है।
Fasal Sahayata Yojana में कोई बीमा कंपनी नहीं है। कोई प्रीमियम नहीं है। कोई पॉलिसी नंबर नहीं है। बिहार सरकार अपने राज्य के पैसे से, सहकारिता विभाग के माध्यम से, सीधे किसान को सहायता देती है। नुकसान का आकलन फसल कटनी प्रयोग यानी क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट के आधार पर होता है, जिसके बारे में आगे विस्तार से बताया गया है।
एक और फर्क यह है कि PM Fasal Bima Yojana देश के बाकी हिस्सों में लागू है, जबकि Fasal Sahayata Yojana सिर्फ बिहार के किसानों के लिए है। अगर आप बिहार के बाहर के किसान हैं, तो यह योजना आपके लिए नहीं है। अगर आप बिहार के किसान हैं और कोई आपसे कहे कि “फसल बीमा करवा लो, प्रीमियम दे दो”, तो समझ जाइए कि वह व्यक्ति इस योजना के बारे में सही जानकारी नहीं दे रहा है। इस योजना में प्रीमियम का कोई सवाल ही नहीं उठता।
हमारे पोर्टल पर PM Fasal Bima Yojana के बारे में अलग से जानकारी भी है, ताकि आप दोनों योजनाओं की तुलना खुद कर सकें। उसका लिंक इस लेख के अंत में दिया गया है।
एक नज़र में पूरी योजना — क्विक फैक्ट्स टेबल
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | बिहार राज्य फसल सहायता योजना (Bihar Rajya Fasal Sahayata Yojana) |
| चलाने वाला विभाग | सहकारिता विभाग, बिहार सरकार |
| योजना का प्रकार | राज्य सरकार की फसल सहायता योजना — बीमा योजना नहीं |
| किसके लिए | बिहार के रैयत, गैर-रैयत और आंशिक रैयत-सह-गैर-रैयत किसान |
| प्रीमियम | शून्य — किसान को कोई प्रीमियम नहीं देना है |
| आवेदन शुल्क | शून्य — आवेदन निःशुल्क है |
| सहायता की दर | उपज में 20% तक की कमी पर ₹7,500 प्रति हेक्टेयर; 20% से अधिक कमी पर ₹10,000 प्रति हेक्टेयर |
| अधिकतम क्षेत्र | प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर |
| अधिकतम सहायता | 20% तक की कमी पर ₹15,000 तक; 20% से अधिक कमी पर ₹20,000 तक |
| भुगतान का तरीका | डीबीटी — आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन — ई-सहकारी पोर्टल (esahkari.bihar.gov.in) |
| किसान पंजीकरण | कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल (dbtagriculture.bihar.gov.in) पर पहले पंजीकरण ज़रूरी |
| खरीफ 2026 आवेदन की अंतिम तिथि | 31 अक्टूबर 2026 (सरकारी स्वीकृति की खबर के अनुसार) |
| आधिकारिक हेल्पलाइन | सुगम IVRS — 1800-1800-110; सहकारिता विभाग — 0612-2200693 |
खरीफ 2026 में कौन-कौन सी फसलें शामिल हैं
खरीफ 2026 के लिए बिहार सरकार ने इस योजना के कार्यान्वयन की स्वीकृति 20 अगस्त 2026 को दी थी। इस स्वीकृति के अनुसार खरीफ मौसम में कुल आठ फसलें इस योजना के दायरे में रखी गई हैं। ये फसलें हैं — अगहनी धान, भदई मकई, सोयाबीन, अगहनी आलू, अगहनी बैंगन, अगहनी टमाटर, अगहनी गोभी और मखाना।
अब यह समझना ज़रूरी है कि हर फसल पूरे बिहार में लागू नहीं है। कुछ फसलें पंचायत स्तर पर अधिसूचित हैं और कुछ जिला स्तर पर। इसका मतलब यह है कि पंचायत स्तर की फसल के लिए आपकी पंचायत का अधिसूचित होना ज़रूरी है, और जिला स्तर की फसल के लिए आपके जिले का अधिसूचित होना ज़रूरी है।
नीचे दी गई तालिका से यह बात साफ़ हो जाएगी:
| फसल | स्तर | कितने जिलों / क्षेत्र में अधिसूचित |
|---|---|---|
| अगहनी धान | पंचायत स्तर | राज्य के सभी 38 जिले |
| भदई मकई | पंचायत स्तर | चिन्हित 25 जिले |
| सोयाबीन | जिला स्तर | 3 जिले |
| अगहनी आलू | जिला स्तर | 14 जिले |
| अगहनी बैंगन | जिला स्तर | 15 जिले |
| अगहनी टमाटर | जिला स्तर | 12 जिले |
| अगहनी गोभी | जिला स्तर | 14 जिले |
| मखाना | जिला स्तर | 10 जिले |
ध्यान दीजिए, ऊपर दी गई संख्या जिलों की है, लेकिन पंचायत स्तर की फसलों के लिए आपकी पंचायत का नाम अधिसूचित सूची में होना ज़रूरी है। सिर्फ जिला अधिसूचित होने से काम नहीं चलेगा। इसलिए आवेदन करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर योग्य ग्राम पंचायतों की सूची ज़रूर देखें। अगर आपकी पंचायत सूची में नहीं है, तो उस फसल के लिए आवेदन का कोई फायदा नहीं होगा।
इसके अलावा, संबंधित जिले में स्थित नगर पंचायत और नगर परिषद् क्षेत्र भी इस योजना के दायरे में रखे गए हैं। यानी शहर के पास की खेती करने वाले किसान भी पूरी तरह बाहर नहीं हैं, बशर्ते वे बाकी शर्तें पूरी करते हों।
फसलवार अधिसूचित जिलों की पूरी सूची विभागीय वेबसाइट पर देखी जा सकती है। अगर आपको अपनी पंचायत या जिले की स्थिति समझ न आए, तो अपने प्रखंड के सहकारिता प्रसार पदाधिकारी से पूछना सबसे अच्छा तरीका है।
कितनी सहायता राशि मिलती है — पूरा हिसाब
अब आते हैं उस सवाल पर, जो हर किसान के मन में सबसे पहले आता है — पैसा कितना मिलेगा? इस योजना में सहायता की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी फसल की वास्तविक उपज, तय सीमा यानी थ्रेसहोल्ड उपज से कितनी कम हुई है।
अगर वास्तविक उपज में थ्रेसहोल्ड उपज की तुलना में 20 प्रतिशत तक की कमी पाई जाती है, तो किसान को ₹7,500 प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता दी जाती है। अगर कमी 20 प्रतिशत से अधिक पाई जाती है, तो सहायता की दर ₹10,000 प्रति हेक्टेयर हो जाती है।
यह सहायता अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए दी जाती है। इसका मतलब यह हुआ कि एक किसान को अधिकतम ₹15,000 तक की सहायता मिल सकती है, जब कमी 20 प्रतिशत तक हो। और जब कमी 20 प्रतिशत से अधिक हो, तो अधिकतम सहायता ₹20,000 तक हो सकती है।
इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए किसी किसान ने 1.5 हेक्टेयर में अगहनी धान लगाया है और फसल कटनी प्रयोग के बाद यह पाया जाता है कि उसकी पंचायत में उपज में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। तो उसे 1.5 हेक्टेयर गुणा ₹10,000 यानी ₹15,000 की सहायता मिलेगी। अगर उसी किसान की उपज में 20 प्रतिशत तक की कमी पाई जाती, तो उसे 1.5 गुणा ₹7,500 यानी ₹11,250 मिलते।
एक और उदाहरण। अगर किसी किसान ने 3 हेक्टेयर में खेती की है और कमी 20 प्रतिशत से अधिक है, तो भी सहायता सिर्फ 2 हेक्टेयर के लिए ही मिलेगी, यानी अधिकतम ₹20,000। 2 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के लिए इस योजना में कोई सहायता नहीं दी जाती।
यहाँ एक बात और साफ़ कर दें। यह सहायता किसी एक किसान की फसल देखकर नहीं तय होती। यह पंचायत या जिले के स्तर पर फसल कटनी प्रयोग के आँकड़ों से तय होती है। यानी अगर आपकी व्यक्तिगत फसल खराब हुई है, लेकिन आपकी पंचायत के आधिकारिक आँकड़ों में उपज की कमी तय सीमा तक नहीं पाई जाती, तो सहायता नहीं मिलेगी। यही इस योजना का सबसे ज़रूरी और सबसे कम समझा जाने वाला नियम है।
कौन किसान आवेदन कर सकता है — पात्रता की पूरी शर्तें
इस योजना में आवेदन करने के लिए किसान को कई शर्तें पूरी करनी होती हैं। इनमें से कोई एक शर्त छूट जाए, तो आवेदन रद्द हो सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले इस सूची को ध्यान से पढ़िए।
पहली शर्त — किसान बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए। दूसरी शर्त — किसान ने अधिसूचित फसल की खेती की हो और उसका इलाका उस फसल के लिए अधिसूचित हो। तीसरी शर्त — किसान कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत हो। अगर पंजीकरण नहीं है, तो पहले पंजीकरण कराना होगा, उसके बाद ही इस योजना के लिए आवेदन होगा।
चौथी शर्त — किसान के पास आधार नंबर होना चाहिए। आवेदन के दौरान आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी से सत्यापन होता है। पाँचवीं शर्त — किसान का बैंक खाता आधार से जुड़ा होना चाहिए, क्योंकि पैसा डीबीटी से सीधे उसी खाते में आएगा।
अब किसान की श्रेणी की बात करते हैं। इस योजना में तीन श्रेणियों के किसान आवेदन कर सकते हैं। पहली श्रेणी है रैयत किसान, यानी अपनी ज़मीन के मालिक किसान। दूसरी श्रेणी है गैर-रैयत किसान, यानी दूसरे की ज़मीन पर खेती करने वाले किसान, जिन्हें बटाईदार या किराए पर खेती करने वाला किसान भी कहा जाता है। तीसरी श्रेणी है आंशिक रूप से रैयत और गैर-रैयत किसान, यानी जो किसान कुछ ज़मीन अपनी और कुछ ज़मीन किराए की जोतते हैं।
एक विशेष नियम यह भी है कि जो किसान PM Kisan Samman Nidhi में पंजीकृत हैं, वे इस योजना में सिर्फ रैयत या आंशिक रैयत-सह-गैर-रैयत श्रेणी में ही आवेदन कर सकते हैं, जैसा कि आधिकारिक आवेदन मार्गदर्शन में बताया गया है। अगर आप PM Kisan के लाभार्थी हैं और गैर-रैयत श्रेणी में आवेदन करने की सोच रहे हैं, तो पहले इस नियम को पोर्टल पर ज़रूर जाँच लें।
आवेदन के समय किसान को अपनी फसल का नाम और बोए गए क्षेत्र यानी रकबा की जानकारी देनी होती है। साथ ही ज़मीन का विवरण भी देना होता है, जैसे खाता नंबर, खेसरा नंबर, थाना नंबर और कंप्यूटरीकृत जमाबंदी नंबर, जहाँ लागू हो। गैर-रैयत और आंशिक श्रेणी के किसानों को अपना स्व-घोषणा पत्र किसान सलाहकार या वार्ड सदस्य और कृषि समन्वयक से प्रतिहस्ताक्षरित कराकर अपलोड करना होता है। इसके अलावा, आवेदन प्रक्रिया के दौरान एंड्रॉयड मोबाइल फोन से खेती की ज़मीन के भू-निर्देशांक यानी जियो-कोऑर्डिनेट भी देने होते हैं।
कौन किसान आवेदन नहीं कर सकता
कुछ स्थितियाँ ऐसी हैं, जिनमें आवेदन नहीं किया जा सकता या आवेदन रद्द हो जाता है। जैसे — अगर आपकी फसल अधिसूचित सूची में नहीं है, तो आवेदन का कोई मतलब नहीं है। अगर आपका इलाका उस फसल के लिए अधिसूचित नहीं है, तो भी आवेदन स्वीकार नहीं होगा। अगर आप बिहार के स्थायी निवासी नहीं हैं, तो आप पात्र नहीं हैं।
अगर आपने कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया है और बिना पंजीकरण के सीधे इस योजना के लिए आवेदन करने की कोशिश करते हैं, तो आवेदन आगे नहीं बढ़ेगा। अगर आपके आवेदन में दी गई जानकारी गलत या भ्रामक पाई जाती है, तो आवेदन रद्द किया जा सकता है। इसलिए फसल का नाम, रकबा और ज़मीन का विवरण भरते समय बहुत सावधानी बरतें।
एक और आम गलती यह है कि किसान अपनी पूरी खेती का रकबा लिख देते हैं, जबकि योजना में सिर्फ अधिसूचित फसल का रकबा ही गिना जाता है। अगर आपने एक ही खेत में अधिसूचित और गैर-अधिसूचित फसलें लगाई हैं, तो सिर्फ अधिसूचित फसल का रकबा ही लिखें।
फसल के नुकसान का आकलन कैसे होता है — फसल कटनी प्रयोग
इस योजना को समझने के लिए फसल कटनी प्रयोग को समझना सबसे ज़रूरी है। बहुत से किसान यह सोचते हैं कि उनकी फसल खराब हुई है, इसलिए उन्हें पैसा मिल जाएगा। लेकिन इस योजना में ऐसा नहीं होता।
सबसे पहले, सरकार हर फसल के लिए एक थ्रेसहोल्ड उपज तय करती है। थ्रेसहोल्ड उपज का मतलब है — सामान्य परिस्थितियों में उस इलाके में उस फसल की अपेक्षित औसत उपज। इसके बाद, फसल कटने के समय, चुने हुए खेतों में फसल कटनी प्रयोग किया जाता है। इसमें एक तय क्षेत्र की फसल काटकर, उसे मापकर, वास्तविक उपज निकाली जाती है।
अगर वास्तविक उपज थ्रेसहोल्ड उपज से कम पाई जाती है, तो कमी का प्रतिशत निकाला जाता है। इसी प्रतिशत के आधार पर यह तय होता है कि किसान को ₹7,500 प्रति हेक्टेयर वाली श्रेणी में सहायता मिलेगी या ₹10,000 प्रति हेक्टेयर वाली श्रेणी में।
इस प्रक्रिया में अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के उपज दर आँकड़ों का भी उपयोग होता है। आवेदन करने वाले किसानों के आँकड़ों का क्षेत्र सत्यापन किया जाता है। उसके बाद, जिन ग्राम पंचायतों में उपज में कमी पाई जाती है, उन्हें योग्य घोषित किया जाता है। उन्हीं पंचायतों के आवेदक किसानों को आगे की प्रक्रिया के लिए दस्तावेज़ अपलोड करने होते हैं।
इसलिए आवेदन करने का मतलब यह नहीं है कि पैसा पक्का है। आवेदन सिर्फ पहला कदम है। पैसा तभी मिलेगा जब आपकी पंचायत के आधिकारिक आँकड़ों में उपज की कमी साबित होगी और आपका आवेदन सत्यापन में सही पाया जाएगा।
कौन-से दस्तावेज़ चाहिए — आवेदन से पहले सब तैयार रखिए
आवेदन शुरू करने से पहले नीचे दी गई चीज़ें तैयार रखिए, ताकि बीच में अटकना न पड़े।
सबसे पहले कृषि विभाग का किसान पंजीकरण नंबर। इसके बिना आवेदन शुरू नहीं होगा। दूसरा, बोई गई फसल का नाम और रकबा। तीसरा, ज़मीन का विवरण — खाता नंबर, खेसरा नंबर, थाना नंबर और कंप्यूटरीकृत जमाबंदी नंबर, जहाँ लागू हो।
चौथा, निर्धारित प्रारूप में भरा हुआ स्व-घोषणा पत्र। यह पत्र सभी श्रेणियों के किसानों को अपलोड करना होता है। रैयत किसानों के लिए अलग प्रारूप है, गैर-रैयत किसानों के लिए अलग, और दोनों श्रेणियों वाले किसानों के लिए अलग। सही प्रारूप आधिकारिक पोर्टल से ही डाउनलोड करें। किसी दुकान या एजेंट से लिया गया गलत प्रारूप आवेदन को अटका सकता है।
पाँचवाँ, रैयत किसानों के लिए अद्यतन भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र या हाल की राजस्व रसीद। यह ज़रूरत योग्य पंचायतों के चयन के बाद पड़ती है, जब चयनित पंचायतों के रैयत और आंशिक श्रेणी के आवेदकों से यह दस्तावेज़ माँगा जाता है। छठा, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर, क्योंकि ओटीपी सत्यापन इसी नंबर पर होगा। सातवाँ, आधार से जुड़ा बैंक खाता, जिसमें पैसा आना है।
कुछ पुरानी मार्गदर्शिकाओं में फोटो, मतदाता पहचान पत्र, बैंक पासबुक के पहले पन्ने की स्कैन कॉपी और निवास प्रमाण पत्र की फाइल साइज़ सीमा भी दी गई है। जैसे फोटो 50 केबी से कम, पहचान पत्र और पासबुक की कॉपी 400 केबी से कम पीडीएफ में। लेकिन ये सीमाएँ समय-समय पर बदल सकती हैं। इसलिए आवेदन के समय पोर्टल पर दिख रही मौजूदा सीमा को ही अंतिम मानें।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें — स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
अब आते हैं सबसे काम की बात पर — आवेदन कैसे करें। नीचे दिए गए कदमों को एक-एक करके अपनाइए।
- चरण 1 — सबसे पहले कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर किसान पंजीकरण पूरा कीजिए। अगर आप पहले से पंजीकृत हैं, तो अपना किसान पंजीकरण नंबर नोट करके रखिए। अगर पंजीकृत नहीं हैं, तो dbtagriculture.bihar.gov.in पर जाकर पंजीकरण कराइए।
- चरण 2 — सहकारिता विभाग के ई-सहकारी पोर्टल esahkari.bihar.gov.in पर जाइए। वहाँ बिहार राज्य फसल सहायता योजना (खरीफ 2026) के आवेदन वाला लिंक खोलिए।
- चरण 3 — अपना किसान पंजीकरण नंबर डालिए और खोजिए। आपकी बुनियादी जानकारी अपने आप आ जाएगी।
- चरण 4 — आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी से सत्यापन कीजिए।
- चरण 5 — अधिसूचित फसल का नाम और बोए गए क्षेत्र यानी रकबा की जानकारी भरिए।
- चरण 6 — ज़मीन का विवरण और स्व-घोषणा पत्र अपलोड कीजिए।
- चरण 7 — आवेदन जमा कीजिए और पावती रसीद डाउनलोड करके सुरक्षित रखिए।
- चरण 8 — फसल कटनी प्रयोग के बाद, अपनी ग्राम पंचायत की पात्रता के बारे में एसएमएस या पोर्टल सूचना का इंतज़ार कीजिए।
- चरण 9 — अगर आपकी पंचायत योग्य पाई जाती है, तो आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए लिंक से ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड कीजिए।
- चरण 10 — जब कहा जाए, तो निर्धारित मोबाइल एप्लिकेशन से अपने खेत के भू-निर्देशांक यानी जियो-कोऑर्डिनेट जमा कीजिए।
एक ज़रूरी बात — आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 बताई गई है। लेकिन अंतिम दिन का इंतज़ार मत कीजिए। आखिरी दिनों में पोर्टल पर भीड़ बढ़ जाती है और छोटी सी गलती सुधारने का समय नहीं मिलता। कोशिश कीजिए कि आवेदन समय से काफी पहले पूरा हो जाए।
अगर ऑनलाइन आवेदन में दिक्कत हो तो क्या करें — सहायता के रास्ते
हर किसान के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट नहीं होता। इस बात को ध्यान में रखकर सरकार ने मदद के रास्ते भी रखे हैं।
पहला रास्ता — सुगम IVRS हेल्पलाइन। आधिकारिक पोर्टल पर दिया गया टोल-फ्री नंबर 1800-1800-110 है। इस पर कॉल करके आवेदन में मदद ली जा सकती है।
दूसरा रास्ता — अपने प्रखंड के सहकारिता प्रसार पदाधिकारी यानी प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी या कार्यपालक सहायक से मिलिए। वे आवेदन भरने में मदद करते हैं।
तीसरा रास्ता — सहकारिता विभाग का हेल्पलाइन नंबर 0612-2200693। अगर किसी नंबर पर संपर्क न हो, तो पोर्टल पर दिए गए शिकायत वाले हिस्से का उपयोग कीजिए।
ध्यान रखिए, मदद के नाम पर कोई भी आपसे पैसा नहीं माँग सकता। यह योजना पूरी तरह निःशुल्क है। अगर कोई व्यक्ति आवेदन के बदले पैसा माँगे, तो समझ जाइए कि वह ठग है।
आवेदन का स्टेटस और भुगतान की स्थिति कैसे चेक करें
आवेदन जमा करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है — मेरा आवेदन कहाँ तक पहुँचा और पैसा कब आएगा? इसके लिए आधिकारिक पोर्टल पर ही स्थिति देखने की सुविधा है।
ई-सहकारी पोर्टल पर बिहार राज्य फसल सहायता योजना के लिए भुगतान की स्थिति देखने का विकल्प दिया गया है। वहाँ आप अपने किसान पंजीकरण नंबर या आवेदन विवरण से स्थिति देख सकते हैं। इसके अलावा, पोर्टल पर योग्य ग्राम पंचायतों की सूची भी देखी जा सकती है। यह सूची इसलिए ज़रूरी है क्योंकि अगर आपकी पंचायत योग्य सूची में नहीं है, तो आपको पता चल जाएगा कि इस बार सहायता नहीं मिलेगी।
एक और तरीका यह है कि आप अपने बैंक खाते की जाँच करते रहें। पैसा डीबीटी से सीधे खाते में आता है, इसलिए बैंक से एसएमएस या पासबुक एंट्री से भी भुगतान का पता चल जाता है। लेकिन सिर्फ बैंक खाता देखने से आवेदन की स्थिति का पता नहीं चलता। इसलिए पोर्टल पर स्थिति देखना ज़्यादा भरोसेमंद है।
यहाँ एक साफ़ बात कहना ज़रूरी है। इस लेख के लिखे जाने के समय, भुगतान की स्थिति देखने के पोर्टल के हर लिंक की ताज़ा कार्यप्रणाली को हमने व्यक्तिगत रूप से नहीं परखा है। पोर्टल का डिज़ाइन समय-समय पर बदलता रहता है। इसलिए अगर कोई लिंक न खुले, तो पोर्टल के मुख्य पेज से “बिहार राज्य फसल सहायता हेतु भुगतान की स्थिति” वाला विकल्प खोजिए या हेल्पलाइन पर पूछिए। किसी अनजान वेबसाइट पर अपना पंजीकरण नंबर या आधार नंबर मत डालिए।
पैसा कब मिलेगा — भुगतान की समय-सीमा के बारे में सच्चाई
इस सवाल का कोई एक तय जवाब नहीं है, और जो वेबसाइट आपको पक्की तारीख बता दे, उस पर भरोसा मत कीजिए। भुगतान की प्रक्रिया कई चरणों से गुज़रती है — आवेदन, फसल कटनी प्रयोग, उपज आँकड़ों का सत्यापन, योग्य पंचायतों का चयन, दस्तावेज़ों की जाँच, आधार सत्यापन, और फिर डीबीटी से भुगतान। इनमें से कोई भी चरण देर से पूरा हो, तो भुगतान में देर हो जाती है।
एक उदाहरण से यह बात साफ़ होगी। खबरों के अनुसार, 11 सितंबर को सहकारिता विभाग ने खरीफ 2024 मौसम के लिए 1,17,708 किसानों को ₹104.46 करोड़ की सहायता राशि डीबीटी से भेजी थी। ये लाभार्थी 714 पंचायतों में फैले हुए थे। इस उदाहरण से आप समझ सकते हैं कि भुगतान फसल मौसम के काफी बाद भी हो सकता है, क्योंकि पूरी जाँच प्रक्रिया में समय लगता है। इसका मतलब यह नहीं है कि खरीफ 2026 का पैसा भी इतनी ही देर से आएगा। यह सिर्फ एक उदाहरण है, जो यह बताता है कि भुगतान की कोई एक तय तारीख पहले से घोषित नहीं होती।
इसलिए सही तरीका यह है कि आवेदन सही समय पर पूरा करें, दस्तावेज़ सही रखें, और पोर्टल पर स्थिति देखते रहें। अगर आपकी पंचायत योग्य पाई जाती है और आपका आवेदन सत्यापन में सही है, तो पैसा आपके आधार से जुड़े खाते में आएगा।
आम गलतियाँ जो आवेदन रद्द करवा देती हैं
पहली गलती — गलत फसल या गलत रकबा लिखना। दूसरी गलती — गलत श्रेणी चुनना, जैसे अपनी ज़मीन होते हुए भी गैर-रैयत चुन लेना, या इसके उल्टा करना। तीसरी गलती — स्व-घोषणा पत्र का गलत प्रारूप अपलोड करना। चौथी गलती — आधार से न जुड़े बैंक खाते की जानकारी देना। पाँचवीं गलती — आवेदन की पावती रसीद न संभालकर रखना।
छठी गलती — आखिरी दिन आवेदन करना। सातवीं गलती — किसी एजेंट को पैसा देकर आवेदन करवाना। आठवीं गलती — किसी फर्जी वेबसाइट पर आवेदन करना। हमेशा याद रखिए, असली पोर्टल esahkari.bihar.gov.in है और किसान पंजीकरण का पोर्टल dbtagriculture.bihar.gov.in है। इनके अलावा किसी भी लिंक पर भरोसा मत कीजिए।
ठगी से बचिए — ये बातें हमेशा याद रखिए
इस योजना के नाम पर ठगी भी होती है। कोई आपसे कहे कि “₹500 दो, तुम्हारा नाम पक्का कर दूँगा”, तो वह झूठ बोल रहा है। कोई कहे कि “प्रीमियम जमा करो”, तो वह भी झूठ है। इस योजना में न प्रीमियम है, न आवेदन शुल्क है, न किसी एजेंट की ज़रूरत है।
कभी भी अपना ओटीपी, आधार नंबर या बैंक की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को मत दीजिए। आवेदन सिर्फ आधिकारिक पोर्टल पर कीजिए। अगर कोई व्हाट्सऐप लिंक या छोटा लिंक भेजकर आवेदन करने को कहे, तो उस पर क्लिक मत कीजिए। सीधे ब्राउज़र में आधिकारिक पोर्टल का पता टाइप करके जाइए।
बिहार की दूसरी किसान योजनाओं से क्या संबंध है
Fasal Sahayata Yojana अकेली योजना नहीं है। बिहार के किसान कई योजनाओं का लाभ एक साथ ले सकते हैं, बशर्ते वे हर योजना की शर्तें पूरी करते हों। उदाहरण के लिए, बिहार कृषि इनपुट अनुदान योजना फसल के इनपुट यानी बीज, खाद जैसी चीज़ों पर अनुदान देती है, जबकि Fasal Sahayata Yojana फसल के नुकसान पर सहायता देती है। दोनों का मकसद अलग है, इसलिए एक का लाभ लेने से दूसरे का लाभ अपने आप खत्म नहीं हो जाता। लेकिन हर योजना के नियम अलग हैं, इसलिए हर योजना के लिए अलग से पात्रता जाँचनी होगी।
इसी तरह, PM Kisan Samman Nidhi एक अलग आय सहायता योजना है। उसका Fasal Sahayata Yojana से सीधा संबंध नहीं है, सिवाय इसके कि PM Kisan में पंजीकृत किसानों के लिए इस योजना में श्रेणी को लेकर एक विशेष नियम है, जिसका ज़िक्र ऊपर किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Fasal Sahayata Yojana क्या है?
यह बिहार सरकार की राज्य योजना है, जिसमें अधिसूचित फसल की उपज तय सीमा से कम होने पर किसान को ₹7,500 या ₹10,000 प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता दी जाती है। यह सहायता योजना है, बीमा योजना नहीं।
क्या इस योजना में प्रीमियम देना होता है?
नहीं। इस योजना में किसान को कोई प्रीमियम नहीं देना होता। आवेदन भी निःशुल्क है। पूरी लागत बिहार सरकार उठाती है।
एक किसान को अधिकतम कितनी सहायता मिल सकती है?
सहायता अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिए दी जाती है। 20 प्रतिशत तक की उपज कमी पर अधिकतम ₹15,000 और 20 प्रतिशत से अधिक कमी पर अधिकतम ₹20,000 तक सहायता मिल सकती है।
क्या किराए की ज़मीन पर खेती करने वाले किसान आवेदन कर सकते हैं?
हाँ। गैर-रैयत किसान यानी किराए या बटाई पर खेती करने वाले किसान भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वे निर्धारित दस्तावेज़ और प्रतिहस्ताक्षरित स्व-घोषणा पत्र जमा करें।
खरीफ 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?
सरकारी स्वीकृति की खबर के अनुसार, खरीफ 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 है। फिर भी, अंतिम दिन का इंतज़ार किए बिना जल्द आवेदन करना ही समझदारी है।
आवेदन के लिए कौन-सा पोर्टल सही है?
आवेदन के लिए सही पोर्टल सहकारिता विभाग का ई-सहकारी पोर्टल esahkari.bihar.gov.in है। किसान पंजीकरण के लिए कृषि विभाग का डीबीटी पोर्टल dbtagriculture.bihar.gov.in है।
क्या मेरी फसल खराब हुई है, तो मुझे पैसा पक्का मिलेगा?
नहीं, यह पक्का नहीं है। सहायता तभी मिलेगी जब आपकी पंचायत के आधिकारिक फसल कटनी प्रयोग के आँकड़ों में उपज की कमी साबित होगी और आपका आवेदन सत्यापन में सही पाया जाएगा।
पैसा कैसे मिलेगा?
पैसा डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजा जाता है। नकद भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है।
आधिकारिक लिंक
- ई-सहकारी पोर्टल (सहकारिता विभाग, बिहार सरकार): https://esahkari.bihar.gov.in/
- कृषि विभाग डीबीटी पोर्टल — किसान पंजीकरण: https://dbtagriculture.bihar.gov.in/
- बिहार कृषि इनपुट अनुदान योजना 2026 के बारे में हमारी जानकारी: https://gramsuvidha.co.in/bihar-krishi-input-anudan-yojana-2026-apply-online/
- PM Fasal Bima Yojana 2026 के बारे में हमारी जानकारी: https://gramsuvidha.co.in/pm-fasal-bima-yojana-2026/
अंतिम बात
Fasal Sahayata Yojana बिहार के किसानों के लिए एक सच्ची मदद है, लेकिन तभी जब आप इसे सही तरीके से समझकर, सही समय पर, सही पोर्टल से आवेदन करें। सबसे ज़रूरी तीन बातें याद रखिए — पहली, यह सहायता योजना है, बीमा नहीं। दूसरी, आवेदन निःशुल्क है और कोई प्रीमियम नहीं है। तीसरी, आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 है, इसलिए देर मत कीजिए।
अगर आपको यह जानकारी काम की लगी, तो इसे अपने गाँव के दूसरे किसानों तक भी पहुँचाइए। और अगर आवेदन में कोई दिक्कत आए, तो हेल्पलाइन 1800-1800-110 पर कॉल कीजिए या अपने प्रखंड के सहकारिता अधिकारी से मिलिए।
एक निजी सूचना पोर्टल (सरकारी वेबसाइट नहीं) — यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। अंतिम और अद्यतन जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक पोर्टल ही देखें।





