बारिश न हो तो सूखा, ज्यादा हो तो बाढ़ — किसान की मेहनत एक मौसम की मार में बर्बाद हो सकती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) इसी डर का जवाब है — सरकार की फसल बीमा योजना जिसमें किसान को सिर्फ 2% (खरीफ), 1.5% (रबी) या 5% (बागवानी) प्रीमियम देना होता है, बाकी सरकार देती है। 18 फरवरी 2016 को शुरू हुई यह योजना अब तक 78 करोड़ से ज्यादा किसान आवेदनों को कवर कर चुकी है।
इस गाइड में — योजना क्या है, कौन ले सकता है, प्रीमियम कितना, क्या-क्या कवर होता है, क्लेम कैसे मिलता है, और आवेदन कैसे करें। 30 सवालों के जवाब आखिर में। सारी जानकारी pmfby.gov.in और कृषि मंत्रालय के आधिकारिक स्रोतों से।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| योजना | प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) — केंद्र सरकार |
| शुरुआत | 18 फरवरी 2016 |
| मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय |
| किसान प्रीमियम | खरीफ 2%, रबी 1.5%, व्यावसायिक/बागवानी 5% (बीमित राशि का) |
| बाकी प्रीमियम | सरकार देती है (केंद्र + राज्य) |
| पात्रता | अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी किसान (मालिक, बटाईदार, किराएदार) |
| आवेदन | pmfby.gov.in, बैंक, CSC केंद्र |
| हेल्पलाइन | 14447 |
| बजट (2021-26) | ₹69,515.71 करोड़ |
PMFBY क्या है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना है, जो 18 फरवरी 2016 को शुरू हुई। इसका मकसद — प्राकृतिक आपदा, कीट या बीमारी से फसल बर्बाद होने पर किसान को आर्थिक मदद देना, ताकि वह कर्ज के जाल में न फंसे और खेती जारी रख सके।
यह योजना “वन नेशन, वन स्कीम” के तहत पुरानी दो योजनाओं (राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना और संशोधित NAIS) की जगह लाई गई। बीमा अधिसूचित फसलों पर अधिसूचित क्षेत्रों में मिलता है — यानी राज्य सरकार ने जिस फसल और इलाके को अधिसूचित किया हो।
अब तक के आंकड़े बताते हैं कि योजना बड़े पैमाने पर चल रही है — 78.41 करोड़ किसान आवेदनों का बीमा हुआ और 22.67 करोड़ किसानों को ₹1.83 लाख करोड़ के क्लेम मिले।
प्रीमियम: किसान को कितना देना है?
PMFBY की सबसे बड़ी खासियत — किसान का हिस्सा फिक्स और बहुत कम है:
- खरीफ (धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, तूर, मूंग, उड़द, कपास, जूट, मूंगफली, सोयाबीन आदि): बीमित राशि का अधिकतम 2%
- रबी (गेहूं, जौ, मटर, चना, सरसों आदि): बीमित राशि का अधिकतम 1.5%
- वार्षिक व्यावसायिक/बागवानी फसलें: बीमित राशि का अधिकतम 5%
इससे ऊपर का पूरा प्रीमियम सरकार देती है — केंद्र और राज्य मिलकर। सरकारी सब्सिडी की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के किसानों का पूरा प्रीमियम सरकार देती है।
क्या-क्या कवर होता है?
योजना बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक के जोखिम कवर करती है:
1. खड़ी फसल का नुकसान: सूखा, बाढ़, चक्रवात, तूफान, ओलावृष्टि, भूस्खलन, कीट और बीमारियां
2. बुवाई न हो पाना: खराब मौसम से बुवाई रुक जाए तो बीमित राशि का 25% तक मुआवजा
3. कटाई के बाद का नुकसान: “कट एंड स्प्रेड” स्थिति में 14 दिन के अंदर चक्रवाती/बेमौसम बारिश से खराबी
4. स्थानीय आपदाएं: ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव — व्यक्तिगत खेत आधार पर
क्या कवर नहीं होता?
- युद्ध, परमाणु जोखिम, दुर्भावनापूर्ण क्षति
- लापरवाही से हुआ नुकसान
- गैर-अधिसूचित क्षेत्र या फसल
कौन आवेदन कर सकता है?
- जमीन के मालिक, बटाईदार और किराएदार किसान
- अधिसूचित फसल, अधिसूचित क्षेत्र में
- ऋणी और गैर-ऋणी दोनों — योजना स्वैच्छिक है
जरूरी दस्तावेज
- आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खतौनी/खसरा, बुवाई प्रमाणपत्र
आवेदन कैसे करें?
- ऑनलाइन: pmfby.gov.in पर रजिस्टर करें, फसल चुनें, प्रीमियम कैलकुलेटर से जांचें, कट-ऑफ से पहले जमा करें
- ऑफलाइन: नजदीकी बैंक या CSC केंद्र पर फॉर्म भरें
- फसल ऋण लेने वालों का नामांकन बैंक खुद करता है
क्लेम कैसे मिलता है?
- रिपोर्ट: pmfby.gov.in, ऐप, 14447 या WhatsApp 7065514447
- आकलन: सैटेलाइट, ड्रोन (YES-TECH, WINDS, CROPIC)
- पैसा सीधे बैंक खाते में — लक्ष्य कटाई के 2 महीने में
- शिकायत: कृषि रक्षक पोर्टल, 14447
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: PMFBY कब शुरू हुई?
जवाब: 18 फरवरी 2016।
सवाल 2: किसान को कितना प्रीमियम देना होता है?
जवाब: खरीफ 2%, रबी 1.5%, बागवानी 5% (अधिकतम)।
सवाल 3: बाकी प्रीमियम कौन देता है?
जवाब: केंद्र और राज्य सरकार।
सवाल 4: क्या बटाईदार ले सकते हैं?
जवाब: हां।
सवाल 5: कटाई के बाद का नुकसान कवर है?
जवाब: हां, 14 दिन तक।
सवाल 6: हेल्पलाइन क्या है?
जवाब: 14447।
सवाल 7: क्या यह सरकारी वेबसाइट है?
जवाब: नहीं — GramSuvidha एक निजी सूचना पोर्टल है।
PMFBY के उद्देश्य: विस्तार से
योजना के चार मुख्य उद्देश्य हैं, जो कृषि मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में दर्ज हैं:
- आर्थिक सहारा: फसल नुकसान झेल रहे किसानों को बीमा राशि से मदद, ताकि परिवार का गुजारा चलता रहे
- आय स्थिरता: प्राकृतिक आपदा के बाद भी किसान की आय एकदम शून्य न हो
- आधुनिक खेती को बढ़ावा: जोखिम कवर होने पर किसान नई तकनीक और बेहतर बीज अपनाने से नहीं डरता
- कृषि ऋण का प्रवाह: बीमित फसल पर बैंक आसानी से कर्ज देते हैं, क्योंकि डिफॉल्ट का डर कम होता है
किसानों के लिए PMFBY क्यों खास है?
पहले की बीमा योजनाओं में प्रीमियम ज्यादा था और क्लेम में देरी होती थी। PMFBY में तीन बड़े सुधार हुए:
1. कम प्रीमियम, ज्यादा कवर: किसान बीमित राशि का सिर्फ 1.5% से 5% देता है — पहले यह बोझ ज्यादा था। सरकार बाकी पूरा प्रीमियम वहन करती है, जिसकी कोई सीमा नहीं।
2. तकनीक से तेज क्लेम: सैटेलाइट इमेज, ड्रोन सर्वे और मोबाइल ऐप से नुकसान का आकलन हफ्तों में हो जाता है। पहले पटवारी की रिपोर्ट का महीनों इंतजार करना पड़ता था।
3. व्यक्तिगत खेत का आकलन: ओलावृष्टि या भूस्खलन जैसी स्थानीय आपदाओं में अब पूरे गांव के औसत का इंतजार नहीं — आपके खेत के नुकसान पर क्लेम मिलता है।
प्रीमियम कैलकुलेटर: सही राशि पहले ही जान लें
प्रीमियम भरने से पहले pmfby.gov.in पर Insurance Premium Calculator जरूर देखें:
- Step 1: pmfby.gov.in खोलें
- Step 2: होमपेज पर “Insurance Premium Calculator” लिंक पर क्लिक करें
- Step 3: सीजन, साल, स्कीम, राज्य, जिला और फसल भरें
- Step 4: “Calculate” दबाएं — सटीक प्रीमियम राशि दिखेगी
इससे बैंक या CSC वाला जो राशि मांगे, उससे मिलान कर सकते हैं — धोखाधड़ी से बचाव होता है।
आवेदन की आखिरी तारीख (कट-ऑफ) का महत्व
हर सीजन के लिए राज्य सरकार कट-ऑफ तारीख तय करती है — इसके बाद आवेदन नहीं लिया जाता। आमतौर पर:
- खरीफ: 31 जुलाई के आसपास
- रबी: 31 दिसंबर के आसपास
तारीख हर साल और हर राज्य में अलग हो सकती है — pmfby.gov.in या नजदीकी CSC से अपने जिले की तारीख जरूर पूछें। देर से आवेदन का कोई प्रावधान नहीं है।
क्लेम की प्रक्रिया: स्टेप बाय स्टेप
Step 1 — नुकसान की सूचना: फसल खराब होते ही 72 घंटे के अंदर रिपोर्ट करें — pmfby.gov.in, Crop Insurance App, 14447 या WhatsApp 7065514447 पर।
Step 2 — सर्वे और आकलन: बीमा कंपनी और कृषि विभाग की टीम नुकसान का आकलन करती है — अब सैटेलाइट और ड्रोन से भी।
Step 3 — क्लेम स्वीकृति: राज्य सरकार के आंकड़ों और तकनीकी आकलन के आधार पर क्लेम तय होता है।
Step 4 — सीधा भुगतान: राशि किसान के बैंक खाते में DBT से आती है — कोई बिचौलिया नहीं।
कृषि रक्षक: शिकायत का मंच
अगर आवेदन अटके, क्लेम न मिले या कोई गलती हो — Krishi Rakshak Portal पर शिकायत दर्ज करें। हेल्पलाइन 14447 पर भी मदद मिलती है। यहीं से:
- आवेदन की स्थिति देखें
- क्लेम की प्रगति ट्रैक करें
- गलत प्रीमियम या नाम की गलती सुधरवाएं
50 से ज्यादा फसलें कवर
PMFBY में 50 से अधिक फसलों का बीमा होता है — अनाज, दलहन, तिलहन, व्यावसायिक और बागवानी फसलें। लेकिन ध्यान रहे: आपके राज्य और जिले में कौन सी फसल अधिसूचित है, यह राज्य सरकार तय करती है। आवेदन से पहले अपने जिले की अधिसूचित फसल सूची जरूर देखें।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष
योजना खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है — कम प्रीमियम की वजह से 1-2 एकड़ वाला किसान भी बीमा ले सकता है। बजट आवंटन में SC/ST और महिला किसानों की जमीन के अनुपात का ध्यान रखने का प्रावधान है।
और सवाल-जवाब
सवाल 8: प्रीमियम की गणना कैसे होती है?
जवाब: बीमित राशि × प्रीमियम दर (खरीफ 2%, रबी 1.5%, बागवानी 5%)। pmfby.gov.in पर कैलकुलेटर से जांचें।
सवाल 9: क्या एक ही फसल पर दो बीमे ले सकते हैं?
जवाब: नहीं — एक ही नुकसान के लिए दो जगह से मुआवजा नहीं मिलता।
सवाल 10: क्लेम न मिले तो क्या करें?
जवाब: कृषि रक्षक पोर्टल या 14
अंत में: सही कदम उठाएं
फसल बीमा कोई खर्च नहीं, सुरक्षा है। pmfby.gov.in पर जाकर आज ही अपनी फसल और जिले की जानकारी जांचें। कट-ऑफ तारीख से पहले आवेदन करें, प्रीमियम की रसीद संभालकर रखें, और नुकसान होने पर 72 घंटे में रिपोर्ट करें। जागरूक किसान ही योजना का पूरा लाभ उठा पाता है।
447 पर शिकायत दर्ज करें।सवाल 11: क्या फल-सब्जी की खेती कवर है?
जवाब: हां, बागवानी फसलें 5% प्रीमियम पर कवर हैं (अधिसूचित होनी चाहिए)।
सवाल 12: जंगली जानवर से नुकसान कवर है?
जवाब: खरीफ 2026 से जंगली जानवर के हमले और धान में जलभराव का कवर भी जोड़ा गया है।
सवाल 13: आधार जरूरी है?
जवाब: हां, पहचान और DBT के लिए आधार आवश्यक है।
सवाल 14: CSC से आवेदन में फीस लगती है?
जवाब: आवेदन निःशुल्क है — सिर्फ बीमा प्रीमियम देना होता है।
सवाल 15: पुरानी बीमा योजना वाले क्या करें?
जवाब: PMFBY ने पुरानी योजनाओं की जगह ले ली है — नया आवेदन PMFBY में ही होगा।
महत्वपूर्ण लिंक
- आधिकारिक पोर्टल: pmfby.gov.in
- हेल्पलाइन: 14447
अस्वीकरण: GramSuvidha एक निजी सूचना पोर्टल (सरकारी वेबसाइट नहीं) है। जानकारी pmfby.gov.in और कृषि मंत्रालय के आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है।





