सड़क किनारे सब्ज़ी बेचने वाले, फल वाले, चाय की ठेली लगाने वाले, मोची, नाई, दर्ज़ी — ये सभी हमारे शहरों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। लेकिन इनके पास अक्सर इतनी पूंजी नहीं होती कि वे अपना काम बढ़ा सकें, और बैंक से लोन लेना इनके लिए मुश्किल होता है। इसी परेशानी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने PM Swanidhi Yojana शुरू की थी। इसका आधिकारिक नाम PM SVANidhi (Prime Minister Street Vendor’s AtmaNirbhar Nidhi) है।
यह योजना आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme) है, जिसे जून 2020 में शुरू किया गया था। इसका मकसद रेहड़ी-पटरी वालों को बिना कुछ गिरवी रखे, सस्ता वर्किंग कैपिटल लोन देना है, ताकि वे अपना रोज़गार फिर से खड़ा कर सकें और धीरे-धीरे अपने काम को बढ़ा सकें।
अगस्त 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना का पुनर्गठन (restructuring) करके इसे 31 मार्च 2030 तक बढ़ा दिया है, लोन की रकम बढ़ा दी है और कई नई सुविधाएं जोड़ी हैं। इस लेख में हम सिर्फ आधिकारिक सरकारी जानकारी के आधार पर बताएंगे कि इस योजना में क्या-क्या मिलता है, कौन आवेदन कर सकता है, कौन से कागज़ चाहिए और आवेदन कैसे करना है।
PM Swanidhi Yojana एक नज़र में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | PM SVANidhi – Prime Minister Street Vendor’s AtmaNirbhar Nidhi |
| शुरू करने वाला मंत्रालय | आवास और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार |
| शुरुआत | जून 2020 |
| योजना का प्रकार | केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme) |
| पहली किस्त का लोन | ₹15,000 तक |
| दूसरी किस्त का लोन | ₹25,000 तक |
| तीसरी किस्त का लोन | ₹50,000 तक |
| ब्याज सब्सिडी | समय पर चुकाने पर 7% प्रति वर्ष |
| डिजिटल कैशबैक | साल में ₹1,600 तक |
| लोन की अवधि (lending period) | 31 मार्च 2030 तक बढ़ाई गई |
| कुल बजट | ₹7,332 करोड़ |
| लक्ष्य लाभार्थी | 1.15 करोड़ रेहड़ी-पटरी विक्रेता (50 लाख नए लाभार्थी सहित) |
| आधिकारिक वेबसाइट | pmsvanidhi.mohua.gov.in |
2025 में योजना का पुनर्गठन: क्या-क्या बदला?
27 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने PM SVANidhi योजना के पुनर्गठन और लोन अवधि बढ़ाने को मंजूरी दी। पहले यह योजना 31 दिसंबर 2024 तक थी, अब इसके तहत 31 मार्च 2030 तक लोन दिए जाएंगे। पुनर्गठित योजना का कुल बजट ₹7,332 करोड़ है और इसका लक्ष्य 1.15 करोड़ रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं तक पहुंचना है, जिनमें 50 लाख नए लाभार्थी भी शामिल हैं।
पुनर्गठन में सबसे बड़ा बदलाव लोन की रकम में हुआ है। पहले पहली किस्त में ₹10,000 तक का लोन मिलता था, अब पहली किस्त में ₹15,000 तक का लोन मिलेगा। दूसरी किस्त ₹20,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई है, जबकि तीसरी किस्त ₹50,000 पर ही रखी गई है। यानी समय पर लोन चुकाने वाले विक्रेता अब पहले से ज़्यादा रकम का लोन ले सकते हैं।
इसके अलावा, जिन विक्रेताओं ने दूसरी किस्त का लोन समय पर चुका दिया है, उन्हें अब UPI से जुड़ा RuPay क्रेडिट कार्ड भी मिलेगा, ताकि कारोबार या निजी ज़रूरत के समय उन्हें तुरंत क्रेडिट मिल सके। डिजिटल लेनदेन पर कैशबैक की सुविधा भी बढ़ाई गई है — अब विक्रेता खुदरा (retail) और थोक (wholesale) दोनों तरह के डिजिटल लेनदेन पर कैशबैक पा सकते हैं।
योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब यह सिर्फ वैधानिक शहरों (statutory towns) तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जनगणना शहरों (census towns) और peri-urban इलाकों के विक्रेता भी चरणबद्ध तरीके से इसका लाभ ले सकेंगे। योजना के क्रियान्वयन की संयुक्त ज़िम्मेदारी आवास और शहरी कार्य मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) की है — वित्तीय सेवा विभाग बैंकों और वित्तीय संस्थानों के ज़रिए लोन और क्रेडिट कार्ड की सुविधा पहुंचाने का काम देखता है।
लोन की तीन किस्तें: कितना लोन, कब मिलेगा?
PM Swanidhi Yojana में लोन तीन चरणों (tranches) में मिलता है। हर अगली किस्त पाने के लिए पिछली किस्त का लोन समय पर चुकाना ज़रूरी है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि विक्रेताओं में नियमित किश्त चुकाने की आदत बने और उनका क्रेडिट इतिहास (credit history) तैयार हो।
पहली किस्त: ₹15,000 तक
पहली बार आवेदन करने वाले पात्र विक्रेता को ₹15,000 तक का वर्किंग कैपिटल लोन मिलता है। मूल योजना में यह रकम ₹10,000 थी और लोन की अवधि एक साल थी। पुनर्गठित योजना में पहली किस्त की सीमा बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है। यह लोन पूरी तरह बिना किसी गारंटी या गिरवी (collateral-free) के मिलता है — आपको अपनी दुकान, ज़मीन या कोई सामान गिरवी नहीं रखना पड़ता।
दूसरी किस्त: ₹25,000 तक
अगर आपने पहली किस्त का लोन समय पर चुका दिया, तो आप दूसरी किस्त में ₹25,000 तक का लोन ले सकते हैं। पहले यह सीमा ₹20,000 थी। समय पर चुकाने पर आपको 7% सालाना ब्याज सब्सिडी भी मिलती है, जो सीधे आपके बैंक खाते में आती है।
तीसरी किस्त: ₹50,000 तक
दूसरी किस्त का लोन समय पर चुकाने के बाद आप तीसरी किस्त में ₹50,000 तक का लोन ले सकते हैं। यह सबसे बड़ी रकम है और इसका मकसद आपके कारोबार को स्थायी रूप से बढ़ाने में मदद करना है।
एक खास बात: अगर आप लोन तय समय से पहले चुका देते हैं, तो कोई जुर्माना (penalty) नहीं लगता। बल्कि समय से पहले चुकाने पर भी आपको ब्याज सब्सिडी का पूरा लाभ मिलता है।
7% ब्याज सब्सिडी: कैसे काम करती है?
इस योजना की सबसे बड़ी खासियतों में से एक है 7% प्रति वर्ष की ब्याज सब्सिडी। इसका मतलब है कि अगर आप अपना लोन समय पर या समय से पहले चुका देते हैं, तो सरकार आपके लोन पर लगने वाले ब्याज का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन करती है।
यह सब्सिडी तिमाही आधार (quarterly basis) पर सीधे आपके बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए जमा की जाती है। अगर आप लोन समय से पहले पूरा चुका देते हैं, तो सब्सिडी की पूरी स्वीकार्य रकम एक साथ आपके खाते में डाल दी जाती है।
आधिकारिक FAQ में एक उदाहरण दिया गया है: मूल योजना के तहत ₹10,000 के लोन पर अगर आप सभी 12 किश्तें समय पर चुकाते हैं, तो आपको लगभग ₹400 ब्याज सब्सिडी के रूप में मिलते हैं। पुनर्गठित योजना में लोन की रकम बढ़ने के साथ यह लाभ भी उसी अनुपात में मिलेगा, क्योंकि सब्सिडी की दर 7% प्रति वर्ष तय है।
ध्यान रहे: यह सब्सिडी सिर्फ तभी मिलती है जब आप समय पर या समय से पहले किश्त चुकाते हैं। नियमित भुगतान न करने पर आप इस लाभ से वंचित रह सकते हैं और अगली किस्त का लोन भी नहीं मिलेगा।
डिजिटल लेनदेन पर कैशबैक: साल में ₹1,600 तक
सरकार चाहती है कि रेहड़ी-पटरी विक्रेता भी डिजिटल भुगतान अपनाएं। इसलिए योजना में डिजिटल लेनदेन पर कैशबैक की सुविधा दी गई है। पुनर्गठित योजना के अनुसार विक्रेता दो तरह से कैशबैक पा सकते हैं:
- खुदरा बिक्री (regular sales) पर: डिजिटल माध्यम से की गई नियमित बिक्री पर ₹1,200 तक का कैशबैक, जिसमें हर महीने अधिकतम ₹100 मिल सकता है।
- थोक खरीद (wholesale purchases) पर: ₹2,000 या उससे ज़्यादा की थोक खरीद पर ₹400 तक का कैशबैक — हर लेनदेन पर ₹20, और हर तिमाही में अधिकतम ₹100।
इस तरह एक विक्रेता साल भर में कुल ₹1,600 तक का कैशबैक पा सकता है। मूल योजना में कैशबैक का ढांचा इस प्रकार था: 50 डिजिटल लेनदेन पर ₹50, अगले 50 लेनदेन पर अतिरिक्त ₹25, और अगले 100 लेनदेन पर अतिरिक्त ₹25 — यानी हर महीने ₹50 से ₹100 तक। हर लेनदेन ₹25 से ज़्यादा का होना चाहिए था ताकि वह गिना जाए।
डिजिटल लेनदेन शुरू करने में मदद के लिए योजना के तहत विक्रेताओं को QR कोड दिया जाता है और उन्हें डिजिटल भुगतान करना सिखाया भी जाता है। माइक्रो-फाइनेंस संस्थान या पेमेंट एग्रीगेटर के एजेंट विक्रेता के पास आकर उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ते हैं और नमूने के तौर पर कुछ लेनदेन करके दिखाते हैं।
UPI से जुड़ा RuPay क्रेडिट कार्ड
पुनर्गठित योजना की एक नई सुविधा है UPI से जुड़ा RuPay क्रेडिट कार्ड। यह कार्ड उन लाभार्थियों को मिलेगा जिन्होंने दूसरी किस्त का लोन समय पर चुका दिया है। इसका मकसद है कि कारोबार या निजी ज़रूरत के समय विक्रेता को तुरंत क्रेडिट मिल सके, बिना नए लोन के लिए आवेदन किए।
यह सुविधा दिखाती है कि योजना अब सिर्फ राहत देने तक सीमित नहीं है — इसका लक्ष्य विक्रेताओं को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़कर उन्हें स्थायी सूक्ष्म उद्यमी बनाना है।
कौन आवेदन कर सकता है? (पात्रता)
आधिकारिक FAQ के अनुसार, इस योजना के लक्षित लाभार्थी हैं: शहरी इलाकों में 24 मार्च 2020 को या उससे पहले से वेंडिंग कर रहे रेहड़ी-पटरी विक्रेता/फेरीवाले, जिनमें आसपास के peri-urban और ग्रामीण इलाकों के विक्रेता भी शामिल हैं जो शहर की भौगोलिक सीमा में वेंडिंग करते हैं।
रेहड़ी-पटरी विक्रेता कौन है? आधिकारिक परिभाषा के अनुसार, ऐसा कोई भी व्यक्ति जो सड़क, फुटपाथ या पटरी पर अस्थायी ढांचे से या घूम-घूमकर सामान बेचता है या सेवाएं देता है। इनमें शामिल हैं:
- सामान बेचने वाले: सब्ज़ी, फल, तैयार स्ट्रीट फूड, चाय, पकोड़े, ब्रेड, अंडे, कपड़े, परिधान, हस्तशिल्प उत्पाद, किताबें/स्टेशनरी आदि बेचने वाले।
- सेवा देने वाले: नाई की दुकान, मोची, पान की दुकान, लॉन्ड्री सेवा आदि।
सर्वे में शामिल विक्रेता: अगर शहरी स्थानीय निकाय (ULB) द्वारा किए गए सर्वे में आपका नाम है, तो आप सीधे आवेदन कर सकते हैं। सर्वे सूची में अपना नाम आप pmsvanidhi.mohua.gov.in वेबसाइट पर देख सकते हैं। अगर सर्वे सूची में नाम होने के बावजूद आपके पास पहचान पत्र या वेंडिंग प्रमाणपत्र नहीं है, तो भी आप लाभ ले सकते हैं — आईटी आधारित प्लेटफॉर्म के ज़रिए अस्थायी वेंडिंग प्रमाणपत्र (Provisional Certificate of Vending) जारी किया जाएगा।
सर्वे में नाम नहीं है तो क्या करें? जो विक्रेता सर्वे से छूट गए हैं, वे ULB या टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) से सिफारिश पत्र (Letter of Recommendation – LoR) लेकर आवेदन कर सकते हैं। LoR पाने के लिए नीचे दिए गए दस्तावेज़ों में से कोई एक देना होगा:
- लॉकडाउन के दौरान किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा दी गई एकमुश्त सहायता लेने का प्रमाण; या
- वेंडिंग के उद्देश्य से बैंक/NBFC/MFI से लिए गए पुराने लोन के दस्तावेज़; या
- विक्रेता संघों की सदस्यता का विवरण; या
- यह साबित करने वाला कोई अन्य दस्तावेज़ कि आप विक्रेता हैं।
आप सादे कागज़ पर एक साधारण आवेदन देकर ULB से स्थानीय जांच कराने का अनुरोध भी कर सकते हैं, ताकि आपके दावे की सत्यता जांची जा सके। LoR मिलने के बाद आप बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) या MFI एजेंट के पास जाकर लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आसपास के ग्रामीण इलाके के विक्रेता: अगर आप आसपास के ग्रामीण इलाके में रहते हैं लेकिन शहर में वेंडिंग करते हैं, तो भी आप पात्र हैं — ऊपर बताई गई LoR प्रक्रिया से आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
आधिकारिक FAQ के अनुसार, वेंडिंग प्रमाणपत्र/पहचान पत्र/LoR के अलावा निम्नलिखित KYC दस्तावेज़ चाहिए:
- आधार कार्ड (अनिवार्य)
- मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) (अनिवार्य)
- ड्राइविंग लाइसेंस
- मनरेगा कार्ड (MNREGA Card)
- पैन कार्ड
आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य हैं। बाकी दस्तावेज़ सहायक के रूप में काम आते हैं। आवेदन के समय आपके पास एक बैंक खाता भी होना चाहिए, क्योंकि लोन की रकम और ब्याज सब्सिडी सीधे उसी खाते में आएगी।
आवेदन कैसे करें? (पूरी प्रक्रिया)
आवेदन की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए इसे मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के ज़रिए स्वचालित किया गया है। आप अपने आवेदन की स्थिति रियल टाइम में देख सकते हैं। अगर आपके कागज़ पूरे हैं, तो पूरी प्रक्रिया में 30 दिन से कम समय लग सकता है।
चरण 1: पात्रता जांचें
सबसे पहले pmsvanidhi.mohua.gov.in पर जाकर देखें कि सर्वे सूची में आपका नाम है या नहीं। अगर नाम है और आपके पास पहचान पत्र/वेंडिंग प्रमाणपत्र है, तो आप सीधे आगे बढ़ सकते हैं।
चरण 2: बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट या MFI एजेंट से मिलें
आपके इलाके के बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) या माइक्रो-फाइनेंस संस्थान के एजेंट से संपर्क करें — इनकी सूची ULB के पास उपलब्ध रहती है। ये एजेंट आपका आवेदन भरने और दस्तावेज़ मोबाइल ऐप/पोर्टल पर अपलोड करने में मदद करेंगे।
चरण 3: आवेदन भरें और दस्तावेज़ अपलोड करें
एजेंट की मदद से ऑनलाइन आवेदन भरें और अपने KYC दस्तावेज़ (आधार, वोटर ID आदि) अपलोड करें। अगर सर्वे में नाम नहीं है, तो पहले ULB/TVC से LoR लें।
चरण 4: लोन स्वीकृति और पहचान पत्र
लोन स्वीकृत होने पर आपको अस्थायी पहचान पत्र (Provisional Identity Card) जारी किया जाएगा, और 30 दिनों के भीतर स्थायी वेंडिंग प्रमाणपत्र/पहचान पत्र मिल जाएगा। लोन की रकम सीधे आपके बैंक खाते में आएगी।
किन बैंकों/संस्थानों से लोन मिलेगा?
योजना के तहत लोन देने वाली संस्थाओं में शामिल हैं: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, लघु वित्त बैंक, सहकारी बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC), माइक्रो-फाइनेंस संस्थान और SHG बैंक। यानी आप अपने नज़दीकी बैंक या MFI के ज़रिए भी आवेदन कर सकते हैं।
अपनी संभावनाएं बढ़ाने के लिए आप ULB द्वारा बनाए गए सामान्य हित समूह (CIG) या लोन देने वाली संस्था द्वारा बनाए गए संयुक्त देयता समूह (JLG) का हिस्सा भी बन सकते हैं।
SVANidhi se Samriddhi: सिर्फ लोन नहीं, पूरा कल्याण
PM Swanidhi Yojana सिर्फ लोन देने तक सीमित नहीं है। इसके ‘SVANidhi se Samriddhi’ घटक के तहत लाभार्थियों को भारत सरकार की 8 कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया है। इसका मकसद है कि विक्रेता और उनके परिवार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएं।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 47 लाख से ज़्यादा रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और उनके परिवारों की प्रोफाइलिंग पूरी हो चुकी है, और 9 दिसंबर 2025 तक 1.46 करोड़ से ज़्यादा योजनाओं के तहत लाभ स्वीकृत किए जा चुके हैं। इस घटक को और मज़बूत करने के लिए 17 सितंबर से 15 अक्टूबर 2025 तक सभी शहरी स्थानीय निकायों में लोक कल्याण मेले आयोजित किए गए, जिनमें विक्रेताओं को जोड़ा गया, लोन आवेदन लिए गए, लोन का तेज़ वितरण किया गया और लाभार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया।
क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण
योजना में विक्रेताओं की क्षमता निर्माण पर भी ज़ोर दिया गया है। इसके तहत उद्यमिता (entrepreneurship), वित्तीय साक्षरता, डिजिटल कौशल और मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए FSSAI के साथ साझेदारी में स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा का मानक प्रशिक्षण भी कराया जाता है, ताकि ग्राहकों को सुरक्षित और साफ खाना मिले।
इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिला है — इसे लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार (2023) और डिजिटल परिवर्तन के लिए सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन में उत्कृष्टता का सिल्वर पुरस्कार (2022) मिल चुका है।
शिकायत या मदद कहां से लें?
अगर आपको योजना से जुड़ी कोई शिकायत है या मदद चाहिए, तो आप मंत्रालय के निम्नलिखित अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं (आधिकारिक FAQ के अनुसार):
- निदेशक (NULM), आवास और शहरी कार्य मंत्रालय
- कमरा नंबर 334-C, निर्माण भवन, मौलाना आज़ाद रोड, नई दिल्ली – 110011
- ईमेल: neeraj.kumar3@gov.in
- फोन: 011-23062850
इसके अलावा आप अपने इलाके के SHG, ALF या CLF के सदस्य से भी मिल सकते हैं, या योजना के टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
आधिकारिक लिंक
- आधिकारिक पोर्टल: pmsvanidhi.mohua.gov.in — आवेदन, सर्वे सूची और लोन की स्थिति यहीं देखें
- मंत्रालय की वेबसाइट: mohua.gov.in
- ईमेल: dirnulm@gov.in
हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से ही आवेदन करें। किसी भी बिचौलिए को पैसे न दें — योजना के तहत आवेदन की प्रक्रिया निःशुल्क है और किसी गारंटी की ज़रूरत नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. ब्याज सब्सिडी कैसे और कब मिलती है?
समय पर या समय से पहले लोन चुकाने पर 7% प्रति वर्ष की ब्याज सब्सिडी मिलती है। यह रकम हर तिमाही सीधे आपके बैंक खाते में DBT के ज़रिए जमा होती है। अगर आप लोन समय से पहले पूरा चुका देते हैं, तो सब्सिडी की पूरी रकम एक साथ मिल जाती है।
2. क्या लोन के लिए कुछ गिरवी रखना पड़ता है?
नहीं। यह लोन पूरी तरह बिना किसी गारंटी या गिरवी (collateral-free) के मिलता है। आपको अपनी संपत्ति या सामान गिरवी रखने की ज़रूरत नहीं है।
3. सर्वे सूची में मेरा नाम नहीं है। क्या मैं आवेदन कर सकता हूं?
हां। आप ULB या टाउन वेंडिंग कमेटी से सिफारिश पत्र (LoR) लेकर आवेदन कर सकते हैं। LoR के लिए आपको यह साबित करना होगा कि आप वेंडिंग करते हैं — जैसे लॉकडाउन सहायता का प्रमाण, पुराने लोन के कागज़, विक्रेता संघ की सदस्यता या कोई अन्य प्रमाण। आप सादे कागज़ पर आवेदन देकर ULB से स्थानीय जांच का अनुरोध भी कर सकते हैं।
4. डिजिटल कैशबैक पाने के लिए क्या करना होगा?
आपको डिजिटल माध्यम (जैसे UPI/QR कोड) से लेनदेन करना होगा। खुदरा बिक्री पर साल में ₹1,200 तक (हर महीने अधिकतम ₹100) और ₹2,000 से ज़्यादा की थोक खरीद पर साल में ₹400 तक का कैशबैक मिल सकता है। योजना के तहत आपको QR कोड और डिजिटल प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
5. दूसरी और तीसरी किस्त का लोन कब मिलेगा?
जब आप पहली किस्त का लोन समय पर चुका देते हैं, तो आप दूसरी किस्त (₹25,000 तक) के पात्र हो जाते हैं। दूसरी किस्त समय पर चुकाने के बाद तीसरी किस्त (₹50,000 तक) मिलती है। समय से पहले लोन चुकाने पर कोई जुर्माना नहीं लगता।
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